03/08/2024
बहुत समय पहले की बात है, जब भगवान राम ने सीता माता को रावण से बचाने के लिए लंका जाने का निश्चय किया। उनके साथ वानर सेना और महाबली हनुमान भी थे। हनुमान जी भगवान राम के अनन्य भक्त थे और अपनी शक्ति, साहस और भक्ति के लिए प्रसिद्ध थे।
जब भगवान राम की वानर सेना समुद्र के किनारे पहुंची, तो लंका तक पहुंचने के लिए समुद्र को पार करना एक बड़ी चुनौती थी। कोई भी वानर इतनी लंबी छलांग लगाने की क्षमता नहीं रखता था। तभी जामवंत ने हनुमान जी को उनकी असाधारण शक्तियों की याद दिलाई। हनुमान जी ने अपने अंदर की शक्ति को पहचाना और समुद्र को पार करने का निश्चय किया।
हनुमान जी ने भगवान राम का ध्यान करते हुए "जय श्री राम" का जयकारा लगाया और अपने शरीर को विशालकाय कर लिया। उन्होंने अपनी एक टांग को मोड़ा, दूसरी को सीधा रखा और अद्भुत गति से आकाश में उछल पड़े। वे वायु की गति से उड़ते हुए समुद्र के ऊपर से निकल गए।
रास्ते में हनुमान जी का सामना सुरसा नामक राक्षसी से हुआ, जिसने उन्हें अपना भोजन बनाने का प्रयास किया। हनुमान जी ने अपने बुद्धि का प्रयोग करते हुए पहले अपने शरीर को विशाल किया और फिर अचानक छोटा हो गए, जिससे सुरसा को मात देकर वे आगे बढ़ गए।
इसके बाद, जब वे लंका पहुंचे, तो उन्होंने सीता माता का पता लगाया और भगवान राम का संदेश उन्हें दिया। लंका से लौटते समय हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को जला दिया और लंका के राक्षसों को अपनी शक्ति का परिचय दिया।
भगवान राम ने हनुमान जी के अद्वितीय साहस और भक्ति की सराहना की। हनुमान जी का यह बलिदान और सेवा आज भी हमें सिखाता है कि यदि हम भगवान के प्रति सच्ची भक्ति और समर्पण रखते हैं, तो कोई भी कठिनाई हमारे मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।