19/06/2017
जानिए रघुवंशी लोहराणा राजवंश के बारे में।।।
आदिनारायण सूर्यभगवान की 7 मि पेढ़ी में इश्वाकु महाराज हुए। वो बहुत प्रतापी थे। इश्वाकु महाराज की 54 मी पेढ़ी में महाराज रघु हुए।। रघु राजा इतने प्रतापी थे की देवो भी मदद के लिए रघु राजा को बुलाते थे। रघु राजा से वंश का नाम रघुवंश हुवा। और उसकी पेढ़ी रघुवंशी कहलाए। रघुराजा की 4 पेढ़ी में भगवन श्री राम ने जन्म लिया। राम जी के दो पुत्र लव और कुश हुए।। और लव के वंशज लोहराणा ( लोहाना ) कहलाए।
भगवान रामजी ने अपने पुत्र लव को। कान्य कुबेज ( उज्बेरिस्तान ) ,,, उरुप्रदेश ( ईरान ),,, कहोशल ( अफ़ग़ानिस्तान ),,, वहां तक का वहिवट सोप्पा।। अखंड भारत बहुत बड़ा था ।। भारत की वेदिक संस्कृति में, कंबोडिया,, थाईलैंड,, इंडोनेशिया,, बर्मा,, सब अखंड भारत में थे।लव के वंशज उससमय रघुराना के नाम् से जाने जाते थे।
जब सिकंदरका पतन होने के बाद रघुराना के राज्य बहुत सबल बने। रघुराना ओ ने और 31 राज्य को जित कर अपना विस्तार फेलाया। और वो राष्ट्र की रक्षा करने के लिए बहुत सबल बने।
और वहा से रघुराना आगे बढ़ कर लेह से निकलते हुवे लेह पर्वत की लंबी हारमाला की मध्य खिन के मैदान में लोह पहाड़ की तलेटी में नए पाट नगर। की स्थापना की। उसका नाम लोहगढ़ रखा। और उस प्रदेश लोहरप्रदेश कहलाया।। उस समय भारत में लोहरप्रदेश बहुत ही शक्तिशाली था।। इसी लिए वहा जो रघुराना थे। वो लोहरप्रदेश के राणा यानि लोहरराणा लोहराणा हुए।।
और फिर लोहराणा ओ ने लोहार 24 की स्थापना की। और लोहार चौबीसी के बहार भी स्वतन्त्र लोहराणा ओ के राज्यो थे। जिसमे कहोशल शक्तिशाली था।। और 700 वर्षो तक उसकी रक्षा की।
इस। 647 में सम्राट हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उसके जैसा कोई राजा बना नहीं। इस बजह से हर्षवर्धन का साम्राज्य टूट गया। हर्षवर्धन के साम्राज्य टूट ने की बजहसे भारत में एक दूसरे राज्यो की मदद होना बंद हो गया। और अंदर ही अंदर लड़ाई , होने लगी। और राष्ट्र की आर्थिक स्थिति ख़राब हो गयी। इसी कारन सिमा के राज्य लोहार साम्राज्य की आर्थिक स्थिति ख़राब हुई। भारत के जो अंदर के राज्यो से जो मदद मिलती थी वो बंद हुई।। इस परिस्थिति में लोहार ठाकुर हरपाल ने लोहार राज्यो को एकजुठ रक्खा। उसके बाद दादा वसुपल उसके पुत्र वछराज और जसराज और लोहार चौबीसी के। करतारसिंह ,, रायकरणसिंह,, राय राघव,, राय अर्जुनसिंह ,, जेसे रघुवंशी योद्धाओ ने अपने प्राणों का बलिदान देके भी राष्ट्र की रक्षा की।
उस समय चंगीज़खान जो दुनिया के लिए आतंक था। उसको कोई हरा नहीं सकता था ।।। उसको वीर जसराज जी राणा ने एक ही भाले के प्रहार से मार डाला।।। और चंगीज़खान की सेना को हरा डाला। और फिर जसराज जी राणा भी वीरगति पामे। जहा जसराज जी का धड़ पड़ा था उसकी खमभि लोहरनाओ ने बनाइ थी।। आज भी अफ़ग़ानिस्थान की जगह हे उसका नाम जस्सा डा डेरा। जहा जसराज जी का धड़ हे उसकी खमभि हे।। आजभी वहा के हिन्दू पठान और कुछ मुस्लिम उस खमभि को आशापुरी धुप देते हे।।
वही कहोशल के शाशक त्रिलोचनपाल, मदनपाल , खलसपाल,, अनोपपाल ( पाल साम्राज्य ) ने भी बलिदान दिए।
लोहराणा अनोपपाल ने गुजरात के भीमदेव सोलंकी और भरुच के महाराजा से मिल के मुल्तान में महम्मद ग़ज़नवी के साथ युद्ध किया।उस युद्ध में लोहराणा अनोपपाल की तलवार की घा से ग़ज़नवी घायल हुवा और वो युद्ध छोड़ के भाग गया। और युद्ध में ग़ज़नवी के सरदारो ने दगे से लोहराणा अनोपपाल बरछी से प्रहार किया और राणा वीरगति पामें। ओर् इस तरह भारत की रक्षा के लिए रघुवंशी लोहराणा राजपूतो ने बलिदान दिए थे।
600 वर्षो के अक्रमनकरो फिर 400 वर्षो के मुस्लिम शाशको और फिर 200 वर्षो अंग्रेज शाशको और भारत आज़ाद होने के बाद नेता ओ ने।। भारत का सच्चा इतिहास बताया ही नहीं।। क्षत्रियो में अंदर ही अंदर जगडे करवाये। और मुस्लिम शाशको को महान बताया। लेकिन फिर भी सच्चाई छुप ति नहीं। विदेशी इतिहासकारो,, कुछ मुस्लिम इतिहासकारो,, को सच्चाई लिखनी पड़ी। हिन्दू ओ के इतिहासकारो ने भी असली इतिहास को अपने पास रक्खा था।।। ऊपर दी गयी जानकारी निच्चे दिए गए पुस्तक में मौजूद हे।।। 1- चच नामा ,, 2 - राजतरंगिणी,, 3- रघुवंश,, 3-लाहोर का इतिहास,, 4- मुल्तान का इतिहास ,, 5- जलाल ए जंगनामा,, 6 शाहानामाँ ,, 7- आयने अफ़ग़ान ,,, 8- पाटवी।
इसके उपरांत भी और 25 पुस्तको में सभी माहिती हे।