02/03/2026
खोमैनई ने जब से सत्ता संभाला उसने अपने देश के विकास के लिए अपने देश के लोगों के जीवन स्तर को शानदार बनाने के लिए कुछ नहीं किया
उसने संविधान में संशोधन करके इसराइल को देश मानने से इनकार कर दिया और यहूदियों को शैतान घोषित कर दिया
यानी कि एक पूरे के पूरे समुदाय को लोगों को ही उसने शैतान घोषित कर दिया
यानी खुमनई यह मानता था कि यहूदी इंसान नहीं है उन्हें जीने का कोई अधिकार नहीं है
उसके बाद उसने पूरी ताकत इसराइल को मिटाने पर लगा दिया
इसराइल के चारों तरफ उसने कई प्रोक्सी आतंकवादी संगठन खड़ा कर दिए थे
लेबनान में हिजबुल्ला को खड़ा किया गाजा में हमास को खड़ा किया यमन में हुती को खड़ा किया सीरिया में तीन संगठन को खड़ा किया और पूरा रिसर्च पूरा पैसा बैलिस्टिक मिसाइल ड्रोन रॉकेट इत्यादि बनाने में लगा दिया
और वह खुलेआम कहता था कि मेरी एक मात्र इच्छा है इजरायल विश्व के नक्शे से मिटना चाहिए और इस धरती पर एक भी यहूदी नहीं होना चाहिए
यही होता है जब आप दूसरों के विनाश की उम्मीद में अपना पूरा जीवन लगा देते हैं
यानी आप खुद खत्म हो जाते हैं
खुमैनई के बारे में एक कहावत कही जाती थी की खूमनई सिर्फ दो लोगों से नफरत करता था एक यहूदी दूसरा महिलाये
उसके लिए दोनों को जीने का अधिकार नहीं है
अपने ही देश की महिलाओं का जीवन उसने नर्क बना दिया बल्कि नर्क से बदतर बना दिया
महिलाएं इतनी प्रताड़ित हो चुकी थी की मौत से डरना छोड़कर कई बार महिलाएं गुस्से में नंगे ही सड़कों पर निकल जाती थी की आओ मुझे मार दो कोई महिला अगर हिजाब नहीं पहनती थी तो उसका सरकारी आदेश पर कत्ल करवा दिया जाता था
खुमनई इसी सपने में था कि किसी तरह से मैं परमाणु बम बना दूं और इसराइल पर परमाणु बम गिराकर पूरे इसराइल को खत्म कर दूँ
लेकिन दूसरों को मिटाने का सपना देखने वाले खुद मिट जाते हैं खुद अपने देश को बर्बाद कर देते हैं
अच्छा होता कि अगर खूमनई अपनी देश की तरक्की के लिए काम करता और उसके देश को ईश्वर में तेल दिया है बेहद शानदार उपजाऊ जमीन दिया है पिस्ता ऑलिव से लेकर अखरोट खुबानी जैसे तमाम महंगे ड्राई फ्रूट ईरान में बड़े पैमाने पर उगते हैं बड़ी शानदार खेती होती है बागवानी होती है
इसके अलावा ईरान में बड़े पैमाने पर खनिज के भी भंडार हैं
मतलब ईरान में वह सब कुछ है जो किसी देश में होना चाहिए और सबसे बड़ी बात यह की गैस और तेल भी है लेकिन नफरत की आग में जलते हुए खुमनई इतना अंधा हो चुका था कि वह अपना विवेक खो चुका था
अफसोस यह की जो कोई उसे समझाने की कोशिश करता था..उसे अपना दुश्मन समझता था और उसका कत्ल करवा देता था
इसराइल को मिटाने का सपना देखने वाला आज खुद मिट गया..... 😕🙂
नफ़रत की राजनीति और एक देश की कीमत
Ali Khamenei जब सत्ता में आए, तब उम्मीद थी कि Iran अपने तेल, गैस, उपजाऊ ज़मीन और खनिज संपदा के दम पर नई ऊँचाइयों को छुएगा।
पिस्ता, ऑलिव, अखरोट, खुबानी… प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर यह देश दुनिया की आर्थिक ताकत बन सकता था।
लेकिन आलोचकों का आरोप है कि प्राथमिकताएँ विकास से ज़्यादा वैचारिक टकराव पर रहीं।
Israel के साथ दुश्मनी खुलकर सामने आई।
क्षेत्रीय राजनीति में Hezbollah (लेबनान), Hamas (ग़ाज़ा) और Houthi movement (यमन) जैसे समूहों को समर्थन देने के आरोप लगे।
मिसाइल, ड्रोन और परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता गया।
दूसरी ओर, देश के भीतर महिलाओं की आज़ादी और नागरिक अधिकारों को लेकर कई आंदोलन हुए।
हिजाब कानूनों और सामाजिक प्रतिबंधों के खिलाफ़ सड़कों पर उतरी महिलाओं की तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं।
सवाल यह है —
जब किसी राष्ट्र की ऊर्जा विकास, शिक्षा, रोजगार और समान अधिकारों की बजाय टकराव और वैचारिक युद्ध में लग जाती है, तो कीमत कौन चुकाता है?
अक्सर जवाब होता है — आम जनता।
इतिहास बार-बार यही सिखाता है:
जो नेतृत्व अपने देश की ताकत को निर्माण की बजाय विनाश की दिशा में मोड़ देता है, वह अंततः अपने ही भविष्य को कमजोर करता है।
राष्ट्र नफ़रत से नहीं, संतुलन, विकास और नागरिकों के सम्मान से मजबूत होते हैं।