Art Director Vimlesh Lal

Art Director Vimlesh Lal We can help you Design your Dream project. not only in India but World wide..

Concept design, presentation,
Art Direction & Set Design for your- Film,TV- Shows, Ad, Music Videos, Live Shows, Events, Expo,Talk Shows, theme interior, in your budget, more than 20 years of experience. We create an ambiance.With Your vision and our perception.For the final ex*****on we have highly specialized people who can understand and analyze our final design idea and finish making them in a very short period, we also keep the construction and finishing under the stipulated budget.

हर दिन कई शानदार आइडियाज़ पीछे रह जाते हैं…इसलिए नहीं कि आइडिया कमजोर था,बल्कि इसलिए कि उसकी प्रस्तुति असरदार नहीं थी।Pi...
07/05/2026

हर दिन कई शानदार आइडियाज़ पीछे रह जाते हैं…
इसलिए नहीं कि आइडिया कमजोर था,
बल्कि इसलिए कि उसकी प्रस्तुति असरदार नहीं थी।

Pitch Vault बनाता है cinematic और professional presentations —
Films, Brands, Agencies, Creators और Startups के लिए।

रफ कॉन्सेप्ट्स से लेकर powerful pitch decks तक,
हम ideas को ऐसी presentations में बदलते हैं
जो साफ़, प्रभावशाली और याद रह जाने वाली हों।

Film pitches. Brand decks. Visual storytelling. Investor presentations.

आपके आइडिया को एक बेहतर प्रस्तुति मिलनी चाहिए।

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Great ideas fail every day…
not because the idea is weak,
but because the presentation fails first.

Pitch Vault creates cinematic, professional presentations for:

• Films
• Brands
• Agencies
• Creators
• Startups

From rough concepts to powerful pitch decks,
we turn ideas into presentations that feel clear, compelling and unforgettable.

Film pitches. Brand decks. Visual storytelling. Investor presentations.

Your idea deserves a better presentation.

WhatsApp: 9172729182

04/05/2026
05/04/2026

Set design by Vimlesh Lall

It is an honour to present my work at The Bombay Art Society’s 134th All India Annual Art Exhibition — a historic platfo...
17/02/2026

It is an honour to present my work at The Bombay Art Society’s 134th All India Annual Art Exhibition — a historic platform that continues to recognize and celebrate artistic excellence.
To be included among distinguished artists from across the country is both humbling and deeply encouraging.
📍 Jehangir Art Gallery, Kala Ghoda, Mumbai
🗓 24 February – 2 March 2026
⏰ 11:00 AM – 7:00 PM
I look forward to welcoming you.
— Vimlesh Lal

Dear Friends...Words cannot express the depth of my gratitude for the overwhelming love and blessings I received on my b...
23/08/2024

Dear Friends...Words cannot express the depth of my gratitude for the overwhelming love and blessings I received on my birthday. Each message, each wish, was like a brushstroke on the canvas of my heart, creating a masterpiece of joy and warmth. Your kindness and thoughtfulness have touched me deeply, and I am eternally grateful for your presence in my life.

Thank you for making my birthday a day to remember. Your support and friendship are the true gifts that I cherish. Let’s continue to create beautiful memories together!

With all my love and appreciation, 💫 I thank you all for the touching birthday messages. God bless you...

मेरे जन्मदिन पर मिले अपार प्यार और आशीर्वाद के लिए मेरी कृतज्ञता की गहराई को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। प्रत्येक संदेश, प्रत्येक इच्छा, मेरे दिल के कैनवास पर ब्रशस्ट्रोक की तरह थी, जो खुशी और गर्मजोशी की उत्कृष्ट कृति का निर्माण कर रही थी। आपकी दयालुता और विचारशीलता ने मुझे गहराई से प्रभावित किया है, और मैं अपने जीवन में आपकी उपस्थिति के लिए सदैव आभारी हूं।

मेरे जन्मदिन को यादगार दिन बनाने के लिए धन्यवाद। आपका समर्थन और दोस्ती सच्चे उपहार हैं जिन्हें मैं संजोकर रखता हूं। आइए मिलकर खूबसूरत यादें बनाना जारी रखें!

साल था 1938 । 1924 में मुंबई आए संगीतकार गुलाम मोहम्मद एक रूसी निर्माता हैड्रिंग डार्जिल की कंपनी न्यू पिक्चर्स की फिल्म...
20/03/2024

साल था 1938 । 1924 में मुंबई आए संगीतकार गुलाम मोहम्मद एक रूसी निर्माता हैड्रिंग डार्जिल की कंपनी न्यू पिक्चर्स की फिल्म ‘सुनहरी मकड़ी’ में सौ रुपए महीने पर तबला वादक नियुक्त हुए । इस फिल्म के संगीतकार थे उस्ताद झंडे खान और नौशाद को उनका सहायक बनने का मौका मिला था। तब तीन महीने में फिल्में और उनका संगीत तैयार हो जाता था। गुलाम मोहम्मद अकसर पैसा सूद पर देने वाले पठानों से उधार लेते थे। पठान 10 रुपए देकर महीने में 12 रुपए वसूलते थे। हर एक तारीख को पठान कंपनी में आ जाता था और कर्जदारों से उधार दिए पैसे छीन कर ले लेता था।
अनुबंध के आखिरी दिन नौशाद और गुलाम मोहम्मद को कंपनी ने चेक दे दिया। इधर पठान माथे पर आ कर खड़ा था। उसका कहना था कि पैसे तो उसे आज ही चाहिए। बैंक लगभग 12 किलोमीटर दूर बांद्रा में था। न नौशाद की जेब में फूटी कौड़ी थी, न गुलाम की जेब में। लिहाजा तय किया कि चेम्बूर से पैदल बांद्रा जाकर बैंक से पैसे लेकर पठान को दे दिए जाएं। पठान साथ पैदल चलने के लिए तैयार हो गया कि कहीं गुलाम पैसे दिए बिना भाग न जाएं। पठान दोनों की परेशानी समझ रहा था, मगर एक तारीख को अपने पैसे वसूलने का उसूल छोड़ने के लिए तैयार नहीं था। पैदल चलने के कारण भूख लगी तो गुलाम ने पठान से कहा कि लाला अपने पैसे से खाना खिला दो और उन्हें भी उधारी में जोड़ लो। पठान को भी उनकी हालत देखकर रहम आ गया और उसने बांद्रा के एक रेस्तरां में गुलाम और नौशाद को भरपेट खाना खिलाया मगर खाने के ढाई रुपए उधारी में जोड़ना नहीं भूला।
17 मार्च 1968 को ग़ुलाम मोहम्मद का निधन हुआ था। जिस वक्त इनका निधन हुआ था उस वक्त ये पाकीज़ा फिल्म का संगीत तैयार कर रहे थे। इनकी मृत्यु के बाद नौशाद साहब ने पाकीज़ा का म्यूज़िक कंप्लीट किया। और ग़ुलाम मोहम्मद व नौशाद साहब, दोनों के कंपोज़ किए गए गीत हमें पाकीज़ा फिल्म में देखने-सुनने को मिलते हैं।
पाकीज़ा फिल्म का गीत 'चलते-चलते यूं ही कोई मिल गया था सरेराह' ग़ुलाम मोहम्मद जी ने ही कंपोज़ किया था। कहते हैं कि इस गीत को कंपोज़ करते वक्त ग़ुलाम मोहम्मद जी ने अपने सारंगी वादक राम नारायण जी से 21 दफा रीटेक कराए थे। ताकि वो इफेक्ट निकलकर आ सके जो वो चाहते थे।

ये हैं उस्ताद डॉक्टर उस्ताद मुज़्तबा हुसैन,भारत के महान बांसुरीवादक और, मेरे बचपन के दोस्त,ये दुनिया इन जैसे लोगों की वजह...
16/03/2024

ये हैं उस्ताद डॉक्टर उस्ताद मुज़्तबा हुसैन,भारत के महान बांसुरीवादक और, मेरे बचपन के दोस्त,ये दुनिया इन जैसे लोगों की वजह से खूबसूरत लगती है, मां सरस्वती कीअपार कृपा है इनपर और इनके परिवार पर। ये पटियाला के पंजाबी यूनिवर्सिटी में संगीत के प्रोफसर हैं ,इनकी धर्मपत्नी सपना हुसैन एक अच्छी नृत्यांगना हैं वंही बेटी "चाहत हुसैन "अच्छी गायिका हैं ,

ये शायद भारत में प्रतिष्ठित एकमात्र मुस्लिम बासुरी वादक हैं , इनके दादा, रहीम बख्श खान, एक प्रसिद्ध शहनाई वादक थे, उन्होंने संगीत की शिक्षा कोलकाता के प्रसिद्ध उस्ताद फरजंद अली से प्राप्त की थी। लेकिन वह एक शौक था, वह एक अमीर जमींदार थे , जिनका पत्थरों का कारोबार फल-फूल रहा था। मुजतबा के पिता उस्ताद पीर बख्श और चाचा फहीमुल्ला खान, दोनों ने उस्ताद फरजंद अली से प्रशिक्षण लिया था, उन्होंने क्रमशः शहनाई और बांसुरी बजाना शुरू किया।
बाद में दोनों आकाशवाणी के पटना केन्द्र से जुड़ गये। युवा मुजतबा ने संगीत की दुनिया में अपना पहला अस्थायी कदम तब उठाया जब उनके उनके पिता, जो शहनाई और बांसुरी दोनों में समान रूप से माहिर थे, ने उन्हें शिक्षा देनी शुरू की और इस तरह यह सफर शुरू हुआ, जो अब मुजतबा को संगीत की दुनिया में नई ऊंचाइयों पर ले गया है।

हम दोनों की दोस्ती ईश्वर की सौगात है। अभी कुछ साल पहले इन्होने मुझे एक मौका दिया "कला ध्यानम" के लिए जंहा इनके बांसुरी वादन पर मुझे लाइव पेंटिंग करनी थी , संगीत में तबले के साथ हारमोनियम और संगीत के साथ नृत्य का संगत तो बहुत आम है लेकिन बांसुरी के साथ चित्रांकन का संगत नया प्रयोग था। पटियाला के फ़ाईन आर्ट्स विभाग ने ये प्रोग्राम स्पॉन्सर किया था। बड़े अहसान हैं इस भाई के मुझपर। केवल एक बार इसने मुझ पर गुस्सा किया था३० बरस पहले जब इसकी दी हुई इनकी प्रिय बांसुरी मैंने एक अमेरिकन लेखक फ्रेंड को गिफ्ट कर दिया था जो बांसुरी का बहुत शौकीन था। बाकि हमारे बिच कभी मतभेद नहीं हुआ , इनका प्यार सदैव मुझ पर बरसता रहा। आधुनिक भारत के महान बांसुरीवादक के रूप में इन्हे जाना जाता है गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत कितने ही शिष्य इनकी देख रेख में संगीत की शिक्षा ले रहे हैं , उन्होंने कई फिल्मों के लिए अपना संगीत दिया है, जिनमें सनी देओल अभिनीत गदर और अनिल कपूर अभिनीत विरासत शामिल हैं। वह एस/एसएच जैसे प्रसिद्ध संगीत निर्देशकों के साथ जुड़े रहे हैं। इन्होने कल्याणजी आनंदजी, रवींद्र जैन, आदेश श्रीवास्तव, आनंद मिलिंद, उत्तम सिंह जी के साथ भी काफी काम किया है

देश विदेशों में आये दिन इनके कॉन्सर्ट आयोजित होते रहते हैं। इन्होने "धुन अकादेमी ऑफ़ म्यूजिक एंड कल्चर" की स्थापना की है जो कला के विकास में बहुत अच्छा काम कर रही है, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में नेशनल यूनिवर्सिटी एसोसिएशन द्वारा आयोजित कम्पटीशन और युथ फेस्टिवल में हम दोनों को अपने यूनिवर्सिटी के लिए गोल्ड मैडल मिला था,तब से हमारी दोस्ती और भी गहरी हुई है। काफी दिनों बाद आदित्य बिरला के एक प्रोग्राम में हमारी वापस मुलाकात हुई जंहा ये परफॉर्म कर रहे रहे थे और मैं उसका आर्ट डायरेक्टर था । हम दोनों गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी एक प्रयत्न करने वाले है। सूफियाना मिजाज के धनी इस महान कलाकार ने लगभग सभी धर्मों और वर्गों के लिएअपनी कला का प्रदर्शन किया है। सत्य साई संस्थान, अनादि सुर से लेकर इन्होने लगभग सभी धर्मों और वर्गों के लिए अपनी कला का प्रदर्शन किया है। भारतीय रागों के साथ प्रकृति को लेकर बिज़ ब्रांण्ड प्रोडक्शन ( नीदरलैंड्स ) इनके साथ काम करने को इच्छुक है। ईश्वर इन्हे सारी खुशियां दें, और हमारा प्यार यूँ ही बना रहे, आमीन.

https://youtu.be/OJuXziagU38Duniya Haseenon ka mela, Film: GUPT 1997Set design : Mehboob Studio, Mumbai
20/05/2021

https://youtu.be/OJuXziagU38
Duniya Haseenon ka mela, Film: GUPT 1997
Set design : Mehboob Studio, Mumbai

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