24/04/2026
*जमीनी विवाद में पीड़ित परिवार पर एकतरफा मुकदमा दर्ज, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल*
संतकबीरनगर— जनपद के बखिरा थाना क्षेत्र के ग्राम छपिया अव्वल (नगर पंचायत बाघनगर उर्फ बखिरा) में जमीनी विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। 02 फरवरी 2026 को प्रकाशित खबर में पीड़ित पक्ष राम शंकर पाठक व राम चंद्र पाठक पुत्रगण स्व. लालसा प्रसाद पाठक ने आरोप लगाया था कि गांव के ही हृदय प्रकाश पाठक पुत्र स्व. भास्कर पाठक, धनंजय पाठक व जीवन पाठक पुत्रगण हृदय प्रकाश पाठक उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की साजिश कर रहे हैं, जो अब 21 अप्रैल 2026 की घटना के बाद सच होती नजर आ रही है। ताजा घटनाक्रम में राम शंकर पाठक व राम चंद्र पाठक सहित उनके परिजनों के खिलाफ एकतरफा मुकदमा दर्ज किए जाने से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि थानाध्यक्ष बखिरा सतीश कुमार सिंह ने हृदय प्रकाश पाठक, धनंजय पाठक व जीवन पाठक के प्रभाव एवं कथित निजी संबंधों के चलते बिना किसी ठोस साक्ष्य के उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना स्थल पर न तो कोई मारपीट हुई और न ही किसी प्रकार का विवाद हुआ था, इसके बावजूद राम शंकर पाठक व राम चंद्र पाठक व उनके परिवार के परिजनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 115(2), 352, 351(3), 333 एवं 324(4) के तहत अपराध संख्या 135/26 में मुकदमा दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि ‘प्रथा प्रतिज्ञा’ समाचार पत्र में 02/02/2026 को प्रकाशित खबर के माध्यम से भी पीड़ित पक्ष ने पहले ही आशंका जताई थी कि हृदय प्रकाश पाठक, धनंजय पाठक व जीवन पाठक की थाने पर ऊंची पकड़ है और वे उन्हें और उनके परिजनों को कभी भी फर्जी मुकदमों में फंसा सकते हैं, जिसे वर्तमान घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि मौके पर निरीक्षण के दौरान स्वयं थानाध्यक्ष द्वारा दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद केवल पीड़ितों के खिलाफ कार्रवाई होना सवालों को और गहरा करता है। उक्त प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है कि इस एकतरफा मुकदमे में एक नाम पत्रकार का भी शामिल किया गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि एक सम्मानित पत्रकार, जो लगातार जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं, उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने एवं उन्हें बेइज्जत करने की नीयत से थानाध्यक्ष बखिरा द्वारा उनका नाम भी मुकदमे में जोड़ा गया है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि हृदय प्रकाश पाठक, धनंजय पाठक व जीवन पाठक द्वारा उन्हें लगातार झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है और स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है और स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और पीड़ितों को क्या न्याय मिल पाता है।