15/01/2026
मैं प्रिया हूँ... रात के ढाई बजे थे। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी....................................
कमरे में सिर्फ़ लाल लैंप की रोशनी थी। मैं काली साटन नाइट पहने बिस्तर पर लेटी थी, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। पता था जीजा जी आज आएँगे... चुपके से।
दरवाज़ा धीरे से खुला। जीजा जी अंदर आए, कमीज आधी खुली हुई, आँखों में वो आग जो मुझे हमेशा तड़पाती है। वो सीधे मेरे पास आए, बिस्तर पर बैठे और मेरी कमर पर हाथ रख दिया।
"प्रिया... आज तुझे नहीं छोड़ूँगा," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने बस आँखें बंद कर लीं और कहा, "जीजा जी... मुझे डर लग रहा है... पर और ज़्यादा रोक नहीं पा रही।"
उन्होंने मुझे पीछे से पकड़ा, मेरी नाइट के स्ट्रैप्स धीरे से नीचे किए। उनके गर्म हाथ मेरे कंधों पर, फिर गर्दन पर... मैं काँप रही थी। "तू कितनी गरम है आज," उन्होंने मेरे कान में कहा और गले पर चुम्बन करने लगे।
मैंने उनके बाल पकड़े, "जीजा जी... ज़ोर से... मुझे अपना बना लो।"
वो ऊपर चढ़ गए, मेरी नाइट पूरी उतार दी। उनका हाथ मेरे पूरे जिस्म पर घूमने लगा – छाती से नीचे, कमर से जाँघों तक। मैं सिसकारियाँ ले रही थी, "आह... जीजा जी... और... मत रुको..."
फिर उन्होंने मुझे पूरी तरह खोल दिया। उनके होंठ मेरे होंठों पर, ज़ोरदार किस। मैंने उनके शरीर को कसकर जकड़ लिया। "चोद दो मुझे आज... पूरी रात," मैंने उनके कान में कहा।
वो मुस्कुराए और अंदर आ गए... धीरे-धीरे, फिर ज़ोर-ज़ोर से। बारिश की आवाज़ के साथ मेरी सिसकारियाँ मिल गईं। "जीजा जी... हाँ... ऐसे ही... मुझे चोदो... अपना बना लो..."
पूरी रात वो मुझे चोदते रहे – कभी धीरे प्यार से, कभी ज़ोर से। मैं बार-बार झूम गई, उनका नाम लेते हुए। सुबह तक मैं थककर उनकी बाँहों में सो गई... बदन पर उनके निशान, दिल में उनका नाम।
अब भी याद आता है वो रात... जीजा जी ने मुझे सच में चोद दिया था, और मैंने पूरी तरह हार मान ली। 😈