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मित्रों , अपने अभिनय की सुनहरे युग से शुरुआत करके, वर्तमान समय तक फिल्मों में सक्रिय रहकर विभिन्न भाषाओं की ५०० फिल्मों ...
13/05/2026

मित्रों ,
अपने अभिनय की सुनहरे युग से शुरुआत करके, वर्तमान समय तक फिल्मों में सक्रिय रहकर विभिन्न भाषाओं की ५०० फिल्मों में अभिनय करने वाली " अरुणा ईरानी" का आज जन्म दिवस है
आपका जन्म सन १९५२ में हुआ है ,उनके पिताजी का नाम था फरदून ईरानी जो एक ड्रामा ग्रुप चलाते थे मां थी सगुना जो हिंदू परिवार की थी ,आठ भाई बहनों में अरुणा जी सबसे बड़ी थी परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाई, उन्हे बचपन से डांस करने का शौक था पर पैसे के अभाव के कारण किसी डांस टीचर से प्रशिक्षण नही ले पाई
अरुणा जी को फिल्मों में पहला अवसर मिला फिल्म " गंगा जमुना " में बाल कलाकार के रूप में , इसके बाद अनपढ़ फिल्म में माला सिन्हा के बचपन की भूमिका निभाई, अब उन्हे लगातार भूमिकाएं मिलने लगी ये फिल्मे थी _ जहां आरा, फर्ज , आया सावन झूम के , इसके साथ ही उन्हे मेहमूद के जोड़ीदार के रूप में गरम मसाला , औलाद , दो फूल फिल्मों में मौका मिला, मेहमूद के होम प्रोडक्शन की " बॉम्बे टू गोवा " में उन्हे नए उभरते हुए अमिताभ बच्चन के साथ नायिका की भूमिका मिली , राज कपूर साहब की बॉबी में वो एक डांसर के रूप में नजर आई , इसके बाद उनकी फिल्मे लगातार प्रदर्शित होती रही
अपनी बढ़ती आयु को देखते हुए उन्होंने चरित्र भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया, उनकी सन १९९२ की फिल्म बेटा की भूमिका के लिए उन्हे सर्व श्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार प्राप्त हुआ है, इसी फिल्म के कन्नड़ संस्करण में उन्होंने यही भूमिका निभाकर फिर से प्रशंसा प्राप्त की है
आपने मराठी की कुछ फिल्मे की है , टी वी धारावाहिको में भी अभिनय किया है
आपने फिल्म लेखक , निर्देशक और निर्माता कुक्कू कोहली से विवाह किया है , आपके अभिनय से सजी कुछ अन्य फिल्मे है _ गंगा की लहरे, पत्थर के सनम, अनोखी रात, तुमसे अच्छा कौन है, हमजोली, सफर , नया जमाना , मन मंदिर, कारवां, अंदाज, बुड्ढा मिल गया , प्रेम नगर ,रोटी कपड़ा और मकान, मिली, खून पसीना, कर्ज, याराना, अंगूर, बेमिसाल, मास्टर जी, दयावान, आदि लंबी सूची है
अरुणा ईरानी को जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई , प्रस्तुत है उनका चित्र मेरे संग्रह से
दिनांक ३ मई २०२६

मित्रों , आज  अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत में अपना और हमारे देश का नाम रोशन करने वाले फिल्मकार सत्यजीत रेसाहब का जन्म दिवस ह...
13/05/2026

मित्रों ,
आज अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत में अपना और हमारे देश का नाम रोशन करने वाले फिल्मकार सत्यजीत रे
साहब का जन्म दिवस है आपका जन्म सन १९२१ में कलकत्ता में हुआ था, उन्होंने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज और विश्व भारती विश्वविद्यालय से शिक्षा पूरी करके ,एक चित्रकार के रूप में काम करना शुरू किया , अपनी लंदन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात फ्रांस के फिल्म निर्माता जिन रेनायर से हुई और इटली की नवयथार्थ वादी फिल्म द साइकिल थिफ देखने को मिली , यहीं से उन्हे फिल्मों के प्रति आकर्षण हो गया
आपने बंगला भाषा में फिल्मों का निर्माण_ निर्देशन शुरू किया , आपकी पहली फिल्म थी पाथेर पांचाली,इस अपनी पहली फिल्म से ही उन्हे अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित हो गई, इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्यारह पुरस्कार प्राप्त हुए थे, हिंदी में आपने शतरंज के खिलाड़ी फिल्म बनाई थी , इसके अलावा एक टेली फिल्म सद्गति बनाई थी , आपकी फिल्म "गोपी गाएन बाधा बाएन " में हमारे देश में सन १९७५ में लगाए गए आपातकाल पर गहरा और सटीक व्यंग किया गया था
आप एक बहुमुखी प्रतिभा के मालिक थे उन्होंने निर्माता , निर्देशक , कथा _पटकथा लेखक, गीतकार , चित्रकार , उपन्यास लेखक , संगीतकार , पत्रिका संपादक का काम सफलता से किया है
भारतीय फिल्मों में उनके अमूल्य
योगदान को देखते हुए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री , पद्म भूषण , पद्म विभूषण, दादा साहेब फालके पुरस्कार और भारत रत्न से सम्मानित किया गया है
विश्व सिनेमा के श्रेष्ठ पुरस्कार ऑस्कर से भी उन्हे नवाजा जा चुका है, उन्हे ये ऑस्कर ट्रॉफी उनके कलकत्ता स्थित निवास पर प्रदान की गई थी
आपने कुल ३७ फिल्मों का निर्माण निर्देशन किया है, जिनमे फीचर , लघु , टेली फिल्म और वृत्त चित्र शामिल है इनमे से कुछ है _ अपराजितो , अपूर संसार , जलसा घर , देवी, तीन कन्या , पोस्ट मास्टर , कंचन जंघा , महा नगर , नायक , चिड़िया खाना , अरन्येर दिन रात्रि ,प्रति द्वंदी आदि
सत्यजीत रे साहब का सन १९९२ में स्वर्गवास हो गया , उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि , प्रस्तुत है उनका चित्र मेरे संग्रह से
दिनांक २ मई २०२६

मित्रो, आज मराठी _ हिंदी फिल्मों के जाने माने निर्माता, निर्देशक , कथा _ पट कथा,_ संवाद लेखक _ अभिनेता भालजी पेंढारकर का...
13/05/2026

मित्रो, आज मराठी _ हिंदी फिल्मों के जाने माने निर्माता, निर्देशक , कथा _ पट कथा,_ संवाद लेखक _ अभिनेता भालजी पेंढारकर का जन्म दिवस है
आपका जन्म सन १८९८ में कोल्हापुर में हुआ था
आपका मूल और पूरा नाम था " भालचंद्र गोपाल पेंढारकर, पिता गोपाल राव पेशे से डॉक्टर थे , माताजी का नाम था राधाबाई ,
बड़े भाई थे बाबूराव

भालजी को अपनी आयु के १२ वे वर्ष में अपने परिवार के एक बड़े विवाद के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा , वो पुणे आ गए यहां उन्हें उस समय के प्रसिद्ध मराठी अखबार " केसरी ' में न्यूज पेपर बॉय की नौकरी मिल गई
योग संयोग से कुछ भी काम करने की तलाश में आपके फिल्मी काम की शुरुआत एक मूक फिल्म से हुई , उनकी प्रतिभा के कारण फिल्मों से जुड़ गए , ये जुड़ाव हमेशा के लिए हो गया , यहां ये उल्लेखनिय है कि व्ही शांताराम जी और अभिनेता मास्टर विठ्ठल भालजी की मां के रिश्ते में भाई लगते थे इसलिए इन दोनों ने भालजी की बहुत मदद की थी
शुरुआती समय में पुणे के प्रभात स्टूडियो में काम करने के बाद, व्ही शांताराम साहब के राज कमल कला मंदिर कंपनी से जुड़ गए, यहां फिल्म निर्माण की हर विधा को सीखने के बाद स्वयं की फिल्म निर्माण कंपनी " जय प्रभा स्टूडियो " की स्थापना की और कई मराठी और कुछ हिंदी फिल्मों का निर्माण किया
तत्कालीन अंग्रेज सरकार के विरुद्ध उनके मन में जबरजस्त देश प्रेम की भावना थी , इसलिए उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं पर फिल्मे बनाई , जो हिंदवी स्वराज और साहसिक कारनामों से जुड़ी थी , इन फिल्मों में शामिल है _ छत्रपति शिवाजी, गनिमी कावा, बहीर जी नायिक ( १९४३ ) , पावन खिंड ( १९५६ ) , नेताजी पालकर आदि ये सभी फिल्मे मराठी भाषा में थी , उनकी फिल्मों के संवाद जोश भरे अंदाज में देश भक्ति और वीरता से ओत प्रोत होते थे , जल्दी ही ब्रिटिश सरकार को ये बात समझ आ गई कि भालजी उनकी सरकार के विरुद्ध है , इसलिए भालजी
को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया
आपको नियमित रूप से प्रति दिन व्यायाम करने की आदत इसलिए वो शरीर से मजबूत कद काठी के व्यक्ति थे
अपने सन १९२४ की मूक फिल्म पृथ्वी वल्लभ में अभिनय भी किया था
सन १९४८ में गांधी जी की हत्या के समय मराठी चित्त पावन ब्राह्मणों के विरुद्ध हुई हिंसा में उनके जय प्रभा स्टूडियो के भवन को आग लगा दी गई , उनका सब कुछ नष्ट हो गया , फिर भी उन्होंने साहस नहीं खोया , अपने कुछ मददगारो की मदद से अपने लगन और मेहनत से पुनः अपना स्टूडियो खड़ा कर दिया
ऐसे महान फिल्मकार को मराठी फिल्मों का " चित्र योगी " कहा जाता है
आपकी कुछ मराठी फिल्में है_ थोरातांची कमला , मोहित्यांची मंगला, मराठा तितूका मेलवावा, साधी मानस, तांबडी माती, श्याम सुंदर ( १९३२ ) , आकाश वाणी ( १९३४ ) , कालिया मर्दन ( १९३५), मुरली वाला ( १९३५ ), रुक्मिणी कल्याणम ( १९३६), सावित्री ( १९३६ ) राजा गोपीचंद ( १९३८) , गोरख नाथ ( १९४०) , सुनबाई ( १९४२ ), सासुर वास ( १९४६ ) , मीठ
भाकर ( १९४९ ), माझी जमीन ( १९६३ ), आकाश गंगा ( १९५९), आदि
आपकी हिंदी फिल्में है _ महारथी कर्ण, वाल्मीकि, छत्रपति शिवाजी
भालजी पेंढ़ारकर ने मराठी फिल्मों को सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाया है इसका श्रेय उन्हें मिलना चाहिए
सन १९९४ में आपका स्वर्गवास हो गया उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि, प्रस्तुत है उनका चित्र मेरे संग्रह से
दिनांक १ मई २०२५

मित्रों  , अपने देश में बनने वाली प्रथम फीचर फिल्म के निर्माता _ निर्देशक तथा भारतीय फिल्मों के पितामह कहलाने वाले  "दाद...
13/05/2026

मित्रों , अपने देश में बनने वाली प्रथम फीचर फिल्म के निर्माता _ निर्देशक तथा भारतीय फिल्मों के पितामह कहलाने वाले "दादा साहेब धुंडीराज गोविंद फालके " का आज जन्म दिवस है
आपका जन्म सन १८७८ में नासिक के पास त्रिंबकेश्वर में हुआ था , पिताजी बंबई के विल्सन कॉलेज में शिक्षक थे , दादा साहेब ने अपनी आवश्यक पढ़ाई के बाद जे जे स्कूल ऑफ आर्ट बंबई और कला भवन बड़ौदा से रंग कर्म की शिक्षा ग्रहण की , उन्हे फोटो ग्राफी का शौक था , एक पार्टनर के साथ ब्लॉक मेकिंग और फोटोग्राफी की दुकान शुरू की इसी सिलसिले में वो सन १९०९ में जर्मनी देश से मल्टी कलर छापने वाली मशीन लेकर आए , उसी दौरान उनके दुकान की पार्टनर शिप टूट गई वो है हताश होकर घोर निराशा में फिल्म देखने चले गए उस समय फिल्म याने मनोरंजन का नया नया साधन था , उन्होंने विदेशी मूक फिल्म " द लाइफ ऑफ क्राइस्ट " देखी ,देखकर बहुत प्रभावित हुए और स्वयं फिल्म बनाने का निश्चय कर लिया जिसके मुख्य पात्र भगवान राम , कृष्ण या अन्य पौराणिक चरित्र होंगे , उस समय उपलब्ध फिल्म निर्माण संबंधित किताबो का उन्होंने अध्ययन शुरू किया, पत्नी की सहमति और एक मित्र की आर्थिक सहायता से लंदन गए वहां फिल्म निर्माण की कुछ बारिकिया समझी और निर्माण में लगने वाली आवश्यक सामग्री लेकर भारत आए , पहली फिल्म का विषय था राजा हरिश्चंद्र का जीवन , किसी से कुछ पैसे उधार लेकर और पत्नी के गहने रहन रखकर फिल्म निर्माण शुरू हुआ , अब समस्या आई फिल्म में अभिनय करने वाले कलाकारों की पुरुष कलाकार तो मिल गए लेकिन स्त्री पात्र तारामती के लिए महिला कलाकार नही मिल पाई , कोठे पर नाच गाना करने वाली महिलाओं ने भी मना कर दिया , आखिर एक दुबले पतले लड़के अन्ना सालुंके को स्त्री पात्र बनाया गया इस तरह भारतीय फिल्मों की पहली नायिका थी श्रीमान सालुंके , फिल्म पूरी होकर दिनांक ३ मई १९१३ को बंबई के कोरोनेशन सिनेमाघर
में प्रदर्शित हुई, दर्शको ने फिल्म का जोरदार स्वागत किया लगातार २३ दिनो तक फिल्म दिखाई जाती रही , अगली फिल्म रही भस्मासुर मोहिनी , इसके बाद सत्यवान सावित्री इस तरह कई वर्षो तक दादा साहेब भारतीय फिल्मों के एकमात्र फिल्मकार बने रहे, कुछ दिनो बाद उन्होंने नाशिक में फिल्म स्टूडियो की स्थापना की यहां फिल्म निर्माण शुरू किया , इस प्रकार आपने कुल ११७ फिल्मों का निर्माण , निर्देशन , फोटोगाफी , ड्रेस डिजाइन आदि सभी काम किए
हमारी फिल्म इंडस्ट्री कितनी गैर जवाबदार और एहसान फरामोश है ,इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि सन १९३८ में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का रजत जयंती वर्ष बड़े जोर शोर से मनाया गया , उस समय के सभी दिग्गज फिल्मकार बड़ी शान से समारोह के मंच पर बैठे थे , दूसरी तरफ देश में फिल्मों की शुरुआत करने वाले दादा साहब मंच से नीचे दर्शकों की पहली कतार में बैठे थे , अचानक किसी बुद्धिमान _ समझदार अभिनेता की नजर उन पर पड़ी और उसने दादा साहब को सम्मान के साथ मंच पर उनकी गरिमा के अनुसार बैठने का स्थान दिया
सन १९४४ में गंभीर बीमारी के कारण उनका स्वर्गवास हो गया, भारत सरकार ने सन १९६९ में उनके सम्मान में फिल्मों का सर्वोच्च पुरस्कार " दादा साहेब फालके पुरस्कार" शुरू करके इस महान फिल्मकार को अमर बना दिया , मेरा सभी मराठी भाषी साथियों से निवेदन है दादा साहब के जीवन पर बनी मराठी फिल्म _ हरीशचंद्रा ची फैक्ट्री अवश्य देखे u tube पर उपलब्ध है , देखिए और समझिए कि उन्होंने कितनी मुश्किलों से अपनी पहली फिल्म बनाई थी
दादा साहेब फालके जी को विनम्र श्रद्धांजलि , प्रस्तुत है उनके चित्र मेरे संग्रह से _ दिनांक ३० अप्रैल २०२६

मित्रो , आज एक ऐसे महान फिल्मकार की पुण्यतिथि है , जिसने अपने शिष्य को उसकी गलती की वजह थप्पड़ मारा तो शिष्य ने उसे गुरु...
13/05/2026

मित्रो , आज एक ऐसे महान फिल्मकार की पुण्यतिथि है , जिसने अपने शिष्य को उसकी गलती की वजह थप्पड़ मारा तो शिष्य ने उसे गुरु दीक्षा समझकर जीवन भर याद रखा , अगर किसी नवोदित को उनके हाथ से चवन्नी इनाम में मिली तो उस नवोदित कलाकार ने अपना भाग्य समझते हुए जीवन भर उस इनाम को सहेज कर रखा , मित्रो आज हम बात कर रहे हैं _ निर्माता ,निर्देशक, गीतकार और लेखक केदार शर्मा जी की सन १९१० में केदार शर्मा जी का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के नरौला में हुआ था , उनकी शिक्षा अमृतसर में पूरी हुई
उन्हे सन १९३३ में निर्देशक देबकी बोस की फिल्म पुरन भगत देखने को मिली , जिसे देखकर वो फिल्मों की रूपहली दुनिया के दीवाने हो गए, दिन के चौबीसों घण्टे फिल्मों के बारे ने सोचने लगे , सपने देखने लगे कि वो भी फिल्मों में किसी तरह का काम करें , अपने सपने पूरे करने के लिए कलकत्ता पहुंचे जो उस समय फिल्म निर्माण का बड़ा केंद्र था, बहुत कोशिशों के बाद मॉडर्न थियेटर के दिनशा जी से भेंट हुई , फिल्मों के प्रति लगाव को देखते हुए केदार शर्मा जी से पूछा गया क्या कर सकते हो , जवाब था अभिनय,गीत लेखन ,कहानी लेखन ये सब कर सकता हूं , उस समय वहां इन कामों के करने वाले की आवश्यकता नहीं थी, वहां जरूरत थी एक पेंटर या चित्रकार की जो कंपनी की फिल्मों के पोस्टर बना सके , संयोग से केदार शर्मा जी बचपन से ही अच्छे चित्रकार थे उन्होंने ये काम ये सोचकर स्वीकार कर लिया कि अगर फिल्मों में काम करना है तो फिल्म स्टूडियो से जुड़े रहो यहां जो काम मिले उसे करते रहो , कुछ समय बाद उन्हे कैमरा मैन का काम मिला, सन १९३४ की फिल्म सीता उनकी ही कैमरे की पहली कलाकारी थी , इसके बाद उन्हे न्यू थियेटर की फिल्म इंकलाब में छोटी सी भूमिका मिली ,आगे चलकर उन्हे पूजारिन, विद्यापति, बड़ी दीदी, नेकी और बदि , में छोटी मोटी भूमिकाएं मिलती रही , उनकी आवाज बहुत पतली थी जो उनके अभिनय यात्रा में रुकावट थी , इस बात को समझते हुए उन्होंने अभिनय के अलावा फिल्म निर्माण की अन्य विधाओं में ध्यान देना जरूरी समझा , सन १९३६ की सहगल साहब द्वारा अभिनीत " देवदास " केदार शर्मा जी के कैरियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही , इसके गीत और कहानी _ पट कथा केदार शर्मा जी ने लिखी थी,अब वो फिल्मों में स्थापित हो गए थे, आगे उन्होंने दिलीप कुमार _ नर्गिस अभिनीत " जोगन " का निर्देशन किया , अपने समय की ये बहुत चर्चित फिल्म रही है
१८ वर्ष के नौजवान राज कपूर फिल्मों में काम करना चाहते थे , पापा जी पृथ्वीराज कपूर ने उन्हे केदार शर्मा जी के पास सहायक के काम पर रखवा दिया , इसी दौरान राज साहब की गलती के कारण केदार शर्मा जी ने उन्हे थप्पड़ रसीद किया था , इन्ही राज कपूर को केदार शर्मा जी ने फिल्म नीलकमल में पहली बार नायक की भूमिका दी थी
जब वो किसके काम से खुश होते थे तो उसे चवन्नी इनाम में देते थे , ये इनाम पाने वालो में राज कपूर, दिलीप कुमार, नरगिस, गीताबाली , गायिका मुबारक बेगम और संगीतकार रोशन शामिल हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी केदार शर्मा जी ने फिल्मों में कहानी _ गीत लेखन, निर्देशन, फोटोग्राफी, अभिनय , चित्रकारी, ये सब काम सफलता पूर्वक करके फिल्म निर्माण भी किया है
उन्होंने बच्चो के लिए _ जलदीप, गुलाब का फूल, एकता, २६ जनवरी, चेतक, मीरा का चित्र , महातीर्थ और खुदा हाफ़िज़ फिल्मे बनाई है
आपकी कुछ फिल्मे हैं _ बावरे नैन, सोहाग रात, हमारी याद आयेगी, जिन्दगी ( १९४०) आदि
सन १९९९ में केदार शर्मा जी का स्वर्गवास हो गया उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि
_ दिनांक २९ अप्रेल २०२६

मित्रों , सन १९८२ में हॉलीवुड के फिल्मकार सर रिचर्ड एटन बरो ने  अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्म बनाई थी " गांधी " , जिसमे मह...
13/05/2026

मित्रों ,
सन १९८२ में हॉलीवुड के फिल्मकार सर रिचर्ड एटन बरो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्म बनाई थी " गांधी " , जिसमे महात्मा गांधी के जीवन के लगभग ५० वर्षो के काल खंड को दर्शाया गया था इस काल में कैसी पोषाखे पहनी जाती थी , साधारण नागरिक , अंग्रेज अधिकारी , पुलिस , गांधी जी , अन्य नेता गण कैसे कपड़े पहनते थे, इन को तैयार करना एक बहुत बड़ी जवाबदारी थी जिसे निभाया था " भानु अथैया" ने जिनका दिनांक आज २८ अप्रेल को जन्म दिवस है
आपका का जन्म सन १९२९ में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था आपका पूरा नाम था ' भानुमति राजोपाध्याय "
आपको बचपन से ही चित्रकारी और स्केच बनाने का शौक था, माता पिता ने उन्हे प्रोत्साहित किया और गांधी जी का रेखा चित्र बनाने के लिए कहा भानु जी ने बना दिया, इस तरह अपनी प्रतिभा के दर्शन करा दिए , बड़ी होने पर " गांधी " फिल्म के लिए उन्हे कास्टूम डिजाइन के लिए ऑस्कर अवार्ड प्राप्त हुआ
बचपन में उनकी प्रतिभा को देखते उनके माता पिता ने उन्हे _ जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला दिलाया , यहां से उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की , इसके बाद" ईस्ट दिल्ली " पत्रिका के लिए फैशन डिजाइनर का काम शुरू किया
आपके फिल्म केरियर की शुरुआत हुई फिल्म " आंखे " ( पुरानी ) से जिसमे उन्होंने कामिनी कौशल की ड्रेस डिजाइन की थी , ये मदन मोहन साहब के संगीत से सजी शुरुआती फिल्म है
फिल्म जगत में भानु की पहचान कायम हुई गुरुदत्त साहब की फिल्म " सी आई डी" से इसके बाद वो हमारी फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख ड्रेस डिजाइनर बन गई गुरुदत्त साहब की_ प्यासा, चौदहवीं का चांद , साहब बीवी और गुलाम के लिए काम किया , राज कपूर साहब की श्री ४२० के गीत " मूड मूड के ना देख मूड मूड के " में नादिरा ने पहनी ड्रेस भानु जी की ही कलाकारी है , इसके बाद राज साहब की _ संगम , मेरा नाम जोकर, बॉबी, सत्यम शिवम् सुंदरम , राम तेरी गंगा मैली के लिए ड्रेस डिजाइन का काम किया , निर्देशक लेख टंडन की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि वाली फिल्म " आम्रपाली " के लिए ड्रेस डिजाइन करना एक बड़ा चुनौती भरा काम था जिसे भानु जी ने सफलता से कर दिखाया था , ये फिल्म वैजयंती माला के अभिनय , शंकर जयकिशन के लोकप्रिय संगीत और भानु जी की ड्रेस डिजाइन के लिए याद की जाती है , इस फिल्म की ड्रेस डिजाइन के लिए उन्होंने अजंता की गुफाओं में बने चित्रों से प्रेरणा ली थी
आपके काम वाली कुछ अन्य फिल्मे है वक्त , रेशमा और शेरा , रजिया सुल्तान, हमराज, ज्वेल थीफ , लगान , लेकिन , स्वदेश आदि
आपका विवाह सत्येंद्र अथैया से हुआ था
आपकी एक बेटी है जो कलकत्ता में रहती है
१०० से अधिक फिल्मों में ड्रेस डिजाइनर रही
आपको दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके है भानु अथैया जी का सन २०२० में स्वर्गवास हो गया उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि , प्रस्तुत है उनका चित्र मेरे संग्रह से
दिनांक २८ अप्रैल २०२६

मित्रों ,अपने जीवन के १०० वर्ष पूरे करने के बाद भी मनोरंजन की दुनिया में सक्रिय रही दिग्गज अभिनेत्री , नृत्यांगना , नृत्...
13/05/2026

मित्रों ,
अपने जीवन के १०० वर्ष पूरे करने के बाद भी मनोरंजन की दुनिया में सक्रिय रही दिग्गज अभिनेत्री , नृत्यांगना , नृत्य निर्देशिका "जोहरा सहगल "का आज जन्म दिवस है
आपका जन्म सन १९१२ में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था, मूल नाम था " साहिब जादी जोहरा बेगम " , माता पिता ने उनका नाम जोहरा एक दम सही रखा था जिसका अर्थ होता है" हुनरमंद "
जोहरा छोटी बालिका थी कि उनकी मां चल बसी थी , जोहरा जी बचपन से ही स्वभाव की बहुत तेज और विद्रोही प्रकार की थी , खेलना , कूदना , मस्ती करना उन्हे बहुत पसंद था ,
मां के गुजरने के बाद उनके चाचा ने उन्हे अपनी बच्ची जैसा संभाला , चाचा के साथ बालिका जोहरा ने मोटर कार से एशिया और यूरोप के कई देशों की यात्रा की , यात्रा के बाद जोहरा ने लाहौर के क्वीन मैरी कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी की , सन १९३५ में वो प्रसिद्ध नृत्य गुरु उदय शंकर के ग्रुप से जुड़ी और अभिनय करने लगी और अगले आठ वर्षो तक विश्व के कई शहरो में इस ग्रुप के साथ अपनी प्रस्तुतियां दी , इसी दौरान उनकी मुलाकात हुई " कामेश्वरनाथ सहगल " से जो हमारे शहर इंदौर के वैज्ञानिक थे साथ ही शौकिया चित्रकार और नृत्यकार थे और जोहरा जी से आठ वर्ष छोटे थे , दोनो की पहचान प्यार में बदल गई परिवार के थोड़े से विरोध के बाद दोनो का विवाह हो गया , दोनो उदय शंकर जी के अल्मोड़ा स्थित संस्थान में काम करने लगे , आगे दोनो ने मिलकर " जोरेश डांस स्कूल " की स्थापना की , इस समय वो लाहौर में रहते थे, देश के विभाजन में जोहरा जी अपने पति के साथ मुंबई आ गई , ये वो समय था जब देश में थियेटर और सिनेमा एक साथ मिलकर काम करते हुए तरक्की कर रहे थे , इसी समय जोहरा जी " इंडियन पीपुल्स थियेटर असोसियेशन " से जुड़ी और उनकी अभिनय यात्रा शुरू हुई , उन्होंने सन १९४५ में पृथ्वी थियेटर भी ज्वाइन कर लिया
उनकी फिल्म केरियर की शुरुआत हुई सन १९४६ की फिल्म " धरती के लाल" से , अगली फिल्म रही चेतन आनंद की " नीचा नगर " जो कॉन फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली भारतीय फिल्म थी , पृथ्वी थियेटर के कई नाटकों में अभिनय करने के साथ उन्होंने कोरियोग्राफी का काम शुरू किया, इस विधा में उन्होंने _ बाजी , सी आई डी, आवारा , नौ दो ग्यारह, जैसी सुपर हिट फिल्मों में अपनी कला का प्रदर्शन किया
आपने कई जाने माने लोगो को डांस सिखाया है इनमे _ किशोर कुमार की पहली पत्नी " रूमा देवी के साथ पृथ्वी थियेटर के हर कलाकार शामिल है
सन १९५९ में अपने पति के निधन के बाद वो दिल्ली आ गई और नई नई स्थापित " संगीत नाटक एकेडमी " की निर्देशक बनकर काम संभाल लिया
सन १९६२ में वो लंदन गई , २२ वर्षो तक विदेश में काम करने के बाद भारत लौटी और हिंदी फिल्मों में अभिनय करना शुरू किया उनकी कुछ फिल्मे है _ दिल से , ख्वाहिश , हम दिल दे चुके सनम, बैंड इट लाइक, बैक हम , साया, वीर जारा, चिकन टिक्का मसाला, चीनी कम, सांवरिया आदि
आपको भारत सरकार द्वारा पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया है
सन २०१४ में उनका निधन हो गया, उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि , प्रस्तुत है उनका चित्र मेरे संग्रह से
_ दिनांक २७ अप्रैल २०२६

मित्रो , आज सुनहरे युग की बेहद लोकप्रिय और कामयाब अभिनेत्री_ डांसर कुमकुम का जन्म दिवस हैं,आपका जन्म सन १९३४ में हुआ था ...
22/04/2026

मित्रो , आज सुनहरे युग की बेहद लोकप्रिय और कामयाब अभिनेत्री_ डांसर कुमकुम का जन्म दिवस हैं,आपका जन्म सन १९३४ में हुआ था , उनका मूल नाम था जेबुननिसा , पिताजी थे सैय्यद मंजूर हसन नवाब
कुमकुम को फिल्मों में लाने का श्रेय गुरुदत्त साहब को है , उनकी सन १९५४ की फिल्म आर पार के लिए उन्हे एक नई लड़की की तलाश जी जो कुमकुम पर खत्म हुई , फिल्म में कुमकुम पर फिल्माया गया गीत " कभी आर कभी पार लागा तीर ए नजर " जबरजस्त लोकप्रिय रहा है , इसी फिल्म से संगीत निर्देशक ओ पी नय्यर साहब कामयाब संगीत निर्देशक बने थे , इसके बाद कुमकुम गुरुदत्त साहब की प्यासा में छोटीसी भूमिका में नजर आई, अगली फिल्म सी आई डी में जॉनी वॉकर साहब के साथ जोड़ी बनाकर " ए दिल मुश्किल है जीना यहां " गाते हुए नजर आई , सन १९५६ की मेम साब में शम्मी कपूर के साथ सहायक रोल में नजर आई, वहीं फिल्म चार दिल चार राहे में वो शम्मी कपूर की नायिका थी
उन्हे डांस का बहुत शौक था , इसलिए उन्होंने पंडित शंभू महाराज से शास्त्रीय नृत्य सीखा , फिल्म कोहिनूर में उनके दो डांस गीत _ मधुबन में राधिका नाचे रे और हाय जादूगर कातिल हाजिर है मेरा दिल , कुमकुम की नृत्य प्रतिभा का श्रेष्ठ उदाहरण हैं
दारासिंह की पहली फिल्म " किंग कांग" की कुमकुम नायिका थी , इसी तरह किशोर कुमार के साथ उन्होंने कई फिल्मों में नायिका का अभिनय किया है इनमे _ मिस्टर एक्स इन बॉम्बे , शरारत , गंगा की लहरे , श्रीमान फंटूश शामिल है
फिल्मकार रामानंद सागर की कुमकुम स्थाई कलाकार रही है , आंखे में वो धर्मेंद्र की बहन थी तो ललकार में उनकी प्रेयसी बनी नजर आई, जलते बदन में किरण कुमार की तथा हास्य फिल्म ' एक कुंबारा एक कुंवारी में प्राण साहब की नायिका थीं , हिंदी फिल्मों के साथ साथ वो भोजपुरी फिल्मों में सक्रिय हुई और वहां की सुपर स्टार बन गई उनकी कुछ भोजपुरी फिल्में है _ गंगा मैया तोहे पियरी चढ़ाई बो, लागी नाही छूटे राम, बलमा बड़ा नादान, नैहर छूटल जाएं, भौजी, गंगा आदि
उनकी कुछ हिंदी फिल्मे है _ मिर्जा गालिब, हाउस नंबर ४४, मिस्टर एंड मिसेज ५५, कुंदन, नया अंदाज़, बसंत बहार, मदर इंडिया, बारिश , काली टोपी लाल रूमाल, उजाला, दिल भी तेरा हम भी तेरे , सन ऑफ इंडिया, एक सपेरा एक लुटेरा , आन बान आदि
सन २०२० में कुमकुम का निधन हो गया , उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि
दिनांक २२ अप्रेल २०२६

मित्रो ,फिल्म मुगले आजम की कव्वाली _ तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर हम भी देखेंगे , या _   फिल्म पतंगा का गीत " मेरे पिया...
22/04/2026

मित्रो ,
फिल्म मुगले आजम की कव्वाली _ तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर हम भी देखेंगे , या _ फिल्म पतंगा का गीत " मेरे पिया गए रंगून वहां से किया है टेलीफुन," इस गीत को पर्दे पर गाते हुए नजर आने वाली अभिनेत्री "निगार सुलताना " की आज पुण्य तिथि है , आइए उनके विषय में कुछ जानते हैं
निगार का जन्म सन १९३२ में हैदराबाद में हुआ था , आपके पिताजी वहां के निजाम साहब की फौज के मेजर थे , परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था, निगार की शुरुआती पढ़ाई स्कूल में हुई लेकिन आगे की पढ़ाई घर में ही पूरी हुई
अपने स्कूली शिक्षा के दौरान निगार को एक नाटक में अभिनय करने का अवसर मिला, जिसकी बहुत प्रशंसा हुई यहीं से बालिका निगार की अभिनय में रूचि हो गई, सन १९३८ में ६ वर्षीय निगार ने फिल्म " हम तुम और वो " फिल्म देखी और उनके बाल मन पर इस फिल्म ने गहरा असर कर दिया, अब उनकी अभिनय के प्रति रुचि और भी बढ़ गई, रात दिन इसी विषय में विचार करते हुए किशोर आयु की होने तक वो फिल्मों में अभिनय करने का पक्का निश्चय कर चुकी थी
उस जमाने के प्रसिद्ध अभिनेता जगदीश सेठी, निगार सुलताना के पिताजी के अच्छे मित्र थे, जो उस समय फिल्मकार मोहन भावनानी के साथ मिलकर एक फिल्म बना रहे थे, उन्होंने अपनी फिल्म " रंग भूमि " में किशोर आयु की निगार सुलताना को सहायक भूमिका दी , फिल्मों में काम करने के लिए निगार सुलताना हैदराबाद से मुंबई आ गई, ये फिल्म सन १९४५ में प्रदर्शित हुई थी
इसके बाद उन्हे राज कपूर साहब की आर के फिल्म्स की पहली फिल्म " आग " में सहायक भूमिका मिली
सन १९४६ की फिल्म " शिकायत " के बाद सुनहरे दिन , बाजार में उन्होंने नायिका की भूमिका निभाई, लेकिन जल्द ही उन्हे चरित्र और सहायक भूमिका करना पड़ी , इनमे मुगले आज़म की बहार की भूमिका उनकी यादगार रही है जिसमे वो नायक नायिका की मोहब्बत के बीच कांटा बन जाती है
अपने सफल फिल्मी केरियर के दौरान निगार सुलताना ने फिल्मकार " एस एम यूसुफ " से विवाह कर लिया , देश के विभाजन के बाद सन १९५० में उनके पति पाकिस्तान चले गए , लेकिन निगार सुलताना ने यहीं भारत में रहने का फैसला किया , इस मसले को लेकर उनका तलाक हो गया, इसके बाद निगार सुलताना ने महान फिल्मकार " के आसिफ " से शादी कर ली , आसिफ साहब की ये दूसरी या तीसरी शादी थी , इस शादी के बाद निगार ने एक बेटी को जन्म दिया, हीना कौसर नाम की इस बेटी ने कई फिल्मों में अभिनय किया है
सन २००० में निगार सुलताना का निधन हो गया, उनकी कुछ फिल्मे है _ पतंगा , खेल, दिल की बस्ती , शीश महल, मिर्जा गालिब, यहूदी , १९५७, बेला , मिट्टी के खिलौने , खामोश , सिपाही , संगीता , मगरूर , डोलती नैया , फूलो के हार, दामन , बिखरे मोती , मेरे हमदम मेरे दोस्त आदि
निगार सुलताना को विनम्र श्रद्धांजलि
दिनांक २१ अप्रैल २०२६

मित्रों ,आज  सुनहरे युग की सफलतम और लोकप्रिय अभिनेत्री बबिता का जन्म दिवस है , आपका जन्म सन १९४७ में मुंबई में हुआ है , ...
22/04/2026

मित्रों ,
आज सुनहरे युग की सफलतम और लोकप्रिय अभिनेत्री बबिता का जन्म दिवस है , आपका जन्म सन १९४७ में मुंबई में हुआ है , आपके पिताजी " हरी शिवदासानी " एक अच्छे स्पोर्ट्स मैन और आकर्षक व्यक्ति थे , जिनके आकर्षण में पड़ कर एक फ्रेंच लड़की उनसे प्यार कर बैठी थी, दोनो ने विवाह कर लिया, इस तरह बबिता भारतीय पिता और फ्रेंच माता की संतान है , बबिता के पिताजी एक फिल्म स्टूडियो के मालिक थे और फिल्मों में छोटी छोटी भूमिकाएं करते थे , साथ ही राज कपूर साहब की टीम में शामिल थे ,
बचपन से ही बबिता को अपने घर में फिल्मों का वातावरण देखने को मिला , उन्हे अभिनय में दिलचस्पी हो गई , ये देखकर उनके पिताजी ने उन्हे अभिनय की विशेषता तथा बारिकिया सिखाना शुरू किया
बबिता को नायिका के रूप में पहली फिल्म मिली फिल्मकार _ जी पी सिप्पी की " राज " साथ में नायक थे नवोदित अभिनेता राजेश खन्ना फिल्म असफल रही , लेकिन बबिता के लिए फिल्मों का रास्ता खुल गया, क्योंकि उस समय हिंदी फिल्मों में अभिनेत्रीयो की कमी महसूस की जा रही थी सायरा बानो ने सिर्फ अपने पति के साथ काम करने का फैसला कर लिया था , साधना फिल्मों से दूरियां बना चुकी थी , वैजयंती माला, माला सिन्हा , वहीदा रहमान, आशा पारेख अपनी बढ़ती आयु को समझते हुए नायिका का काम करना बंद कर चुकी थी
बबिता को फर्ज फिल्म से बड़ी सफलता प्राप्त हुई , इसके बाद वो स्टार बन गई , फिल्म समीक्षकों की राय अनुसार वो कभी अच्छी अभिनेत्री नही रही , परंतु उनके प्रबल भाग्य से उनकी अधिकांश फिल्मे सफल रही
राज कपूर साहब के परिवार में उनका बहुत आना जाना लगा रहता था , रणधीर कपूर से अच्छी जान पहचान के चलते उन्होंने रणधीर कपूर से विवाह कर के फिल्मों से बीदा ले ली , उनकी दो पुत्रियां करिश्मा और करीना जानी मानी अभिनेत्रियां है , बबिता को जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई
आपकी कुछ फिल्मे है _ पहचान , अनमोल मोती दस लाख, रिक्शा वाला, डोली, हसीना मान जायेगी , किस्मत , अनजाना, कल आज और कल आदि
बबीता जी को जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई,
प्रस्तुत है उनका चित्र मेरे संग्रह से नहीं
दिनांक २० अप्रैल २०२६

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