03/03/2024
झौलवी साहब का हाथ तंग चल रहा था तो उनकी शरीक ए हयात सकीना बेगम ने नौकरी करने का फैसला किया....
ढूंढते ढूंढते उसे #लड्डन_कबाड़ी के यहां नौकरी मिल गई... कुछ समय बाद एक दिन झौलवी साहब की लख्ते जिगर यास्मीन भी अपनी अम्मी के साथ उसके काम पर चली गई....
" अब्बू, जहां अम्मी नौकरी पर जाती है... वो बहुत नेक बंदे हैं..." घर आकर यास्मीन ने झौलवी साहब को बताया....
" वो कैसे...???"
" वहां भी अम्मी लड्डन अंकल के कमरे में जाकर जमाज़ पढ़ती है...."
" ये तो अच्छी बात है.." झौलवी साहब खुश होकर बोले...
" लेकिन अब्बू एक बात समझ नहीं आई.... बाहर सिर्फ या अल्लाह, सुभान अल्लाह करके सिर्फ अम्मी की आवाज ही क्यूं आती है...???"
🤣🤣🤣