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'भारत का इतिहास विजय का इतिहास, मुगल विजयी वीर थे लासित बोरफुकन' http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/11/Lachit-borfuka...
25/11/2022

'भारत का इतिहास विजय का इतिहास, मुगल विजयी वीर थे लासित बोरफुकन' http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/11/Lachit-borfukar-anniversary-celebrated.html

'भारत का इतिहास विजय का इतिहास, मुगल विजयी वीर थे लासित बोरफुकन'

पीएम मोदी ने शुक्रवार को पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य के जनरल और वीर योद्धा लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती पर साल भर आयोजित कार्यक्रमों के समापन समारोह को विज्ञान भवन में संबोधित किया। केवल इतना ही नहीं पीएम मोदी ने इस अवसर पर 'लचित बोरफुकन-असम के नायक जिन्होंने मुगलों को रोका' नामक पुस्तक का भी विमोचन किया।

उन्होंने इस अवसर पर कहा, आज देश गुलामी की मानसिकता को छोड़ अपनी विरासत पर गर्व करने के भाव से भरा हुआ है। देश अपनी सांस्कृतिक विविधता को मना रहा है बल्कि अपनी संस्कृति के ऐतिहासिक नायक-नायिकाओं को गर्व से याद कर रहा है। इसी कड़ी में लासित बोरफुकन को भी याद किया जा रहा है।

मुगल विजयी वीर थे लासित बोरफुकन

PM मोदी ने कहा कि लासित बोरफुकन ऐसे वीर थे जिन्हें मुगल विजयी वीर कहा जाता है। उन्होंने हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना से काम किया। लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती मनाना हमारे लिए गौरव की बात है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें वीर लासित की 400वीं जन्म जयंती मनाने का सौभाग्य उस कालखंड में मिला है जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। यह ऐतिहासिक महोत्सव असम के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है।

भारत का इतिहास विजय का इतिहास

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ मुगलों का इतिहास नहीं है। भारत का इतिहास विजय का इतिहास है। भारत का इतिहास अत्याचारियों के विरुद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने का इतिहास है। पीएम मोदी ने कहा कि लासित जैसे महान विभूतियां, भारत मां की अमर संतानें, इस अमृतकाल के संकल्पों को पूरा करने के लिए हमारी प्रेरणा हैं। पीएम ने कहा कि वह असम के उस धरती को प्रणाम करते हैं जिसने मां भारती को लासित बोरफुकन जैसे अदम्य वीर दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि आज दिल्ली के विज्ञान भवन में लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। पीएम मोदी का प्रयास रहा है कि गुमनाम नायकों को उचित तरीके से सम्मानित करें। इसी के अनुरूप देश 2022 को लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती वर्ष के रूप में मना रहा है।

सरायघाट के 1671 के युद्ध का नायक बने थे लासित बोरफुकन

लासित बोरफुकन असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य में एक सेनापति थे। सरायघाट के 1671 के युद्ध का नेतृत्व कर औरंगजेब के नेतृत्व वाली मुगल सेना को असम पर कब्जा नहीं करने दिया था। उनके इसी शौर्य को याद करते हुए असम में 24 नवंबर को लासित बोरफुकन दिवस मनाया जाता है।

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उज्जैन महाकाल कॉरिडोर का 11 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे उद्धाटन http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/09/Ujjain-Mahakal....
20/09/2022

उज्जैन महाकाल कॉरिडोर का 11 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे उद्धाटन http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/09/Ujjain-Mahakal.html

भव्य उज्जैन महाकाल कॉरिडोर का 11 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे उद्धाटन, जानें क्या है खास

बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए वैसे तो हर साल देश-विदेश से लाखों लोग पहुंचते हैं, लेकिन काशी कॉरिडोर की शुरुआत के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। अब बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने वाले लोगों को पहले से और बेहतर सुविधाएं मिल रही है। कुछ इसी प्रकार की सुविधा आने वाले समय में उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी मिलेंगी।

पहले चरण का होगा लोकार्पण

दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पीएम मोदी 11 अक्टूबर को उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर गलियारा परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। महाकाल विस्तारीकरण योजना के तहत पहले फेज में तैयार महाकाल पथ, रुद्र सागर और यूडीए के यात्री सुविधा केंद्र का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद महाकाल कॉरिडोर को जनता के लिए खोल दिया जाएगा। पहले चरण को 316 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। बता दें कि महाकाल कॉरिडोर निर्माण का काम दो चरणों में किया जा रहा है, इसके लिए करीब 750 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। उज्जैन में महाकाल मंदिर कॉरिडोर करीब 900 मीटर क्षेत्र में बनाया गया है।

महाकाल कॉरिडोर में क्या है खास

कहा जा रहा है कि उज्जैन में बन रहे कॉरिडोर का आकार काशी विश्वनाथ मंदिर से बड़ा है। कॉरिडोर में शिव तांडव स्त्रोत, शिव विवाह, महाकालेश्वर वाटिका, महाकालेश्वर मार्ग, शिव अवतार वाटिका, प्रवचन हॉल, नूतन स्कूल परिसर, गणेश विद्यालय परिसर, रूद्रसागर तट विकास, अर्ध पथ क्षेत्र, धर्मशाला और पार्किंग सर्विसेस भी तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा कॉरिडोर में 108 आकर्षक स्तंभ बनाए गए हैं जबकि भगवान शिव के 190 स्वरूप की अलग-अलग मूर्तियां के भी दर्शन होंगे। परिसर में ई-रिक्शा के माध्यम से उन श्रद्धालुओं का आवागमन कराया जाएगा, जिन्हें चलने में दिक्कत होगी। प्रसाद आदि खरीदने के लिए परिसर में ही दुकानें भी रहेंगी।

भारत में तीर्थ पर्यटन

अगर भारत में तीर्थ पर्यटन पर गौर करें, तो पिछले कुछ साल में इस ओर काफी विकास किया जा रहा है। हृदय” योजना, प्रसाद, धार्मिक सर्किट जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। दरअसल इसका कारण यह है कि भारत में पर्यटन का आकार काफी बड़ा है। पर्यटन एक उद्योग जगत का रूप ले चुका है, भारत में यात्रा व पर्यटन उद्योग करीब 10 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है एवं देश के कुल रोजगार में पर्यटन उद्योग की 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

ऐसे में भारत में प्राचीन समय से ही धार्मिक स्थलों की यात्रा, पर्यटन उद्योग में एक विशेष स्थान रखती है और आने वाले यात्रियों की सुविधा और देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने में तीर्थ पर्यटन का काफी योगदान है। तीर्थ पर्यटन के विकास से रोजगार और यात्रियों की सुविधा के अलावा देश में धार्मिक पर्यटन को भी पंख मिल रहा है।

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राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद रामकुमार के परिजनों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/07/...
10/07/2022

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद रामकुमार के परिजनों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/07/blog-post.html

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद रामकुमार के परिजनों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

दिल्ली के इंडिया गेट पर स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर नेक्स्ट-ऑफ-किन समारोह में पहुंचकर वीर चक्र से सम्मानित करगिल युद्ध के दौरान शहीद लांस हवलदार रामकुमार के परिजनों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। समारोह में शहीद रामकुमार की माता धनपति देवी, पत्नी कमला देवी, पुत्र नगेन्द्र सिंह, पौत्री हंसुजा व पविका उपस्थित थे।

देवावास निवासी वीरचक्र से सम्मानित लांस हवलदार रामकुमार लाम्बा कारगिल युद्ध में आखिरी क्षण तक दुश्मन से लोहा लेते हुए घायल होने के बावजूद भी घुसपैठियों को खदेड़ते रहे थे। रामकुमार लांबा 1986 में सेना में भर्ती हुए थे। इस दौरान वे 1989 में श्रीलंका में तैनात शांति सेना का हिस्सा भी रहे।

करगिल युद्ध में दिया सर्वोच्च बलिदान

शहीद रामकुमार जून 1999 को ऑपरेशन विजय के दौरान 15 हजार फीट की ऊंचाई पर किलाबंद चौकी में हथियारों के जखीरे के साथ मौजूद घुसपैठियों को निकालने का कार्य उन्हें दिया गया था। अपनी टुकड़ी के साथ जब रामकुमार लांबा लक्ष्य के नजदीक पहुंचे तो दुश्मनों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी। कंधे व कमर में गोली लगने के बावजूद घायल अवस्था में भी दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्होंने एक हैंड ग्रेनेट फेंककर एक दुश्मन को मार गिराया और दो को घायल कर दिया था। बाद में दुश्मन नजदीक आए तो और दो को उन्होंने मार गिराया। अपने जख्मों से ज्यादा खून बहने के कारण वे देश के लिए शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस, शौर्य व सर्वोच्च बलिदान के लिए सरकार ने उन्हें मार्च 2000 को वीर चक्र से सम्मानित किया।

शहीद के पुत्र नागेन्द्र सिंह ने बताया कि स्मारक पर हर सायं एक रिट्रीट समारोह होता है, जब सूर्यास्त से पहले भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के झंडे और राष्ट्रीय ध्वज थोड़ा नीचे किया जाता है। देश के किसी एक शहीद के नेक्स्ट-ऑफ-किन इस रिट्रीट का हिस्सा होते हैं। इस दौरान उन्होंने अमर चक्र पर माल्यार्पण किया।

अमर चक्र संकेंद्रित वृत्तों के समूह में अंतरतम संरचना है जिसमें युद्ध स्मारक शामिल है। इसमें एक शाश्वत ज्वाला है, जिसमें इस साल की शुरुआत में अमर जवान ज्योति की ज्वाला का विलय हुआ था।

''देश सदा याद रखेगा आपका बलिदान"

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों की स्मृति में आयोजित समारोह में शामिल होना एक अनूठा अनुभव था। हम कामना करते कि ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें और आप जहां भी हों, खुश रहें। हम और ये देश सदा आपके सर्वोच्च बलिदान को याद रखेगा। आप पर हम सबको गर्व है और हम हमेशा आपके आदर्शों पर चलते रहेंगे।

श्रीमती कमला देवी

नागेंद्र सिंह

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अब 5 साल के बच्चों को भी लगेगी कोविड वैक्सीन, दो वैक्सीन को मंजूरी http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/5.html अब 5 ...
26/04/2022

अब 5 साल के बच्चों को भी लगेगी कोविड वैक्सीन, दो वैक्सीन को मंजूरी http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/5.html अब 5 साल के बच्चों को भी लगेगी कोविड वैक्सीन, दो वैक्सीन को मंजूरी

देश में अब 5 से 12 साल आयु वर्ग के बच्चों को भी कोरोना की वैक्सीन लगाई जा सकेगी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने स्वदेशी दवा निर्माता कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और बायोलॉजिकल ई की कोर्बेवैक्स के आपात इस्तेमाल को मंजूरी प्रदान कर दे दी है। इसके साथ सीडीएससीओ ने 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए जायकोव डी की दो डोज को मंजूरी दी है।

5 से 12 साल के उम्र के बच्चों के लिए कोर्बेवैक्स

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने ट्वीट करके कहा कि भारत की कोरोना से लड़ाई को अब और अधिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को सीडीएससीओ ने 6 से 12 साल के उम्र के बच्चों के लिए कोवैक्सीन, 5 से 12 साल के उम्र के बच्चों के लिए कोर्बेवैक्स और 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए दो डोज वाली जायकोव डी को आपात इस्तेमाल करने के लिए मंजूरी दे दी है।

12-14 के बच्चों को दी जा रही है कॉर्बेवैक्स

बता दें कि फिलहाल कॉर्बेवैक्स वैक्सीन 12-14 साल के बच्चों को दी जा रही है। इस साल 3 जनवरी से 15-18 साल के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन शुरू हुआ था। उन्हें कोवैक्सिन की डोज देने का फैसला हुआ था। इसके बाद में 16 मार्च से इस अभियान का विस्तार करते हुए 12-14 साल बच्चों को शामिल किया गया, उन्हें कॉर्बेवैक्स दी जाने लगी।

कुल 187.95 करोड़ अधिक टीके लगाए गए

बता दें कि देश में अभी 12 साल से ऊपर के बच्चों को वैक्सीन लगाई जा रही है। 12-14 आयु वर्ग के लिए कोविड-19 टीकाकरण 16 मार्च,2022 को प्रारंभ हुआ था। अब तक 2.70 करोड़ (2,70,96,975) से अधिक किशोरों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक लगाई गई है। जबकि देश में अब तक 187.95 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं।

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टेंपल 360’ वेबसाइट लॉन्च, घर बैठे करें 12 ज्योतिर्लिंग व चारों धाम की यात्रा http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/36...
05/04/2022

टेंपल 360’ वेबसाइट लॉन्च, घर बैठे करें 12 ज्योतिर्लिंग व चारों धाम की यात्रा http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/360-12.html

घर बैठे करें 360 डिग्री व्यू से 12 ज्योतिर्लिंग व चारों धाम की यात्रा

कहावत है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। कोरोना काल में ऐसे कई मौके आए जब आवश्यकता पड़ने पर नए आविष्कार हुए। इनमें से एक आविष्कार भारत के सुप्रसिद्ध मंदिरों का घर बैठे भ्रमण कराने से जुड़ा था। दरअसल, कोरोना काल में जब देश में लॉकडाउन लगा तो लोगों का घरों से बाहर निकलना प्रतिबंधित कर दिया गया था। ऐसे में लोगों के आस्था के केंद्रों के दर्शनाभिलाषियों को संकट की घड़ी में भगवान के दर तक जाने की अनुमति नहीं मिल रही थी। तब केंद्र सरकार ने लोगों की भावनाओं को समझते हुए ऐसी व्यवस्था की जिससे कि लोग घर बैठे मंदिर दर्शन कर पाएं। जी हां, सरकार ने डिजिटल तकनीक इस्तेमाल कर लोगों को देश के विभिन्न आध्यात्मिक मंदिरों के वर्चुअल दर्शन का प्रबंध किया। यह शुरुआत हाल ही में नव संवत्सर यानि 2079 के अवसर पर की गई।

‘temple 360’ वेबसाइट लॉन्च

इस संबंध में केंद्रीय संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने आईजीएनसीए में नववर्ष के अवसर पर ‘temple 360’ वेबसाइट का उद्घाटन किया ‘टेंपल 360 डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां कोई भी किसी भी स्थान से 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धामों का वर्चुअली 360-डिग्री भ्रमण करने में सक्षम होगा। इस संबंध में उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी भी साझा की।

Delighted to launch the Temple 360 website on the auspicious occasion of Nav Samvatsar 2079 at IGNCA.

As part of the website, an initiative of will now enable everyone to take a virtual 360-degree tour of the 12 Jyotirlingas & 4 Dhams of India. pic.twitter.com/2ThvzIoHBQ

— Meenakashi Lekhi () April 2, 2022

12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम के वर्चुअल दर्शन

राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, कोरोना के दौरान, लोग मंदिरों के दर्शन नहीं कर पाए, कई कारण हैं कि लोग मंदिरों में नहीं जा सकते हैं, मंदिर 360 वह डिजिटल प्लेटफॉर्म है जहां कोई भी किसी भी स्थान से 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम के दर्शन किए जा सकते हैं।

कोरोना काल में लोग मंदिरों के दर्शन नहीं कर पाए

यह व्यवस्था कोरोना काल से अभी भी सुचारू रूप से काम कर रही है। इसके लिए भारत सरकार ने वेबसाइट http://temple360.in द्वारा चारों धामों के 360 डिग्री व्यू को ऑनलाइन देखे जाने का प्रबंध किया है। इस वेबसाइट के जरिए अब सभी लोग चार धामों की यात्रा घर बैठे वर्चुअली कर सकते हैं। केंद्र सरकार के तमाम प्रयासों और डिजिटल युग में इजाद इस नए तरीके के सहारे आज हम अपना आने वाला कल लिख सकते हैं।

दरअसल, केंद्र सरकार भारत के सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्रों के ऑनलाइन दर्शन कराने से ”एक पंथ दो काज” यानि एक ही उपाय से दो कार्यों कर रही है। दरअसल, सरकार जहां एक तरफ देशवासियों को भारतीय संस्कृति से परिचित करा रही है तो वहीं दूसरी ओर विदेशी पर्यटकों से ऑनलाइन आमदनी भी कमा रही है। भारतीय टूरिस्ट प्लेसों को देखने तमाम विदेशी नागरिक हर साल भारत आते हैं। लेकिन जो कोरोना काल के बाद बदले माहौल के कारण भारत नहीं आ सकते उनके लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की यह पहल काफी कारगर है।

संस्कृति मंत्रालय की यह देशवासियों को एक अनमोल भेंट

जी हां, भारत की स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में संस्कृति मंत्रालय की यह देशवासियों को एक अनमोल भेंट है। इसे नाम दिया गया है ”टेंपल 360”। इस साल के आरंभ पर सभी नए प्रयासों एवं भविष्य की आशाओं के लिए इसे शुभारंभ का प्रतीक बताया गया। इस शुभ अवसर पर यह वेबसाइट भारत और दुनिया के लोगों को समर्पित की गई।

निकट भविष्य में वेबसाइट पर विभिन्न सेवाएं भी

इस वेबसाइट के माध्यम से आपके लिए भारत के विभिन्न मंदिरों के लाइव कैमरा फीड प्रतिदिन, प्रतिपल प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है जहां भारत के मंदिरों की अमर आध्यात्मिक यात्रा और मंदिर दर्शन का सजीव अनुभव मिलता है। निकट भविष्य में वेबसाइट पर विभिन्न सेवाएं भी उपलब्ध होंगी, जैसे –

– ई-प्रसाद

– ई-आरती

– ई-शृंगार

– ई-दान

इस संबंध में राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी बताती हैं कि इस मंच के माध्यम से लोग ई-दर्शन, ई-प्रसाद और ई-आरती देख सकते हैं और इसमें भाग ले सकते हैं जो सभी के जीवन को सुविधाजनक बनाते हैं और लोगों को भी जोड़े रखता है।

कोई भी भारत से कभी भी और कहीं से भी अपनी पसंद के मंदिर के कर पाएगा दर्शन

‘मंदिर 360’ ऐसी website हैं जहां कोई भी भारत से कभी भी और कहीं से भी अपनी पसंद के मंदिर में जा सकता है। इस वेबसाइट की मदद से, कोई भी पवित्र हिंदू तीर्थस्थलों में से कुछ की भव्यता को डिजिटल रूप से देख सकता है। वेबसाइट एक भक्त को ई-आरती और कई अन्य सेवाएं भी उपलब्ध कराती है।

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प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से लोगों के 13 हजार करोड़ रुपये बचे http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/Jan-Aushadhi-ce...
03/04/2022

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से लोगों के 13 हजार करोड़ रुपये बचे http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/Jan-Aushadhi-centres-helped-make-medicines%20affordable.html

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से लोगों के बचे 13 हजार करोड़

आम नागरिकों को अपना मकान, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए जाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो आम नागरिकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं। इन योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री जन औषधि योजना। देश में गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों को किफायती मूल्य में जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए अबतक 8600 से अधिक जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बेची गई दवाओं में पिछले साल के मुकाबले 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। यही नहीं जेनरिक एलोपैथिक दवाओं के साथ अब आयुर्वेदिक दवाएं भी इसमें शामिल की जा रही हैं। आने वाले दिनों में थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर नापने की मशीनें भी इन केंद्रों पर उपलब्ध होंगी।

भविष्य की योजनाओं पर भारतीय जन औषधि परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि दधीच ने PM जन औषधि योजना को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी दी।

प्रश्न- जन औषधि केन्द्र से लोगों को कितना लाभ पहुंच रहा है?

उत्तर – प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के लिए किफायती दरों पर गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध कराने के मकसद से की गई है। साल 2008 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। तब से साल 2014 तक देश में सिर्फ 80 केन्द्र थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने इस संख्या को बढ़ाकर 8,600 से अधिक कर दिया। यहां दवाएं सस्ती होने के साथ-साथ गुणवत्ता में भी अच्छी है। मध्यम वर्ग या गरीब वर्ग में अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो इलाज और दवाओं पर ही कमाई का ज्यादातर भाग खर्च हो जाता है। इन केंद्रों पर मिलने वाली 50 से 90 फीसदी कम दरों पर दवाओं ने लोगों की चिंताओं को कम किया है। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इन केन्द्रों के माध्यम से अबतक लोगों के 13 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। गरीब लोगों को भी सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं, जो काफी महंगी हुआ करती थी।

प्रश्न- सस्ती दवाओं को लेकर लोगों के मन में इनके गुणवत्ता को लेकर चिंताएं होती हैं, तो लोगों को कैसे आश्वस्त करते हैं कि जन औषधि केन्द्रों पर मिलने वाली दवाएं कारगर हैं?

उत्तर- जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं जेनरिक होती हैं यानि की दवाओं में प्रयोग होने वाली बेसिक सॉल्ट का प्रयोग कर दवाएं तैयार की जाती हैं। जेनरिक होने के कारण दवाएं सस्ती होती हैं लेकिन उतनी ही कारगर होती हैं, जितनी ब्रांडेड दवाएं होती हैं। लोगों के बीच यह धारणा गलत है कि जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता कम होती है। हम दवाओं की गुणवत्ता की जांच दो स्तर पर करते हैं। एक कंपनी के द्वारा और दूसरे एनएबीएल की लेबोरेटरी में जांच कराई जाती है। इस प्रक्रिया में एक हफ्ते का समय लगता है। पूरी जांच के बाद दवाओं को केन्द्रों पर भेजा जाता है।

प्रश्न – देश में 8600 जन औषधि केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं, क्या यह सिर्फ बड़े शहरों और कस्बों में ही खोले जा रहे हैं या ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनका लाभ मिल रहा है?

उत्तर- देश में साल 2024 तक 10 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है। जहां तक ग्रामीण और शहरों में केंद्र खोलने का सवाल है तो इसके लिए नियम निर्धारित किए गए हैं। जहां दवाओं की अधिक बिक्री होने की क्षमता होती है, वहां जन औषधि केंद्र खोले जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जहां इन केन्द्रों की आवश्यकता है वहां केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में दिल्ली के एम्स में भी एक केन्द्र खोलने की तैयारी की जा रही है।

प्रश्न- इस वित्तीय वर्ष में कितने की दवाएं बेची गईं हैं?

उत्तर – इस वर्ष जन औषधि केंद्रों के जरिए 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की दवाएं बिकी हैं। पिछले साल के मुकाबले इस इसमें 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। साल 2021 में 36 हजार करोड़ दवाएं बेची गईं हैं। जेनरिक दवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास के कारण आने वाले सालों में इन दवाओं की बिक्री से लाभ का प्रतिशत और बढ़ने की संभावना है।

प्रश्न- जन औषधि केन्द्रों पर कितने प्रकार की दवाइयां और चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध हैं?

उत्तर- मौजूदा समय में जन औषधि केन्द्रों पर 1600 प्रकार की दवाइयां और 250 से अधिक प्रकार के चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध हैं। इस संख्या को जल्द ही बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस सूची में कुछ और दवाएं भी शामिल की जाएंगी। आने वाले दिनों में 2 हजार से अधिक प्रकार की दवाइयां मौजूद होंगी। इसके साथ डायबिटीज, ह्रदयरोग, कैंसर जैसी दवाओं को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

प्रश्न- महिलाओं के लिए क्या कुछ खास है जन औषधि केन्द्रों पर?

उत्तर- महिलाओं के लिए 1 रुपये में सेनेटरी नैपकिन भी इन केंद्रों पर मिल रहे हैं। 21 करोड़ से ज्यादा सेनेटरी नैपकिन की बिक्री ये दिखाती है कि जन औषधि केंद्र कितनी बड़ी संख्या में महिलाओं का जीवन आसान कर रहे हैं। इन सेनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता अच्छी है।

प्रश्न- जेनरिक दवाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

उत्तर- जेनरिक दवाओं और जन औषधि केंद्रों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए सात मार्च से एक हफ्ते के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।‘जेनरिक’ दवाइयों के उपयोग और उसके लाभ के बारे में विभिन्न कार्यक्रम और मंचों के माध्यम से उजागर किया जा रहा है। लोग अब इसके महत्व को समझ रहे हैं।

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राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा कदम, मानव-तस्करी रोधी प्रकोष्ठ का किया शुभारंभ http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/nat...
03/04/2022

राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा कदम, मानव-तस्करी रोधी प्रकोष्ठ का किया शुभारंभ http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/national-women-commission.html

राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा कदम, मानव-तस्करी रोधी प्रकोष्ठ का किया शुभारंभ

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मानव-तस्करी के मामलों से प्रभावी तरीके से निपटने में सुधार करने, महिलाओं एवं लड़कियों के बीच जागरूकता बढ़ाने, मानव-तस्करी रोधी इकाइयों के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण में वृद्धि करने और कानून का प्रवर्तन कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए आज एक मानव-तस्करी रोधी प्रकोष्ठ का शुभारंभ किया।

अधिकारियों के बीच जागरूकता बढ़ेगी

मानव-तस्करी रोधी प्रकोष्ठ की स्थापना कानून का प्रवर्तन कराने वाले अधिकारियों के बीच जागरूकता बढ़ाने और उनकी क्षमता निर्माण में वृद्धि करने के उद्देश्य से की गई है। यह प्रकोष्ठ क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों और अभियोजकों को लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाने और मानव-तस्करी से निपटने में सक्षम करने के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। आयोग को मिलने वाली मानव-तस्करी से संबंधित शिकायतों का समाधान इस प्रकोष्ठ द्वारा किया जाएगा।

असंवेदनशील रवैया शामिल

राष्ट्रीय महिला आयोग ने यह पाया है कि मानव-तस्करी से निपटने के रास्ते में आने वाली प्रमुख समस्याओं में पीड़ितों के लिए पुनर्वास का अभाव और इस अवैध व्यापार से बचाए गए लोगों एवं उनके परिवारों के प्रति असंवेदनशील रवैया शामिल है। इसलिए, यह प्रकोष्ठ निगरानी तंत्र में सुधार करेगा और मानव-तस्करी की रोकथाम तथा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए अपनाए जा रहे उपायों के संबंध में सरकारी एजेंसियों को प्रोत्साहित करेगा।

यह प्रकोष्ठ मानव-तस्करी से बचाए गए लोगों को आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करके और उनके घावों को फिर से हरा होने से रोकने के उद्देश्य से उनके लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करके उनके जीवन के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।

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विश्व में ‘मिलेट्स’ को लोकप्रिय बनाने का नेतृत्व करेगा भारत http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/international-year-...
02/04/2022

विश्व में ‘मिलेट्स’ को लोकप्रिय बनाने का नेतृत्व करेगा भारत http://khoj-khabarr.blogspot.com/2022/04/international-year-of-millets.html

विश्व में ‘मिलेट्स’ को लोकप्रिय बनाने का नेतृत्व करेगा भारत

पहले दादी या नानी मिलेट्स का गुणगान किया करती थीं, लेकिन फिर मिलेट्स हमारी जिंदगी से धीरे-धीरे गायब हो गए। हैरत भरी बात तो ये है कि अब दुनिया हमारी दादी-नानी के राह पर चल पड़ी है। जी हां, कोविड काल में पूरी दुनिया ने मिलेट्स के न्यूट्रिशन से भरपूर खजाने के बारे में जाना और उसे अपनाया। हमने भी मिलेट्स की प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की खूबियों को जाना है।

PM मोदी की पहल पर UN का बड़ा फैसला

हकीकत तो यह है कि मिलेट्स कभी हमारे ही खान-पान का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ ये हमारी थालियों से गायब होते चले गए, लेकिन अब एक बार फिर से मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी की पहल पर UN ने 2023 को ‘International Year of Millets’ घोषित किया है। भारत इसका नेतृत्व करेगा। केवल इतना ही नहीं इससे देश के किसानों को काफी लाभ मिलने वाला है।

दुनिया ने मोटे अनाजों के महत्व को समझा

एक्सपर्ट का मत है कि दुनिया ने कोविड के दौरान सेहत के लिहाज से मोटे अनाजों के महत्व को समझा है, इसलिए किसानों के लिए इसे उगाना अधिक फायदेमंद समझा जा रहा है। यह अनाज कम पानी और कम उपजाऊ भूमि में भी उग जाता है और दाम भी गेहूं से अधिक प्राप्त होता है।

2018 मोटा अनाज वर्ष

इसके महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि केंद्र सरकार ने कदन्न फसलों के महत्व को समझकर 2018 को यानि मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया था, ताकि मोटे अनाज के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा सके। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए, भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र आम सभा में 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय कदन्न दिवस’ के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव का नेतृत्व किया था जिसे UN ने स्वीकार कर लिया है।

मिलेट्स को अपनाने का समय

यानि अब समय आ गया है कि मिलेट्स के इस खजाने को फिर से भरा जाए। यानि जिस भोजन को हमने छोड़ दिया था या भुला दिया था उसे हमें फिर से अपनाना होगा। मिलेट्स में जौ, ज्वार, बाजरा, रागी, मड़ुवा, सावां, कोदों, कुटकी, कंगनी, चीना जैसे अनेक अनाजों को हमें फिर से अपनी जिंदगी में खान-पान का हिस्सा बनाना होगा। इस दौरान केंद्र सरकार ने मोटे अनाजों को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पोषक अनाज को शामिल करना और कई राज्यों में कदन्न मिशन की स्थापना करना शामिल है। इसके बावजूद उत्पादन, वितरण और उपभोक्ताओं द्वारा मोटे अनाजों को अपनाने से जुड़ी कई चुनौतियां कायम हैं।

बच्चों और प्रेग्नेंसी में उपयोगी

वहीं वितरण प्रणाली के अंतर्गत, खाद्यान्न वितरण कार्यक्रमों का ध्यान ‘कैलरी सिद्धांत’ से हटाकर ज्यादा विविध खाद्यान्न संकुल प्रदान करने पर लगाया गया है, जिसमें मोटे अनाज को शामिल कर स्कूल जाने की आयु से छोटे बच्चों और प्रजनन-योग्य महिलाओं की पोषण स्थिति में सुधार लाए जाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

’मोटे अनाज’ पर केंद्र सरकार का फोकस

नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम का इरादा है कि इन चुनौतियों का समाधान व्यवस्थित और कारगर तरीके से किया जाए। इसके लिए नीति आयोग ने संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ ’20 दिसंबर, 2021′ को एक आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी के तहत मोटे अनाज को मुख्यधारा में लाने पर ध्यान दिया जाएगा और 2023 को अंतरराष्ट्रीय कदन्न वर्ष होने के नाते इस अवसर पर भारत को ज्ञान के आदान-प्रदान के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने में समर्थन दिया जाएगा। इसके अलावा, इस साझेदारी का लक्ष्य है छोटी जोत के किसानों के लिए सतत आजीविका के अवसर बनाना, जलवायु परिवर्तन को देखते हुए क्षमताओं को अपनाना और खाद्य प्रणाली में बदलाव लाना।

किसानों का भी संवरेगा भविष्य

इन तमाम प्रयासों से साफ होता है कि इस दिशा में केंद्र सरकार बढ़ी तीव्रता से कार्य कर रही है और देश के किसान की जिंदगी को खुशहाल बनाने के साथ-साथ देश के भविष्य को सुरक्षित व संरक्षित करने का जिम्मा बखूबी संभाल रही है। बता दें, आशय घोषणापत्र के तहत नीति आयोग और विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच रणनीतिक तथा तकनीकी सहयोग पर ध्यान दिया जाना है, ताकि भारत में उन्नत खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए जलवायु का सामना करने वाली कृषि को मजबूत किया जाए। ऐसे में केंद्र सरकार ने देश के तमाम किसानों से आह्वान किया है कि वे अधिक से अधिक मिलेट्स उगाएं और देश के फूड प्रोसेसिंग उद्योग उनसे आकर्षक प्रोडक्ट तैयार करें। इसकी वैश्विक बाजार में बहुत अधिक डिमांड हैं।

कुपोषण मुक्त होगा भारत

तभी ‘कुपोषण मुक्त भारत’ का निर्माण होगा। हालांकि केंद्र सरकार पहले से ही कुपोषण को दूर करने को लेकर सजग रही है। इसके लिए केंद्र सरकार विभिन्न योजनाएं भी चला रही है। ‘राष्ट्रीय पोषण मिशन’ इनमें से एक है। राष्ट्रीय पोषण मिशन के बारे में :

भारत सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवन चक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध तरीके से पोषण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 0 से 06 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में समयबद्ध तरीके से सुधार हेतु महत्वाकांक्षी ”राष्ट्रीय पोषण मिशन” का गठन किया गया है राष्ट्रीय पोषण मिशन के अंतर्गत कुपोषण को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

उद्देश्य एवं लक्ष्य :

1. 0-6 वर्ष के बच्चों में ठिगनेपन से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।

2. 0 से 6 वर्ष के बच्चों का अल्प पोषण से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रतिवर्ष 2% की दर से कमी लाना।

3. 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3% की दर से कमी लाना।

4. 15 से 49 वर्ष की किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3% की दर से कमी लाना।

5. कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।

केंद्र सरकार की प्रमुख पहल

– कोविड-19 के दौरान आर्थिक मदद के हिस्से के रूप में, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और आत्मनिर्भर भारत योजना (एएनबीएस) जैसी अतिरिक्त राष्ट्रव्यापी योजनाओं को लागू किया है।

– पीएमजीकेएवाई के तहत, भारत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता वाले परिवारों) के तहत अप्रैल से नवंबर 2020 की अवधि के लिए और फिर मई से नवंबर 2021 की अवधि के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के अंतर्गत शामिल किए गए लोगों सहित 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 80 करोड़ (800 मिलियन) लाभार्थियों के लिए प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम प्रति माह की दर से खाद्यान्न का मुफ्त आवंटन किया है)

– वर्ष 2O2O के दौरान, 3.22 करोड़ (32.2 मिलियन) मीट्रिक टन खाद्यान्न और वर्ष 2021 के दौरान, लगभग 3.28 करोड़ (32.8 मिलियन) मीट्रिक टन खाद्यान्न पीएमजीकेएवाई योजना के तहत लगभग 80 करोड़ (800 मिलियन) एनएफएसए लाभार्थी लोगों को मुफ्त आवंटित किया गया है)

– खाद्यान्न के अलावा, एनएफएसए के तहत 19.4 करोड़ (194 मिलियन) परिवारों को शामिल करने वाले सभी लाभार्थियों को अप्रैल से नवंबर 2020 की अवधि के लिए प्रति माह 1 किलोग्राम प्रति परिवार दाल मुफ्त प्रदान की गई है।

– एएनबीएस के तहत, सरकार ने लगभग 8 लाख (800 हजार) मीट्रिक टन अतिरिक्त मुफ्त खाद्यान्न का आवंटन सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को उन प्रवासियों व फंसे हुए प्रवासियों के लिए किया, जो न तो एनएफएसए और न ही राज्य योजना पीडीएस कार्ड के तहत कवर किए गए थे, ऐसे लोगों को 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रतिमाह के हिसाब से दो महीने, मई और जून 2020 की अवधि के लिए मुफ्त खाद्यान्न के अलावा, इस अवधि के लिए एएनबीएस के तहत लगभग 0.27 लाख (27 हजार) मीट्रिक टन साबुत चना आवंटित किया गया था।

– पीएमजीकेएवाई और एएनबीएस के तहत मुफ्त खाद्यान्न, दालें और साबुत चना का आवंटन एनएफएसए के तहत किए गए सामान्य आवंटन के अतिरिक्त था। पीएमजीकेएवाई और एएनबीएस के अलावा, भारत सरकार ने उन सभी लाभार्थियों के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (घरेलू) के तहत खाद्यान्न आवंटित किया है, जिन्हें राज्य सरकारों द्वारा अपनी योजनाओं के तहत राशन कार्ड जारी किए गए हैं, लेकिन तीन महीने के लिए एनएफएसए के तहत शामिल नहीं किया गया है।

– अप्रैल से जून 2020 तक के महीनों में 21 रुपए प्रति किलोग्राम गेहूं और 22 रुपए प्रति किलोग्राम चावल उपलब्ध कराया गया। खाद्यान्न के आवंटन की कोई अधिकतम सीमा नहीं थी। बाद में इस योजना को मई 2021 से आगे बढ़ा दिया गया।

– 100 से कम श्रमिकों वाले संगठित क्षेत्र के व्यवसायों में प्रति माह 15,000/- रुपए से कम वेतन पाने वालों के रोजगार में व्यवधान के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए, सरकार ने उनके मासिक वेतन का 24 प्रतिशत तीन महीने, अप्रैल से जून 2020 के लिए उनके पीएफ खातों में भुगतान किया।

– लगभग 13.62 करोड़ (136.2 मिलियन) परिवारों को लाभान्वित करने के लिए एक श्रमिक को सालाना अतिरिक्त 2,000 रुपए का लाभ प्रदान करने के लिए 1 अप्रैल 2020 से मनरेगा मजदूरी में 20 रुपए की वृद्धि की गई।

– 2020-21 में देय 2,000 रुपए की पहली किस्त का अग्रिम भुगतान किया गया था और अप्रैल 2020 में ही पीएम किसान योजना के अंतर्गत भुगतान किया गया था। इससे 8.7 करोड़ (87 मिलियन) किसानों को लाभ हुआ।

– कुल 20.4 करोड़ (204 मिलियन) प्रधानमंत्री जन धन योजना महिला खाताधारकों को 500 रुपए प्रति माह तीन महीने के लिए, अप्रैल से जून 2020 तक अनुग्रह राशि दी गई।

6.85 करोड़ (68.5 मिलियन) परिवारों का समर्थन करने वाले 63 लाख (6.3 मिलियन) स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से आयोजित महिलाओं के लिए अतिरिक्त मुक्त ऋण देने की सीमा 10 से बढ़ाकर 20 लाख रुपये (1 मिलियन से 2 मिलियन रुपये) कर दी गई।

– सरकार ने अप्रैल से जून 2020 तक 3 करोड़ (30 मिलियन) वृद्ध विधवाओं और दिव्यांग श्रेणी के लोगों को प्रति माह 1,000 रुपये दिए, जिन्हें कोविड-19 के कारण हुए आर्थिक व्यवधान की कठिनाइयों से निपटने के लिए नाज़ुक स्थिति का सामना कर रहे हैं।

– बाल मृत्यु दर पर भारत की स्थिति में 2020 की तुलना में 2021 में सुधार हुआ है। दो सूचकांकों, यानि चाइल्ड वेस्टिंग और चाइल्ड स्टंटिंग, पर 2020 की तुलना में 2021 में स्थिति अपरिवर्तित रही है।

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