27/10/2024
व्यापार की पद्धति वस्तु विनिमय से मुद्रा_आधारित_हो_गई।
यहाँ तक ठीक है लेकिन जब वही मुद्रा प्रवाह अनेक से एक की तरफ होता रहा तो अंततः वह शोषण का पर्याय हो जाता है।
प्रथम उदाहरण
विश्व में कम्पनियों का दबदबा होने से अंततः ऐसी स्थिति बनेगी कि छोटी छोटी सभी कम्पनियों को बड़ी कंपनियां खा जाएंगी।
इस प्रकार जो पिरामिड बनेगा उसके शीर्ष पर बहुत कम लोग होंगे और नीचे वाले उनकी दया पर निर्भर होंगे।
और अंततः विश्व की सारी अर्थव्यवस्था कुछ टेरिटरी के हाथों संघनित हो जाएगी।
और कल्पना कीजिए कि उक्त टेरिटरी आपस में मिल जाती है तो पूरा मानव समाज इनका गुलाम हो जाएगा।
डीप स्टेट यही कर रहा है। अगर यह सफल हो गया तो आगामी कुछ ही वर्षों में मानव समूह, गले में जंजीरें बंधवाकर मात्र भोजन के बदले काम करता हुआ मिलेगा। बिल्कुल kgf वाली स्थिति होगी और यह असम्भव नहीं है। सबकुछ सिमटता जा रहा है। वर्चस्व सिकुड़कर मात्र कुछ हाथों तक सीमित करने का वर्तमान साधन उक्त धन ही है।
मुद्रा, उसके नियम, अनुबंध, शर्तें, विकीर्ण होकर जीवन यापन के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंच चुका है। खेती, बीज, उर्वरक सब उनके। मनुष्य कहाँ जाएगा।
दूसरा उदाहरण व्हाट्सएप से लिया गया है।:-
सोने चांदी के व्यापारी नंदू भाई सोनी ने बाजार में से धर्मेन्द्र भाई की दुकान से 20,000 का टीवी खरीदा।
टीवी के व्यापारी धर्मेन्द्र भाई ने 20,000 रुपए का व्यापार होते ही रमेश ट्रेडींग कम्पनी से अपने घर के लिए पानी की नई मोटर और प्लंबिंग का सामान खरीदा।
प्लंबिंग के व्यापारी राजाराम चौधरी ने अपनी जरूरत के हिसाब से उसी बाजार से दिनेश भाई की दुकान से कपड़े और किराना का सामान खरीदा।
दिनेश भाई ने उसी पैसे को अपने बच्चों कि फीस के लिए श्रवण भाई कि स्कुल में जमा करवाए श्रवण भाई ने देवीलाल जी से स्कुल में कंस्ट्रक्शन का काम करवाया और वो पैसे देवीलाल जी को दे दिया देवीलाल जी ने वो पैसे अपने मजदूरो को दिया मजदूरो ने बाबुभाई से सब्जी व दूदाराम, सांवलाराम, मांगीलाल से अपने जरूरत का किराणा का सामान खरीदा और सब्जी व किराणे वालों ने अपनी अपनी जरूरत के हिसाब से नंदू भाई से गहनों की खरीदारी की।
मतलब कि वही पैसा घूम फिर के वापस = *नंदू भाई सोनी* = के पास आया और सब का व्यापार हुआ..!!
अब यहां सवाल यह है कि नंदू भाई = ने टीवी ऑनलाइन खरीदा होता तो ??
तो वह पैसे कहां जाता ? 😔😔
अगर आप भारतीय हैं तो दिमाग लगाएं ..!!
लोकल मार्केट से ही खरीदी करेंगे तो आपके पैसे आपके गांव या शहर में ही घूमते रहेंगे..!!
ऑनलाइन खरीदारी किए हुए पैसे ऐसी जगह चले जाएंगे जो आपकी आने वाली दूसरी पीढ़ी को भी काम नहीं आएंगे ..!!
इसलिए सस्ते माल की लालच में ना आएं और अपने मार्केट से ही खरीदारी करें..!
खुद ही खुद को सेठ बनाएं..!!