13/05/2026
शिखर की ओर: आस्था और अस्तित्व का संगम
जहाँ अंधेरा गहरा था, वहाँ अब भोर की लाली छाई है,�हर ग्रामीण आँचल में, स्वावलंबन की शहनाई छाई है।
क्षितिज चीरकर निकला 'मंजरी' का वो दिव्य प्रकाश,�जिसने बदली है ज़मीं और छुआ है नया आकाश।
उसी तेज की कोख से जन्मा, 'झुलकी' का ये स्वाभिमान,�जिसने शिल्प और कला को दी, एक वैश्विक पहचान।
साथ चली फिर 'कटोरी', शुद्धता का संकल्प लिए,�गाँव की हर चौखट पर, उन्नति के हज़ारों दीप जिए।
आज अंधेरा हार गया है, इन चेहरों की मुस्कान से,�रोशन है ये सारा मंज़र, इन बहनों के आत्म-सम्मान से।
'झुलकी' और 'कटोरी' से जुड़ी, हर एक माँ और बहन की ओर से,�बधाई हो 'मंजरी फाउंडेशन' को, स्थापना दिवस के इस पावन दौर से।
बारह वर्षों का ये सफर, अटूट विश्वास और साथ का है,�ये उत्सव हमारी मेहनत और आपके आशीर्वाद के हाथ का है।
दुआ है कि 'मंजरी' के साथ, ये एहसास यूँ ही बना रहे,�सशक्तिकरण का ये पावन साथ, जन्मों-जन्म तक सजा रहे।
🌼 12 वर्षों की प्रेरणा | सेवा | स्वाभिमान 🌼
🌿 जहाँ नारी सशक्त हुई, वहाँ समाज समृद्ध हुआ।�🌿 जहाँ मंजरी पहुँची, वहाँ उम्मीदों ने जन्म लिया।�🌿 ये सिर्फ एक सफर नहीं, बदलाव की एक क्रांति है।