Zara Boutique

Zara Boutique My name is Shakeel Ahmed. In this channel I will teach you how to design your own dresses and you ca

20/06/2018

*अजीब तेरी इबादत है ए मुस्लमान* *एक चाँद देखकर तू मस्जिद आबाद कर देता है और दूसरा चाँद देखते ही तू मस्जिद वीरान कर देता है....@*
😔😔

13/06/2018

*_न जापान से बगावत, न मुल्के चीन से है_*
*_रज़ा की जंग नबी के मुखालिफीन से है_*
*_नबी के इल्म पर जो एेतराज करते हैं_*
*_लगता है उनकी पैदाईश गलत मशीन से है_*

13/06/2018

#अल्_कुरआ़न:

"ऐ महबुब मैने तुम्हारे जिक्र को अपना जिक्र ठहरा दिया जिसने तुम्हारा जिक्र किया उसने मेरा जिक्र किया."

{QURAN-1:12}

#या_रसुलूल्लाहﷺ

09/06/2018

एक अंदाज़े के मुताबिक हर साल हिन्द के मुसलमान
400000000से भी ज़ियादा ज़कात निकालते हैं फिर भी मुसलमान पस्ती में है बहुत ही गोर करने वाली बात है
कहीं हम गलती तो नहीँ कर रहे हैं मुस्तहिक़ तक अपनी ज़कात न पहुंचा कर क्युकी हम लोग ज़कात भी लंबी इमारत और शोहरत याफ्ता आदमी को ही देना पसंद करते हैं भले ही वो इन पैसों से अपनी दुकान कियों न चमकाता हो???

Note: फ़र्ज़ी चन्दा खोर साहिबान दूर रहें |

08/06/2018

हर आदमी अपना क़ीमती सदक़ा, ज़क़ात, फ़ितरा मुस्तहिक़ ज़रूरतमंदों तक पहोंचाएँ... बहोत बड़ी तादाद ढोंगियों की टोपी लगाकर मुआशरे को छलने का काम कर रही है...। लिहाज़ा अपना सदक़ा, ज़क़ात, फ़ितरा तहक़ीक़ करके दें...।

07/06/2018

एक घर के करीब से गुज़र रहा था अचानक मुझे घर के अंदर से एक दस साला बच्चे की रोने की आवाज़ आई - आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जा कर बच्चा क्यों रो रहा है यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका - अंदर जा कर मैने देखा कि माँ अपने बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती - मै ने आगे हो कर पूछा आप क्यों बच्चे को मार रही हो जबकि खुद भी रोती हो..... उसने जवाब दिया बेटा आप को तो मालूम ही होगा इसके वालिद अल्लाह को प्यारे हो गए हैं और हम बहुत गरीब भी हैं ,उनके जाने के बाद मैं लोगों के घरों में मजदूरी करके घर और इसके पढ़ाई का बामुश्किल खर्च उठाती हूँ यह कमबख्त स्कूल रोज़ाना देर से जाता है और रोज़ाना घर देर से आता है - जाते हुए रास्ते मे कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता है जिसकी वजह से रोज़ाना अपनी स्कूल की वर्दी गन्दी कर लेता है - मै ने बच्चे और उसकी माँ को थोड़ा समझाया और चल दिया.....
कुछ दिन ही बीते थे...एक दिन सुबह सुबह कुछ काम से सब्जी मंडी गया - तो अचानक मेरी नज़र उसी दस साला बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना घर से मार खाता था - क्या देखता हूँ कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो उनसे कोई सब्ज़ी ज़मीन पर गिर जाती वह बच्चा उसे फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता - मै यह माजरा देख कर परेशानी में मुब्तिला हो रहा था कि चक्कर क्या है - मै उस बच्चे को चोरी चोरी फॉलो करने लगा - जब उसकी झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा कर बेचने लगा - मुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आंखों में नमी , ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ कि अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिसकी दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी , उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाज़ुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया - वह बच्चा आंखों में आंसू लिए चुप चाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्ज़ी एक दूसरे दुकान के सामने डरते डरते लगा ली - भला हो उस शख्स का जिसकी दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही दुकान लगाई उस शख्स ने बच्चे को कुछ नहीं कहा - थोड़ी सी सब्ज़ी थी ऊपर से बकिया दुकानों से कम कीमत - जल्द ही फरोख्त हो गयी - और वह बच्चा उठा और बाज़ार में एक कपड़े वाली दुकान में दाखिल हुआ और दुकानदार को वह पैसे देकर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की जानिब चल पड़ा - और मैं भी उसके पीछे पीछे चल रहा था - बच्चे ने रास्ते में अपना मुंह धोकर स्कूल चल दिया - मै भी उसके पीछे स्कूल चला गया - जब वह बच्चा स्कूल गया तो एक घंटा लेट हो चुका था - जिस पर उसके उस्ताद ने डंडे से उसे खूब मारा - मैने जल्दी से जाकर उस्ताद को मना किया कि यतीम बच्चा है इसे मत मारो - उस्ताद कहने लगे कि बेटा यह रोज़ाना एक डेढ़ घण्टे लेट से ही आता है मै रोज़ाना इसे सज़ा देता हूँ कि डर से स्कूल वक़्त पर आए और कई बार मै इसके घर पर पैग़ाम भी दे चुका हूं - खैर बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढ़ने लगा - मैने उसके उस्ताद का मोबाइल नम्बर लिया और घर की तरफ चल दिया घर पहुंच कर एहसास हुआ कि जिस काम के लिए सब्ज़ी मंडी गया था वह तो भूल ही गया - हस्बे मामूल बच्चे ने घर आ कर माँ से एक बार फिर मार खाई - सारी रात मेरा सर चकराता रहा - सुबह उठकर फजर की नमाज़ अदा की और फौरन बच्चे के उस्ताद को कॉल की कि मंडी टाइम हर हालत में मंडी पहुंचें - जिस पर मुझे मुसबत जवाब मिला - सूरज निकला और बच्चे का स्कूल जाने का वक़्त हुवा और बच्चा घर से सीधा मंडी अपनी नन्ही दुकान का बन्दोबसत करने निकला - मै ने उसके घर जाकर उसकी वालिदह को कहा कि ऑन्टी मेरे साथ चलो मै तुम्हे बताता हूँ आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है - वह फौरन मेरे साथ मुंह मे यह कहते हुए चल पड़ीं कि आज उस लड़के की मेरे हाथों खैर नही - छोडूंगी नहीं उसे आज - मंडी में लड़के का उस्ताद भी आ चुका था - हम तीनों ने मंडी की तीन मुख्तलिफ जगहों पर पोजीशन संभाल ली - और उस लड़के को छुप कर देखने लगे - हस्बेमामूल आज भी उसे काफी लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े - और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल दिया... अचानक मेरी नज़र उसकी माँ पर पड़ी तो क्या देखता हूँ कि - बहुत ही दर्द भरी सिसकियां लेकर ज़ारोकतार रो रही थी - और मै ने फौरन उसके उस्ताद की तरफ देखा तो बहुत शिद्दत से उसके आंसू बह रहे थे - दोनो के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हों ने किसी मज़लूम पर बहुत ज़ुल्म किया हो और आज उन को अपनी गलती का एहसास हो रहा हो - उसकी माँ रोते रोते घर चली गयी और उस्ताद भी सिसकियां लेते हुए स्कूल चला गया - हस्बे मामूल बच्चे ने दुकानदार को पैसे दिए और आज उसको दुकानदार ने एक लेडी सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं - अपना सूट लेलो - बच्चे ने उस सूट को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया - आज भी एक घंटा लेट था वह सीधा उस्ताद के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए पोजीशन संभाल ली और हाथ आगे बढ़ा दिए कि उस्ताद डंडे से उसे मार ले - उस्ताद कुर्सी से उठा और फौरन बच्चे को गले लगाकर इस क़दर ज़ोर से रोया कि मैं भी देख कर अपने आंसुओं पर क़ाबू ना रख सका - मै ने अपने आप को संभाला और आगे बढ़कर उस्ताद को चुप कराया और बच्चे से पूछा कि यह जो बैग में सूट है वह किसके लिए है - बच्चे ने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ अमीर लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं कोई कोई जिस्म को मोकम्मल ढांपने वाला सूट नहीं और और हमारे माँ के पास पैसे नही हैं इसलिये इस ईद पर अपने माँ के लिए यह सूट खरीदा है - तो यह सूट अब घर ले जाकर माँ को आज दोगे ??? मैने बच्चे से सवाल पूछा.... जवाब ने मेरे और उस बच्चे के उस्ताद के पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकाल दी.... बच्चे ने जवाब दिया नहीं अंकल छुट्टी के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए देदूँगा - रोज़ाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़े थोड़े पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं.... उस्ताद और मैं सोच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे समाज में गरीबों और बेवाओं के साथ ऐसा होता रहेगा उन के बच्चे ईद जैसी खुशियों में शामिल होने के लिए जलते रहेंगे आखिर कब तक! क्या अल्लाह के अता करदा नेमतों में इन जैसे गरीब बेवाओं यतीमों का कोई हक नहीं!! क्या हम चन्द रुपयों का फितरा निकाल कर अपने समाज मे मौजूद गरीब यतीम और बेवाओं के हक़ से बरिउज़्ज़िमा हो जाते हैं!!!
क्या हम अपनी खुशियों के मौके पर अपनी फालतू ख्वाहिशों में से थोड़े पैसे, थोड़ी खुशियां उनके साथ शेयर नहीं कर सकते?!!!
सोचना ज़रूर!!!

और हाँ हो सके तो शेयर भी करदेना हो सकता है इस छोटी सी कोशिश से किसी के दिल मे गरीबों से हमदर्दी का जज़्बा जाग जाये और इस आने वाले ईद पर आप का यह शेयर किसी गरीब , के घर की खुशियों की वजह बन जाये।

करो मेहरबानी तुम अहले ज़मीं पर।
खुदा मेहरबां होगा अर्शे बरीं पर।

07/06/2018

इतनी #शदीद_गर्मी में भी #रोज़े की हालत में #किचन में काम करने वाली #माँ_बहनो को।


#जन्नत की #ठंडी_हवाएं। #सलाम करती है।

06/06/2018

#फतहे_मक्का

मक्के में अबू सुफियान बहुत बेचैन था,"आज कुछ होने वाला है"( वो बड़बड़ाया) उसकी नज़र आसमान की तरफ बार बार उठ रही थी-
उसकी बीवी"हिन्दा" जिसने हज़रत अमीर हम्ज़ा का कलेजा चबाया था उसकी परेशानी देखकर उसके पास आ गई थी,
क्या बात है? क्यूं परेशान हो?
हूं? अबू सुफियान चौंका - कुछ नहीं- तबीयत घबरा रही है मैं ज़रा घूम कर आता हूं,वो ये कहकर घर के बैरूनी दरवाज़े से बाहर निकल गया मक्के की गलियों में घूमते घूमते वो उसकी हद तक पहुंच गया, अचानक उसकी नज़र शहर से बाहर एक वसी मैदान पर पड़ी,
हज़ारों मशालें रौशन थीं, लोगों की चहल पहल उनकी रौशनी में नज़र आ रही थीं और भिनभिनाहट की आवाज़ थी जैसे सैकड़ों लोग धीमी आवाज़ में कुछ पढ़ रहे हों उसका दिल धक से रह गया था- उसने फ़ैसला किया कि वो क़रीब जाकर देखेगा कि ये कौन लोग हैं, इतना तो वो समझ ही चुका था कि मक्के के लोग तो ग़ाफीलों की नींद सो रहे हैं और ये लश्कर यक़ीनन मक्के पर चढ़ाई के लिए ही आया है
वो जानना चाहता था कि ये कौन हैं?
वो आहिस्ता आहिस्ता ओट लेता उस लश्कर के काफी क़रीब पहुंच चुका था,
कुछ लोगों को उसने पहचान लिया था,ये उसके अपने ही लोग थे जो मुसलमान हो चुके थे और मदीना हिजरत कर चुके थे,उसका दिल डूब रहा था,वो समझ गया था कि ये लश्कर मुसलमानों का है,
और यक़ीनन" मुहम्मद صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم" अपने जां निसारों के साथ मक्का आ पहुंचे थे- वो छुप कर हालात का जायज़ा ले ही रहा था कि उक़ब से किसी ने उसकी गरदन पर तलवार रख दी,उसका ऊपर का सांस ऊपर और नीचे का नीचे रह गया था, लश्कर के पहरेदारों ने उसे पकड़ लिया था,और अब उसे बारगाहे मुहम्मद صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم में लेजा रहे थे,उसका एक एक क़दम कई मन का हो चुका था,हर क़दम पर उसे अपने करतूत याद आ रहे थे,जंगे बद्र,उहद,खन्दक,खैबर सब उसकी आंखों के सामने नाच रही थीं,उसे याद आ रहा था कि उसने कैसे सरदाराने मक्का को इकट्ठा किया था "मुहम्मद صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم को क़त्ल करने के लिए" कैसे नजाशी के दरबार में जाकर तक़रीर की थी कि -
ये मुसलमान हमारे गुलाम और बाग़ी हैं इनको हमें वापस दो,
कैसे उसकी बीवी हिन्दा ने अमीर हम्ज़ा को अपने ग़ुलाम हब्शी के ज़रिए शहीद करवा कर उनका सीना चाक करके उनका कलेजा निकाल कर चबाया और नाक और कान काट कर गले में हार बना कर डाले थे,और अब उसे उसी मुहम्मद صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم के सामने पेश किया जा रहा था उसे यक़ीन था कि- उसकी रिवायात के मुताबिक़ उस जैसे "दहशतगर्द" को फौरन तहे तेग़ कर दिया जाएगा-

#इधर-
बारगाहे रहमतुल्लिल आलमीन صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم में असहाब जमा थे और सुबह के इक़दामात के बारे में मशावरत चल रही थी कि किसी ने आकर अबू सुफियान की गिरफ्तारी की खबर दे दी "अल्लाहु अकबर" खैमा में नारा ए तकबीर बलंद हुआ अबू सुफियान की गिरफ्तारी एक बहुत बड़ी खबर और कामयाबी थी,खैमे में मौजूद उमर इब्ने ख़त्ताब उठ कर खड़े हुए और तलवार को म्यान से निकाल कर इंतिहाई जोश के आलम में बोले-
उस बदबख्त को क़त्ल कर देना चाहिए शुरू से सारे फसाद की जड़ यही रहा है,
चेहरा ए मुबारक रहमतुल्लिल आलमीन صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم पर तबस्सुम नमूदार हुआ, और उनकी दिलों में उतरती हुई आवाज़ गूंजती
" बैठ जाओ उमर- उसे आने दो"
उमर इब्ने खत्ताब आंखों में गैज़ लिए हुक्मे रसूल صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم की इताअत में बैठ तो गए लेकिन उनके चेहरे की सुर्खी बता रही थी कि उनका बस चलता तो अबू सुफियान के टुकड़े टुकड़े कर डालते इतने में पहरेदारों ने बारगाहे रिसालत صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم में हाज़िर होने की इजाज़त चाही, इजाज़त मिलने पर अबू सुफियान को रहमतुल्लिल आलमीन के सामने इस हाल में पेश किया गया कि उसके हाथ उसके अमामे से उसकी पुश्त पर बंधे हुए थे, चेहरे की रंगत पीली पड़ चुकी थी,और उसकी आंखों में मौत के साए लहरा रहे थे,
लबहाए रिसालत मआब صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم को जुंबिश हुई और असहाब किराम رضی اللّٰہ تعالیٰ عنہم ने एक अजीब जुमला सुना-
इसके हाथ खोल दो,और इसको पानी पिलाओ,बैठ जाओ अबू सुफियान-!!
अबू सुफियान हारे हुए जुवारी की तरह गिरने के अंदाज़ में खैमा के फर्श पर बिछे कालीन पर बैठ गया-पानी पीकर उसको कुछ हौसला हुआ तो नज़र उठाकर खैमे में मौजूद लोगों की तरफ देखा,उमर इब्ने खत्ताब की आंखें ग़ुस्से से सुर्ख थीं, अबूबक्र इब्ने क़ुहाफा की आंखों में उसके लिए अफसोस का तास्सुर था,उस्मान बिन अफ्फान के चेहरे पर अज़ीज़दारी की हमदर्दी और अफसोस का मिला जुला तास्सुर था अली इब्न अबी तालिब का चेहरा सपाट था,इसी तरह बाक़ी तमाम असहाब के चेहरों को देखता देखता आखिर उसकी नज़र मुहम्मद صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم के चेहरे मुबारक पर आकर ठहर गई, जहां जलालत व रहमत के खूबसूरत इम्तिज़ाज (मिलावट) के साथ कायनात की खूबसूरत तरीन मुस्कुराहट थी,
कहो अबू सुफियान? कैसे आना हुआ??
अबू सुफियान के गले में जैसे आवाज़ ही नहीं रही थी, बहुत हिम्मत करके बोला- मैं इस्लाम क़ुबूल करना चाहता हूं??
उमर इब्न खत्ताब एक बार फिर उठ खड़े हुए " या रसूलल्लाह صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم " ये शख्स मक्कारी कर रहा है,जान बचाने के लिए इस्लाम क़ुबूल करना चाहता है, मुझे इजाज़त दीजिए, मैं आज इस दुश्मने अज़ली का खात्मा कर ही दूं, उनके मुंह से कफ जारी था-
बैठ जाओ उमर- रिसालत मआब صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم ने नरमी से फिर फ़रमाया: बोलो अबू सुफियान! क्या तुम वाक़ई इस्लाम क़ुबूल करना चाहते हो?
जी या रसूलल्लाह صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم - मैं इस्लाम क़ुबूल करना चाहता हूं मैं समझ गया हूं कि आप और आपका दीन भी सच्चा है और आपका ख़ुदा भी सच्चा है,उसका वादा पूरा हुआ- मैं जान गया हूं कि सुबह मक्का को फतह होने से कोई नहीं बचा सकेगा-

चेहरा ए रिसालत मआब صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم पर मुस्कुराहट फैली-
ठीक है अबू सुफियान- तो मैं तुम्हें इस्लाम की दावत देता हूं और तुम्हारी दरख्वास्त क़ुबूल करता हूं जाओ तुम आज़ाद हो, सुबह हम मक्का में दाखिल होंगे इंशा अल्लाह
मैं तुम्हारे घर को जहां आज तक इस्लाम और हमारे खिलाफ साज़िशें होती रहीं,जाए अमन क़रार देता हूं,जो तुम्हारे घर में पनाह ले लेगा वो महफूज़ है,
अबू सुफियान की आंखें हैरत से फटती जा रही थीं
" और मक्का वालों से कहना- जो बैतुल्लाह में दाखिल हो गया उसको अमान है,जो अपनी किसी इबादतगाह में चला गया,उसको अमान है, यहां तक कि जो अपने घरों में बैठा रहा उसको अमान है,
जाओ अबू सुफियान! जाओ और जाकर सुबह हमारी आमद का इंतज़ार करो, और कहना मक्का वालों से कि हमारी कोई तलवार म्यान से बाहर नहीं निकल होगी,हमारा कोई तीर तरकश से बाहर नहीं होगा, हमारा कोई नेज़ा किसी की तरफ सीधा नहीं होगा जब तक कि कोई हमारे साथ लड़ना ना चाहे"
अबू सुफियान ने हैरत से मुहम्मद صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم ،की तरफ देखा और कांपते हुए होंठों से बोलना शुरू किया-
" اشھد ان لاالہٰ الا اللہ و اشھد ان محمّد عبدہُ و رسولہُ "
सबसे पहले उमर इब्ने खत्ताब आगे बढ़े- और अबू सुफियान को गले से लगाया,"मरहबा ऐ अबू सुफियान" अब से तुम हमारे दीनी भाई हो गए,तुम्हारी जान,माल हमारे ऊपर वैसे ही हराम हो गया जैसा कि हर मुसलमान का दूसरे पर हराम है,तुमको मुबारक हो कि तुम्हारी पिछली सारी खताएं मुआफ कर दी गईं और अल्लाह तबारक व तआला तुम्हारे पिछले गुनाह मुआफ फरमाए,अबू सुफियान हैरत से खत्ताब के बेटे को देख रहा था,ये वही था कि चंद लम्हे पहले जिसकी आंखों में उसके लिए शदीद नफरत और गुस्सा था और जो उसकी जान लेना चाहता था,अब वही उसको गले से लगा कर भाई बोल रहा था?
ये कैसा दीन है?
ये कैसे लोग हैं?
सबसे गले मिलकर और रसूलल्लाह صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم के हाथों पर बोसा देकर अबू सुफियान खैमे से बाहर निकल गया,
वो दहशतगर्द अबू सुफियान कि जिसके शर से मुसलमान आज तक तंग थे उन्ही के दरमियान से सलामती से गुज़रता हुआ जा रहा था, जहां से गुज़रता,उस इस्लामी लश्कर का हर फर्द,हर जंगजू,हर सिपाही जो थोड़ी देर पहले उसकी जान के दुश्मन थे अब आगे बढ़ बढ़ कर उससे मुसाहफा कर रहे थे,खुश आमदीद कह रहे थे-

#अगले_दिन:-
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मक्का शहर की हद पर जो लोग खड़े थे उनमें सबसे नुमाया अबू सुफियान था, मुसलमानों का लश्कर मक्का में दाखिल हो चुका था किसी एक तलवार, किसी एक नेज़े की अनी, किसी एक तीर की नोक पर खून का एक क़तरा भी नहीं था, लश्करे इस्लाम को हिदायत मिल चुकी थी,
किसी के घर में दाख़िल मत होना
किसी की इबादतगाह को नुक़सान मत पहुंचाना
किसी का पीछा मत करना
औरतों और बच्चों पर हाथ ना उठाना
किसी का माल ना लूटना
बिलाल हब्शी आगे आगे ऐलान करते जा रहे थे
"मक्का वालों ! रसूल ए खुदा صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم की तरफ से- आज तुम सबके लिए आम मुआफी का ऐलान है-
किसी से उसके साबिक़ा आमाल की बाज़पुर्श नहीं की जाएगी,
जो इस्लाम क़ुबूल करना चाहे वो कर सकता है
जो ना करना चाहे वो अपने साबिक़ा दीन पर रह सकता है,
सबको उनके मज़हब के मुताबिक़ इबादत की खुली इजाज़त होगी
सिर्फ मस्जिदे हराम और उसकी हुदूद के अंदर बुत परस्ती की इजाज़त नहीं होगी
किसी का ज़रीया ए मआश छीना नहीं जाएगा
किसी को उसकी ज़मीन व जायदाद से महरूम नहीं किया जाएगा
ग़ैर मुसलमानों की जान माल की हिफाज़त मुसलमान करेंगे
ऐ मक्का के लोगो-!!"
हिन्दा अपने घर के दरवाज़े पर खड़ी लश्कर इस्लाम को गुज़रते देख रही थी
उसका दिल गवाही नहीं देंगी रहा था कि "हज़रत हम्ज़ा" का क़त्ल उसको मुआफ कर दिया जाएगा,
लेकिन अबू सुफियान ने तो रात यहीं कहा था कि-
"इस्लाम क़ुबूल कर लो सब ग़ल्तियां मुआफ हो जाएंगी"
#मक्का_फतह_हो_चुका_था
बिना ज़ुल्मो तशद्दुद, बिना खून बहाए, बिना तीरो तलवार चलाए,
लोग जौक़ दर जौक़ उस आफाक़ी मज़हब को इख्तियार करने और अल्लाह की तौहीद और रसूलल्लाह صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم की रिसालत का इक़रार करने मस्जिद हराम के सहन में जमा हो रहे थे,
और तभी मक्का वालों ने देखा-
"उस हुज़ूम में हिन्दा भी शामिल थी"
ये हुआ करता था इस्लाम- ये थी उसकी तालीमात- ये सिखाया था रहमते आलम صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم ने.....

06/06/2018

ऐ गर्मी सुन थोड़ा, और जोर लगा ले आसमान से.
ईमान पक्का है मेरा, रोजे रखुगां पूरे रमजान के...

05/06/2018

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रमज़ान के हर दिन का सवाब
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```💐ह़ज़रत अ़ली رَضِىَ اللّٰهُ تَعَالٰى عَنٔه से रिवायत हैं कि रसूलल्लाह صَلَّى اللّٰهُ تَعَالٰى عَلَئهِ وَ اٰلِهٖ وَسَلَّم से रमज़ान की तरावीह़ के बारे में सवाल किया गया तो आप صَلَّى اللّٰهُ تَعَالٰى عَلَئهِ وَ اٰلِهٖ وَسَلَّم ने फ़रमाया:```

*01-* ```रमज़ान की पहली रात में मोमिन बन्दा अपने गुनाहों से ऐसा पाक हो जाता हैं जैसे आज मां के पेट से पैदा हुआ हैं!```

*02-* ```दुसरी रात में उसकी और उसके मुसलमान मां बाप की मग़्फ़िरत हो जाती हैं!```

*03-* ```तीसरी रात में फ़रिश्ता अ़र्श के नीचे से पुकारता हैं कि अब नए सिरे से अ़मल कर क्यूंकि तेरे पिछले गुनाह मुआ़फ़ हो चुके हैं!```

*04-* ```चौथी रात में उसे तौरात, इन्जील, ज़बूर और कुरआने मजीद पढ़ने का सवाब मिलता हैं! ```

*05-* ```पांचवी रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ उसे उस शख़्स का सवाब अ़त़ा करता हैं जिसने मस्जिदे नबवी, मस्जिदे ह़राम और मस्जिदे अक़्सा में नमाज़े अदा की हो!```

*06-* ```छठी रात में बैतुल मामूर के तवाफ़ करने वाले के बराबर सवाब मिलता हैं और तमाम पत्थर और ढ़ेले उसकी मग़्फ़िरत चाहते हैं!```

*07-* ```सांतवी रात में इतना सवाब मिलता है गोया ह़ज़रते मूसा عَلَئهِ الصَّلٰوةُ وَالسَّلَامٔ से मुलाक़ात और फ़िरऔन के मुक़ाबले में उनकी मदद की!```

*08-* ```आंठवी रात में उसे इतना सवाब मिलता हैं जितना ह़ज़रत इब्राहीम عَلَئهِ الصَّلٰوةُ وَالسَّلَامٔ को मिला!```

*09-* ```नवीं रात में रसूलल्लाह صَلَّى اللّٰهُ تَعَالٰى عَلَئهِ وَ اٰلِهٖ وَسَلَّم की इ़बादत का सवाब मिलता हैं!```

*10-* ```दसवीं रात में दीन दुनिया की बेहतरी अ़त़ा करता हैं!```

*11-* ```ग्यारहवीं रात में दुनिया से इस त़रह़ अलग हो जाता हैं गोया आज मां के पेट से पैदा हुआ हैं!```

*12-* ```बारहवीं रात में ये फ़ज़ीलत मिलती हैं कि उसका चेहरा क़यामत के दिन चौदहवीं के चांद की त़रह़ रौशन होगा!```

*13-* ```तेरहवीं रात की बरकत से क़यामत में उसे हर त़रह़ की बुराई से अम्न मिलेगा!```

*14-* ```चौदहवीं रात की इ़बादत से फ़िरिश्तें उसकी इ़बादत की गवाही देंगे और अल्लाह عَزَّوَجَلَّ उसे क़यामत के ह़िसाब से आज़ाद कर देगा!```

*15-* ```पन्द्रहवीं रात में फ़िरिश्तें और अ़र्श और कुर्सी उठाने वाले फ़िरिश्तें उस पर रह़मत भेजते हैं!```

*16-* ```सोलहवीं रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ दोज़ख से आज़ादी और जन्नत में दाख़िल होने का परवाना लिख देता हैं!```

*17-* ```सत्रहवीं रात में नबियों عَلَئهِ الصَّلٰوةُ وَالسَّلَامٔ के बराबर सवाब मिलता हैं!```

*18-* ```अठारहवीं रात में एक फ़िरिश्ता पुकारता हैं कि "ऐं खुदा عَزَّوَجَلَّ के बन्दे, तुझ से और तेरे मां बाप से खुदा عَزَّوَجَلَّ रज़ामन्द हैं"!```

*19-* ```उन्नीसवीं रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ जन्नतुल फ़िरदौस में उसके दर्जे बुलन्द कर देता हैं!```

*20-* ```बीसवीं रात में शहीदों और नेकों का सवाब मिलता हैं!```

*21-* ```इक्कीसवीं रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ उसके लिए जन्नत में एक महल तय्यार करता हैं!```

*22-* ```बाइसवीं रात में ये बरकत ह़ासिल होती हैं कि वो क़यामत के दिन हर त़रह़ के ग़म और अन्देशे से बेख़ौफ़ रहेगा!```

*23-* ```तेईसवीं रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ उसके लिए जन्नत में एक शहर तय्यार करता हैं!```

*24-* ```चौइसवीं रात में चालीस साल की इ़बादत का सवाब मिलता हैं!```

*25-* ```पच्चीसवीं रात में उससे क़ब्र का अ़ज़ाब उठा लिया जाता हैं!```

*26-* ```छब्बीसवीं रात में चालीस साल की इ़बादत का सवाब मिलता हैं!```

*27-* ```सत्ताईसवीं रात की फ़ज़ीलत से वह पुल सिरात पर से कौंदती हुई बिजली की त़रह़ गुज़र जाएगा!```

*28-* ```अठ्ठाइसवीं रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ उसके लिए जन्नत में हज़ार दर्जे बुलन्द कर देता हैं!```

*29-* ```उन्तीसवीं रात में हज़ार मक़बूल ह़ज का सवाब मिलता हैं!```

*30-* ```तीसवीं रात में अल्लाह عَزَّوَجَلَّ फ़रमाता हैं:```
```🌹"ऐं मेरे बन्दे, जन्नत के मेवे खा और सलसबील के पानी से नहा और आबे कौसर पी, मैं तेरा रब हूं और तू मेरा बन्दा"!```

*📗(नुज़्हतुल मजालिस)*

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