18/07/2023
कुछ नजरों मे अंजान बन
कभी छुप के देखो
होठों की लाली को
सतरंगी आसमां मे देखो
कसक को दबा के देखो
कुछ नजरों मे अंजान बन
कभी छुप के देखो
झरनो सा बहता
उनके साये को देखो
तेज हवाओं मे
तने को पत्तों मे
सिमटता देखो
किसी के पास होने को ही
सुकुन नहीं कहते
किसी के दूर होके भी
पास होने का एहसास
करके देखो
अपना तो सब कहते हैं
किसी को ना जता
अपना समझ के
तो देखो
नजरें चुरा कर देखना
क्या पता क्या खता हो जाये
और कोई खफा हो जाये
ईस लिये कहता हुं
कुछ नजरों मे अंजान बन
कभी छुप के देखो
मनोज टीबरेवाल
18.07.2023