01/04/2022
तू औरत है तो औरतों की तरह रहना सीख
नज़रें मिलाती है नजरें झुकाना सीख
ज्यादा बोलती है चुप रह जरा सबकी मानना सीख
बहुत सुनी होंगी ऐसी बातें
ए औरत अब जरा कुछ कहना सीख
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मत सह जमाने की बंदिशें जरा पंख फैलाना सीख
औरत अब जरा कुछ कहना सीख
जुल्म सहती हो तभी सब जुल्म करते हैं
नजरें झुकाती हो तभी सब फब्तियां कसते है
ए औरत अब जरा कुछ कहना सीख
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तुम्हारी आंखों में है ज्वाला एक बार जगाना सीख
औरत अब जरा कुछ कहना सीख
औरत ही औरत का सहारा बन तो सकती है
अगर एक हो मझदार में तो दूसरी किनारा बन तो सकती है
जरा अपने हालात को बेहतर बनाना सीख
औरत अब जरा कुछ कहना सीख
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तू मां पत्नी बेटी प्रेयसी सब कुछ है
ना हो किसी भी रूप में तो जीवन में दुख ही दुख है
मत खोज खुशी दूसरों में अब जरा मुस्कुराना सीख
औरत अब जरा कुछ कहना सीख
"अरुण"
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