13/04/2022
"छीपा की छाप" 14 अप्रैल 2022 शिल्पी हैंडीक्राफ्ट के स्थापना दिवस पर निमंत्रण
Invitation to the Foundation Day of Shilpi Handicrafts
"Chhipa Ki Chhap" 14th April 2022
On this auspicious occasion Shilpi handicrafts will give herbal IndiGo workshop to Uttar Pradesh institute of design students.
I hope my awareness campaign for natural indigo color will definitely bring changes and people will understand the benefits of natural indigo ! !
प्राकृतिक इंडिगो रंग के लिए मेरा जागरूकता अभियान निश्चित रूप से परिवर्तन लाएंगा और लोग प्राकृतिक नील के लाभों को समझेंगे!
जैसा कि सर्व विदित है कि प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की नैतिक जिम्मेदारी हम सभी की है। जलवायु परिवर्तन के खतरे और गंभीर होते जा रहे हैं और हमारे वैज्ञानिक अब बहुत ठोस और बड़ा कदम उठाने की सलाह एक चेतावनी के तौर पर देने लगे हैं.
हर्बल रंगों के सांस्कृतिक और आर्थिक पुनरुद्धार के सामने आने वाली चुनौतियों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक वास्तविक मंच तैयार करने के क्रम में एक और प्रयास - आपको जानकारी हो कि पौध आधारित इंडिगो रंग प्रकृति के संरक्षण में अति आवश्यक है और भारत इसका जन्म दाता होने के साथ ही वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा उत्पादक रहा है परंतु रसायनिक इंडिगो का उद्भव व निर्माण होने से इस पौधे के साथ अंग्रेजों द्वारा बहुत सी बदनामियां जोड़ दी गईं जिसके चलते किसानों में डर बैठ गया है।
यदि हमें धरती को बचाने का वास्तविक प्रयास करना है तो किसान से लेकर वस्त्र निर्माता तक को पौधे आधारित इंडिगो के प्रयोग के बारे में जागरूक कर जलवायु परिर्वतन और रोजगार उपलब्ध कराने के क्षेत्र में योगदान करना होगा।
UPID द्वारा मुझे 60 डिजाइन और फैशन क्षेत्र के छात्रों को कार्यशाला देने हेतु लखनऊ वोकल फोर लोकल कार्यक्रम में बुलाये जाने से खुशी है और में आशा करता हूँ कि छात्रों द्वारा हर्बल इंडिगो का भविष्य के सस्टेनेबल वस्त्रों में उपयोग वैश्विक वार्मिंग को संतुलित करने मे विशेष भूमिका निभायेगा।
BRIJ BALLABH UDAIWAL
MASTER CRAFT ARTISAN
Phone : +91 9314505805
E-mail: [email protected]
Website: shilpihandicraft.in
Master Craftsman with thorough hands-on experience in Hand Block Printing. Belong to a family of traditional textile block printers from Sanganer. Sanganer - A place know throughout the world for its fine printing with wooden blocks on Fabrics. I have exceptionally keen senses, and love working with hands. Excitable and often unconventional, seek out the stimulation of new experiences and like to try - and even master - the great variety of activities that life has to offer.
INDIGO - THE BLUE GOLD
My love for Hand Block Printing and Indigo Dyeing is beyond words. Dyeing and Printing, a technique practiced from ancient times, is a medium to express things through fabrics and colours.
AREA OF INTERESTS
Design Development and training with handloom weavers and handicrafts artisans.
Providing Services for textile dyeing and textile hand block printing with harble dyes.
The Story of Indigo Blue in Rajasthan
Until the beginning of 20th Century, Rajasthan was cultivating Indigo and extracting the deep rich blue dye from it. The sub tropical climate of Rajasthan was favourable to Indigo cultivation. Many surviving members of the dyer community such as the Neelgar and Rangreez and the block printers like the Chippa, Bhavsar and Khatri attest
नील Indigo : एक शांत रंग है.ये रंग तनाव को दूर करता है. It's a cool color. This color removes stress.
मैं लंबे समय से इंडिगो के साथ मोहित हूं - शानदार प्राकृतिक नीली डाई जिसका उपयोग पूरे मानव इतिहास में किया गया है। इस रंग की सुंदरता और दुनिया भर में पारंपरिक वस्त्रों में इसका उपयोग एक विशेष आकर्षण रहा है। यह आकर्षण पूरी तरह से सौंदर्यशास्त्र रहा है। इंडिगो पारंपरिक वस्त्रों में बहुत खूबसूरती से उपयोग किया जाता रहा है।
I have been fascinated with Indigo for a long time - the spectacular natural blue dye used in the whole of human history. The beauty of this color and its use in traditional textiles around the world has been a special attraction. This attraction is completely aesthetically. Indigo has been used very beautifully in traditional fabrics.
प्राकृतिक इंडिगो डाई का निर्माण अविश्वसनीय रूप से जटिल है
वास्तव में, भारत में इंडिगो यानि देशी नील का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। पौधे से डाई बनाई जाती है।
डेनिम बनाने के लिए सिंथेटिक इंडिगो का उपयोग होता है - प्राकृतिक indigo नील डाई की कीमत,सिंथेटिक इंडिगो कि तुलना मैं चार गुना अधिक होती है ।
Natural indigo reaserch institute (NIRI) प्राकृतिक नील डाई के साथ काम कर रहा है। खेती की प्रक्रिया श्रम-श्राध्य व जल आधारित है। हम इंडिगो के साथ काम कर पारंपरिक स्थानीय हस्त कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक माहौल व बाजार तैयार कर रहे हैं, साथ ही प्रयाशरत हैं कि उत्पादक एवं उपयोगकर्ता इसके महत्व को समझे !
यह अन्य रंगों की तरह कपास (धागे) में प्रवेश नहीं करता है, धागे के उपर रहता है। रंग समय के साथ फीका पड जाता हैं,जिससे कपड़े अद्वितीय हो जाते है।
At present what raises concern is the reduction technique in indigo dyeing. The use of sodium hydrosulphite as a reducing agent is associated with several environmental issues.
Alternate reducing systems have been explored, such as organic reducing agent, biological reduction.
कोरोना के भयावह काल ने वैश्विक स्तर पर मानव जाति को स्वास्थय और स्वछता के प्रति जागरूक होने का सन्देश दिया है।
हम सबको समझना होगा कि सिर्फ भोगवाद में जीना और पैसे के पीछे भागना ही जिंदगी नहीं है। सम्पूर्ण विश्व में रसायनों के अंधाधुन्द प्रयोग ने मानव जाति के जीवन को इतना कठिन बना दिया है कि खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है लेकिन कुछ पर्यावरणविदों और वास्तविक मानवों ने इन सब विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जैविक चीज़ो का इस्तेमाल करके पृथ्वी को बचाने का अथक प्रयास किये है। वह चाहे जैविक खेती हो,आयुर्वेद हो या जैविक रंगो का प्रयोग हो।
नील, सिर्फ एक रंग नहीं है।
नील एक भावना है, समुदाय है उन नेक और जागरूक लोगों का जो प्रकृति और उसके तत्वों की महत्ता को जानते है। नील/इंडिगो, एक जैविक, पौराणिक, शुद्ध, प्राकृतिक उपहार है जिसके अनेकों उपयोग हैं जिनके बारे में हम अभी तक वाकिफ नहीं हैं। नील का उपयोग न केवल धागे और कपड़ों की रंगाई में किया जाता है बल्कि एक एंटीसेप्टिक के रूप में भी किया जाता रहा है, जो मेहंदी के साथ हेयर डाई में भी किया जाता था/है, और पेंट तथा स्याही में भी।
प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भरता का सपना सच करने के लिए
कपड़ा मनुष्य की तीन बुनियादी जरूरतों में से एक है और भारत कपास की खेती में समृद्ध है, इससे पता चलता है हम आत्मनिर्भरता के नज़दीक है, आवश्यकता हमें स्वदेशी का उपयोग करने की है, आग्रह करता हूं राजनेता, व्यवसायी, सरकारी विभाग, हमारे हस्तशिल्प का उपयोग निष्ठा के साथ कर बुनकरों और कारीगरों के उत्थान के लिए हमसे जुड़ें, हम फिर से सोने की चिडिया हो सकते हैं.
प्यारे दोस्तों, मैं बृज बल्लभ उदयवाल हूँ, मैं दुनिया के पहले पृमाणिक शिल्प शहर जयपुर से हूँ, मैं 40 साल से प्राकृतिक रंगों के साथ कपड़ा छपाई के क्षेत्र में काम कर रहा हूँ और इस शिल्प में यह मेरी पाँचवीं पीढ़ी है,साथ ही 7 साल से प्राकृतिक इंडिगो की खेती व उपयोग, खद्दर के कपड़े, स्टोल और दुपट्टे पर कर रहा हूँ!
नील की ख़ासियत है इसकी तासीर सर्दियों में गर्म और गर्मियों में शीतल प्रदान करती है।
भारत में नील कई नाम, मान्यता, धारणा और श्रद्धा से विख्यात हैं । जोधपुर नील शहर , दक्षिण भारत में नील माता, नील सोना । कही इसे समंदर मंथन के विष भगवान शंकर के कण्ठ तो दक्षिण भारत में कृष्णा काली की प्रतिमा नील रंग में रंगना क्योंकि नील को ब्रम्हाण्ड का प्रतीक भी माना गया है, चूने और नील का प्रयोग पुताई में इस्तेमाल कर दीमक और अन्य कीड़े जन्तु से बचाव किया जाता है।
नील का महत्व, उपलब्धि पहचान का साक्ष तो स्वयं इतिहास है जी हाँ हम बात कर रहे हैं 1859 नादिया जिला से शुरू हुए उसी नील बिद्रोह की जो सन् 1857 में बंगाल के विभिन्न हिस्सों तक फैल विकराल स्वरूप अंग्रेज़ी हुकूमत को घुटनों टेकने पड़े और मार्च 1860 में गठित आयोग ने बिद्रोह और शोषण को उचित ठहराते हुए अंततः नील खेती को बंद करने का निर्णय दिया।
यह नील बिद्रोह पर्याप्त है यह बताने को की किस कदर यूरोपीय देश और विश्व में नील की भारी मांग और मुनाफ़ा के चलते बंगाल के किसानो को जबरन नील खेती करवा शोषण किया ।
आज भी विश्व में नील की बहुत भारी मांग है लगभग 80 प्रतिशत रंगाई नील से हो रही है।
नील कार्यशला में चर्चा के मुख्य बिंदु रहेंगे -
१. वैभब पूर्ण नील का इतिहास
२. आज के परिपेक्ष में नील - निर्माता, उपयोग, रंगाई, उद्योग, व्यापार।
३. और बहुतायत चर्चा जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण में नील की भूमिका।