03/04/2022
#धतूरे की #जड़ का महत्व
सामान्य रूप से #शनि ग्रह अच्छा नहीं माना जाता है, परंतु यदि जीवन में इसकी कृपा दृष्टि बरसती है तो व्यक्ति के भाग्य खुल जाते हैं। यह हमारे कर्म का कारक होता है। शनि दोष के कारण व्यक्ति का जीवन कष्टमय गुजरता है। इसलिए इसके बुरे प्रभाव से बचने एवं कृपा दृष्टि पाने के लिए जड़ को धारण करना शुभ माना जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से तंत्रिका और गठिया रोग से मुक्ति पाने के लिए भी यह बेहद कारगर है।
धारण करने की विधि
धतूरे की जड़ को शनिवार के दिन धारण करना चाहिए।
जड़ को गंगा जल से पहले स्वच्छ कर लें।
फिर “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥” मंत्र का जाप करें।
अब नीले कपड़े में इसे लपेटकर अपनी दाहिने हाथ की बाजु में बाँध लें।
प्राचीन समय में बीमारियाें के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि का इस्तेमाल किया जाता था। कर्इ तरह की आयुर्वेदिक औषधियां प्रकृति से मिलती थी। जाे हर तरह की बीमारी काे दूर करने के लिए लाभकारी हाेती थी। आज हम आपकाे एक एेसी ही आयुर्वेदिक आैषधि के बारे में बताने वाले हैं। आयुर्वेद में धतूरे के उपयोग से अनेक रोगों को दूर करने की विधियों का वर्णन विस्तार पूर्वक देखने को मिलता है। धतूरा एक जहरीले किस्म का पौधा होता है। यह स्वाद में बहुत ही कड़वा होता है, लेकिन धतूरे के इस्तेमाल से ये तीन रोग जड़ से खत्म हो जाते हैं। ताे आइए आपकाे बताते हैं कि कैसे धतूरा इन बीमारियाें काे दूर करने में असरदार साबित हाेता है।
अगर आप बवासीर के रोग से परेशान हैं ताे इसको जड़ से खत्म करने के लिए धतूरा बहुत ही उपयोगी होता है। इसके लिए धतूरे के फूल और पत्तियों को काम में लिया जाता है। धतूरे के फूल और पत्तियों को जलाकर उनकी धुंए से बवासीर के मस्सों की सिकाई करने से ये नष्ट हो जाते हैं। ये बवासीर की बीमारी काे जड़ से खत्म करने के लिए रामबाण उपाय है।
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