Cheap and Best Shopping

Cheap and Best Shopping बस तुझसे इतना चाहिए ए जिंदगी.....कि जमीन ?

13/02/2026

Shop for yourself or start selling online in India— all on the Meesho app.

"शर्मा..बहुत बड़ी नादानी कर रहे हो...रिटायर हो चुके हो..यहीं रहो ये सब कुछ बेचके..कहाँ अपने लड़के के पास जा रहे हो..." गुप...
12/10/2024

"शर्मा..बहुत बड़ी नादानी कर रहे हो...रिटायर हो चुके हो..यहीं रहो ये सब कुछ बेचके..कहाँ अपने लड़के के पास जा रहे हो..." गुप्ता जी ने अपने चालीस साल पुराने दोस्त शर्मा के इलाहाबाद से दिल्ली शिफ्ट होने के फैसले पे ऐतराज जताते हुए कहा

शर्मा जी मुस्कुराए और बोले "भाई गुप्ता..बच्चों के बगैर दिल नहीं लगता...जिंदगी के पूरे दिन तो उन्हें पालने पोसने में लगा दिए..अब जिंदगी की आखिरी कुछ शामें बच्चों और उनके बच्चों के साथ भी न बिताने को मिले तो क्या फायदा..वैसे भी अब हम और तुम्हारी भाभी दिन पर दिन कमजोर हो रहे हैं..बेटे के पास रहेंगे तो वो खयाल रखेगा रात बिरात दवा दारू के लिए भागना अब मुझसे नहीं हो पाता"

"भूल गए वो रमन लाल का क्या हश्र किया था उसके बेटे और बहू ने...वो भी तुम्हारी तरह सब कुछ बेच के गया था...खाली हाथ लौटा और अब दोनों बुढ्ढे बुढ़िया यहीं किराए पे रह रहे हैं" गुप्ता ने तीखे स्वर में ऐसे कहा मानो उन्हें कोई अपना पुराना जख्म याद आ गया हो

"नहीं भाई गुप्ता...मेरा बेटा ऐसा नहीं है...पता है जब उसकी नौकरी इंफोसिस में लगी थी...उसने हमारे पैर छूते हुए कहा था कि पापा..मम्मी ये आप लोगों के कारण ही मैं आज यहाँ पहुँचा हूँ..और मैं ये बात कभी भूल नहीं सकता कि आप लोगों ने कितनी तकलीफों से मुझे पाला है...गुप्ता..वो और मेरी बहू बहुत अच्छे हैं मुझे यकीन है वो हमारा ख्याल अच्छे से रखेंगे.." शर्मा जी थोड़ा भावुक होते हुए बोले

गुप्ता ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा "मुगालते में हो शर्मा..ये आजकल के लड़के..बहुएं..माँ बाप को नौकर बना के रखते हैं...ऐसी बेतुकी बाते तुम मुझसे तो मत ही करो..अक्ल से काम लो..तुम पश्चिम में सूरज उदय होने जैसी बात कर रहे हो..पछताओगे एक दिन.."

"ठीक है यार कुछ हुआ तो तेरा घर तो रहेगा ही मेरे लिए..वैसे ये मेरे बेटे की नहीं..मेरे दिए संस्कारों की परीक्षा है..अब देखना है कि क्या मैं इसमें पास होता हूँ या फिर..." शर्मा जी गुप्ता से गले लगते हुए भावुक स्वर में बोले और फिर अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के लिए निकल गए

आज शर्मा जी को दिल्ली आए एक साल हो गया है उनके बेटे बहू दोनों जॉब करते हैं..वे दोनों अपनी अपनी कंपनी में बहुत ऊँची पोस्ट पे पहुँच चुके हैं...शर्मा और उनकी पत्नी घर मे अपने पोते के साथ खेलते जिंदगी की शामें सुख से बिता रहे हैं

"पापा..एक खुशखबरी है..मुझे कंपनी से बहुत बड़ा ऑफर मिला है..मैं अपनी कंपनी से छः महीने के लिए अमेरिका जा रहा हूँ...आई टी इंडस्ट्री में ये मौका बहुत कम लोगों को मिलता है..हाँ कहने से पहले सोचा आपसे पूछ लूँ " शर्मा जी के बेटे राघवेंद्र ने सबसे पहले ये खुशखबरी अपने पिता को सुनाई

शर्मा जी ने गदगद होते हुए कहा "वाह बेटा ये तो बहुत फक्र की बात है..तेरे पापा मम्मी तो कभी यू.पी के भी बाहर नहीं निकले...और हमारे बेटे को सीधे अमेरिका जाने का मौका मिल रहा है..सब जगदम्बा की कृपा है..जरूर जाओ बेटा"

राघवेंद्र अमेरिका चला जाता है उसके पीछे शर्मा जी की बहू वैदेही ने उनकी जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह से संभाल ली और तीन महीने यूँ ही बीत गए एक दिन शर्मा जी के बेटे का अमेरिका से फोन आता है

"पापा..आपको याद है एक बार संगम के मेले में..एक हवाई जहाज वाला बड़ा सा झूला लगा था...वो जिसका चार्ज एक आदमी के लिए दो रुपैये था उस वक्त..उसमें कई बच्चे अपने अपने पापा मम्मी के साथ बैठ के झूल रहे थे...मैंने भी आपसे जिद की थी कि मुझे आपके साथ बैठना है..पर आपने मुझे किसी और अंकल के साथ बिठा दिया था.. मैं झूले में तो बैठा था पर बाद में आपसे बहुत गुस्सा हुआ था कि आप साथ में क्यों नहीं बैठे थे..पर बड़े होके मुझे समझ आ गया था कि आपके लिए उस समय दो रुपैये भी बहुत होते थे" राघवेंद्र का गला रुंध आया,उसने आगे कहा "पापा मेरी अमेरिका से वापसी का समय पास आ रहा है...आप मना मत करना..मैंने वैदेही को सब समझा दिया है वो वीजा टिकेट वगैरह का इंतजाम कर लेगी..आप और मम्मी वैदेही और कुशेन्द्र के साथ अमेरिका घूमने आ जाओ..वापसी हम सब साथ मे करेंगे...मैं इस बार अपने मम्मी पापा के साथ सच के हवाई जहाज में बैठना चाहता हूँ" राघवेंद्र की बात सुनकर शर्मा जी के गाल आँसूओं से भीगे चले जा रहे थे..वैदेही उनके पास खड़ी थी उसे फोन पकड़ा के वो घर के मंदिर में माँ अम्बे के पास नयनों में भर आए जल का अर्पण करने चले गए

आखिर वो दिन भी आता है जब शर्मा जी सपरिवार अमेरिका में राघवेंद्र के पास पहुँच जाते हैं और रात में आराम करने के बाद वहाँ की पहली सुबह देख रहे होते हैं वो राघवेंद्र से इलाहाबाद गुप्ता का नंबर मिलाने को कहते हैं

"हेल्लो कौन? अरे..हाँ शर्मा..बोल कैसा है..सब ठीक तो है..बड़े दिनों बाद याद आई.." इलाहाबाद में संगम के पश्चिमी किनारे पर सूरज डुबोते हुए गुप्ता ने एक साँस में कहा

इधर शर्मा ने अमेरिका से कहा "सब ठीक है गुप्ता..अमेरिका में हूँ..अपने बेटे के साथ 'पश्चिम' में सूरज को उगता देख रहा हूँ।"

एक पिता और पुत्र व्यापार में साथ काम करते थे। वर्षों बीत गए, और पुत्र की उम्र चालीस के करीब पहुंच चुकी थी। लेकिन पिता उस...
01/10/2024

एक पिता और पुत्र व्यापार में साथ काम करते थे। वर्षों बीत गए, और पुत्र की उम्र चालीस के करीब पहुंच चुकी थी। लेकिन पिता उसे न तो व्यापार की स्वतंत्रता देते थे और न ही तिजोरी की चाबी। पुत्र के मन में यह बात लगातार खटकती रही। वह सोचता, "अगर पिता जी मुझे इसी तरह नियंत्रित करते रहे, तो मुझे कभी व्यापार में कुछ नया करने का मौका नहीं मिलेगा।"

पुत्र के अंदर यह असंतोष धीरे-धीरे बढ़ता गया और एक दिन झगड़े के रूप में फूट पड़ा। आखिरकार, दोनों के बीच संपत्ति का बंटवारा हो गया और वे अलग-अलग हो गए। पुत्र अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहने लगा, जबकि पिता अकेले हो गए। पिता की पत्नी का देहांत पहले ही हो चुका था, और उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति को अपने साथ रहने या सेवा करने के लिए नहीं रखा क्योंकि उन्हें किसी पर भरोसा नहीं था। वे खुद ही साधारण भोजन बना लेते या कभी-कभी भूखे ही रह जाते।

पुत्रवधु बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति की थी और उसमें बड़ों के प्रति आदर और सेवा का गहरा भाव था। जब उसे अपने ससुर की इस स्थिति का पता चला, तो उसे बहुत दुख हुआ और आत्मग्लानि भी महसूस हुई। उसने अपने पति को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। पति के मन में पिता के प्रति अभी भी कड़वाहट थी। तब पुत्रवधु ने एक ठोस निर्णय लिया। वह पहले अपने पति और बच्चों को खाना खिलाकर दुकान और स्कूल भेज देती, फिर खुद ससुर के घर जाकर उन्हें भोजन बनाकर खिलाती और रात के लिए भी भोजन तैयार करके रख देती।

कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। एक दिन पति को जब यह बात पता चली, तो उसने अपनी पत्नी को रोकने की कोशिश की और कहा, "तुम इतना परिश्रम क्यों करती हो? इससे तुम्हारी सेहत खराब हो जाएगी।" पत्नी ने जवाब दिया, "मैं यह नहीं देख सकती कि मेरे आदरणीय ससुर भूखे रहें और हम आराम से खाएं। उनका भी तो हम पर अधिकार है। मेरा धर्म है बड़ों की सेवा करना, और यह मुझे शांति और संतोष देता है। उनमें भी मेरे भगवान का वास है।"

पत्नी की इन बातों और उसके सुसंस्कारों ने पति के मन को बदल दिया। उसने जाकर अपने पिता से माफी मांगी, उनके चरण स्पर्श किए और उन्हें अपने घर ले आया। अब पति और पत्नी दोनों मिलकर पिता की सेवा करने लगे। पिता ने भी व्यापार का पूरा जिम्मा अपने पुत्र को सौंप दिया।

इस प्रकार, जब किसी परिवार में सच्चे सद्भाव, संवेदनाएं और उच्च संस्कार होते हैं, तो वह परिवार एकजुट रहता है और वहां सुख-शांति बनी रहती है। यह तभी संभव है जब जीवन में सत्संग हो और भारतीय संस्कृति के आदर्श संस्कार हों। सत्संग जीवन की एक अनिवार्य मांग है, क्योंकि असली सुख वही है जो सत्संग से मिलता है।

Sanatani TachPosted by Sanatani-Karmayogi777 -wedभाजपा की हार ..मोदी जी 4 जून से लगातार मन में मंथन चल रहा था कि आखिर आप...
20/07/2024

Sanatani Tach
Posted by Sanatani-Karmayogi777 -wed
भाजपा की हार ..

मोदी जी 4 जून से लगातार मन में मंथन चल रहा था कि आखिर आप 240 पर कैसे अटक गये। फिर कई बाते विचार करने योग्य निकलीं

1. वर्ष 2014 में देश में चुनाव आया, तो आपने कहा मैं प्रधानमंत्री नहीं हूँ, मैं तो प्रधान सेवक हूँ। देशवासियों ने जबरदस्त स्वागत किया, बदले में आपने देश हित में कई महत्वपूर्ण कार्य किए, मजा आ गया, मजा आ गया

2. समय बदला और 2019 में आप ने कहा कि मै तो देश का चौकीदार हूँ। आपने चौकीदार की अर्जी दी... देश की जनता ने पहले से भी ज्यादा भर भर के आशीर्वाद दिया...

और इस दूसरे टर्म में आपने पहले की अपेक्षा देश हित में और कई अभूतपूर्व काम किए, साथ ही संसार में यश और नाम खूब बढ़ा। हमें बहुत खुशी हो रही थी। मजा आ रहा था

3. फिर भी बहुत तकलीफ थी। जिस जिहादी कौम का भरोसा पृथ्वीराज चौहान भी नही जीत पाए, उनका भरोसा आप जीतने में लगे रहे। दस सालों में आप मध्यम वर्ग को भूल गये..

4. अमीरों को मांगने की जरूरत नही होती... गरीबों को राशन, मकान, दे रहे हो, फिर मध्यम वर्ग को क्या मिला कभी सोचा नहीं सोचा...

अल्पसंख्यकों को मिलाने के लिए आपके अनूठे प्रयोगों से कोर वोटर नाराज़ होते रहे.. ये आपने ही कहा था ना कि मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ मे कंप्यूटर होना चाहिए... ठीक बिलकुल ठीक... फिर हिन्दुओं के हाथ में क्या होना चाहिए? कभी बताया नहीं आपने

खैर बदले में मुसलमानों ने आपके हाथ मे घंटा पकड़ा दिया

पूरे साठ सालों में जितना लाभ उनको कांग्रेस ने नहीं दिया, उससे कई गुना ज्यादा आपने इनको 10 सालो में, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य, गैस, बिजली, पानी, सड़क, रेल, सब कुछ दिया...

5. आपके फ़ैसले से आपके लोग दुखी हुए, फ़िर भी आपके साथ दुखी भाव से खड़े रहे... लेकिन जब चुनाव का वक्त आया तो आपने सरकार बचाने या चुनाव जीतने का नारा ही नहीं दिया, जबकि साइकोलॉजिकल नैरेटिव "अबकी बार चार सौ पार" का कर दिया...

6. आप के वोटर बाहर ही नहीं निकले, क्योंकि सब यही सोचते रहे अरे 400 पार तो हो ही जायेगा, एक मेरे वोट से क्या होगा...

7. आपने कांग्रेस, राहुल गांधी, और विरोधियों को सड़क पर उतार दिया। आपसे दूसरी बड़ी गलती यही हो गई

8. बंगाल मे आप के कार्यकर्ता मरते रहे, प्रताड़ित होते रहे, रोते रहे, कलपते रहे.. मगर पूर्ण बहुमत की सरकार होते हुए भी आपने कुछ नहीं किया। अजी कार्यकर्ता तो छोड़िए, CBI, ED को भी पीटते रहे, आपने कुछ नहीं किया। ममता को हटाया क्यूँ नहीं? बर्खास्त करना चाहिए था।

9. आज उस राहुल का कद इतना बड़ा हो गया कि उसने अपने मामूली से कार्यकर्ता से आपकी अमेठी वाली प्रत्याशी, जिसने कभी स्वयं राहुल को हराया था, को भारी अंतर से पटकवा दिया.. खैर

जूता महँगा हो अथवा सस्ता, उसे सर पर नहीं रखते..

किंतु आपकी समझ में नहीं आया...

10. आप नहीं माने। बीजेपी वाशिंग पाउडर से धो धो कर दूसरी पार्टी के भ्रष्टाचारियों को पनाह देते रहे.. क्योंकि आपको विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनना था।

11. जो आप के पुराने कार्यकर्ता थे वो मुँह ताकते रहे, आप गैरों को टिकट देते रहे। ये आपके वही कार्यकर्ता थे जो 2014 और 2019 के चुनाव में जान और धन लुटाते रहे....

अभी भी वक्त है, पैंतरे बदलिए और खुद को संभालिए।

12. बीजेपी फैजाबाद से हार गई। जानते है क्यों हारे?

आपने राम भक्तो पर गोलियाँ चलवाने वाले को पदम् श्री आदि से सुशोभित किया। किया ना?

तो फिर वहाँ की पब्लिक ने राम द्रोही को जितवा दिया, तो क्या गलत किया?

इससे बड़ा और प्रमाण क्या चाहिए की देशद्रोहियों को सिर्फ आपका फ्री माल चाहिए, लेकिन वे आपको वोट नहीं देंगे

शुक्र मनाइए कि अच्छे काम की वजह से जागृत हिन्दू के कारण आपकी सरकार अंतिम समय में बन गई। अपने इस टर्म में राजनीति से ऊपर उठकर विकास और हिन्दुत्व का ऐसा मापदंड तय कीजिए कि विश्व के मानचित्र पर विकसित, समृद्ध, और सशक्त भारत की मजबूत और सुदृढ़ स्थिति हो।

आखिर में, आपने पार्टी और देश को टू मैन कम्पनी के तरीके से 10 वर्ष चलाया है। इस रवैये को अब थोड़ा बदल दीजिये, और थोड़ा अपने कार्यकर्ताओं की बात पर ध्यान देना शुरू करिए। थोड़ा हिन्दू मध्यम वर्ग की भी चिंता कीजिये, जिसने भाजपा और जनसंघ को अपने खून से पाला है।

"राष्ट्रहित सर्वोपरि" 💪💪

जय श्री राम 🙏

हर हर महादेव 🔱🙏🚩

बहुत मुश्किल से पापा ने आज मुझे आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजने की बात को मान लिया ,अम्मा आज मैं बहुत खुश हूं प्यारी अम्मा...
16/06/2024

बहुत मुश्किल से पापा ने आज मुझे आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजने की बात को मान लिया ,अम्मा आज मैं बहुत खुश हूं प्यारी अम्मा कहकर मैं गले में लग गई।

कमला भी चाहती थी की बेटी पढ़ लिखकर अपने पैरो पर खड़ी हो तभी उसका विवाह करेंगे ,लेकिन पढ़ाई के लिए शहर भेजने से डर भी लगता था कही कुछ ऊंच नीच न कर दे बिट्टो ।

कमला ने अनिला को पास बिठाया अब मेरी बात सुन बिट्टी तुम हुआ़ पढ़ाई छोड़ घूमा फिरी न करियो,कौनाऊ अगर गलत बात सुनाई दी तो ऑन दिनई तुमका वापस बुलाई लाई समझी ।बहुत भरोसा करके पापा तुमको पढ़ने को भेज रहे हैं ।

अरे मेरी अम्मा हम पढ़ाई छोड़ कुछ नही घूमा फिरी करिये मुझे पढ़कर अच्छी अफसर बनना है ।

घर से दूर जाने का डर भी था परंतु आगे पढ़ने का मन भी था इसी सब खयालों से आज मैं सो नहीं सकी सुबह जब पक्छिओ ने बोलना शुरू किया तभी उठकर अम्मा के पास आकर लेट गई ।

क्या हुआ बिट्टी सोई नहीं ?

तुम्हारे साथ सोई जाई अम्मा कहकर जो सोई तो सूरज चढ़े आंख खुली ।

पापा ने कानपुर के गर्ल्स डिग्री कॉलेज में मेरा एडमिशन करवा दिया ,पापा खुद एक अच्छे टीचर है उनकी गांव में बड़ी इज्जत है ।बहुत मुश्किल से एक गर्ल्स हॉस्टल में मेरे लिए जगह मिल गई एक कमरे में दो लड़कियों को रहना था मेरे साथ भी एक लड़की रुचिता थी देखने में बहुत सुंदर फैशन पसंद मेरा तो पहनना कस्बे की लड़की जैसा था ।मुझे तो पढ़ना था एस एस सी की परिक्षा पास करनी थी ।

रूचिता की दोस्ती कुछ लड़कों से थी वह उनके साथ घूमती रहती कभी थोड़ी बहुत पढ़ाई कर लेती ।

मेरा तो उद्देश्य पढ़ाई और कंप्टीशन की तैयारी था ।वह अक्सर अच्छी अच्छी गिफ्ट लेकर आती ,मुझे अब उससे बचकर रहना था वह मुझे दोस्तों के किस्से उनके साथ की मौज मस्ती सुनाती थी ।

मै उसके साथ # फूक फूक के कदम रखकर रह रही थी कोई दूसरा कमरा भी मुझे नही मिल रहा था ।

मुझे अम्मा की बात भी याद आती थी , एक कमरे में रहते उससे दूरी बनाना चाहती थी परंतु वह भी संभव नहीं हो रहा था ।

एक दिन वह अपने जन्म दिन की पार्टी की बात कहकर मुझे अपने साथ चलने को मजबूर करने लगी उसने दो तीन लड़कियों के नाम बताए की वह भी आएंगी हम लोग एक रेस्टोरेंट में चाय पार्टी करेंगे मेरी दोस्त ने केक बनने को ऑर्डर किया है प्लीज तुम भी चलो ।

मैने साथ रहते हुए नही जाना ठीक नही समझा मैं उसके साथ चली गई उसकी दो लड़कियां दोस्त थी और तीनों के ब्वॉय फ्रेंड थे ,मुझे बहुत अजीब लग रहा था ,मुझे डर लग रहा था की कहीं मेरे घर का या पास का कोई मुझे देखेगा और पापा से कहेगा की मैं यहां मस्ती कर रही हूं तो क्या होगा ?

मेरे सिर में बहुत दर्द है मुझे उलटी आ रही है मुझे रूम पर जाना है ,रेस्टोरेंट से निकल कर एक ऑटो रोका और मैं उनसे बचकर अपने कमरे पर आ गई ।

हॉस्टल के नियम सख्त थे उसके दोस्त कमरे मे नही आ सकते थे वह मुझे साथ चलने को कहती तो मैने उसे साफ कह दिया मेरे पापा अम्मा ने मुझे पढ़ने बहुत विश्वास के साथ भेजा है,कोई घूमने मौज करने नही ।

किसी तरह एक साल बीता अगली साल हमारी तरह की लड़की के रूम में जगह खाली होने पर मैं उसके साथ रहने लगी ।अनीता हमारी संस्कृति और सोच की लड़की थी हैं दोनो का उद्देश्य भी एक था

मेहनत और लगन से हमारा लक्ष्य पूरा हुआ था आज अम्मा और पापा के आखों में खुशी के आंसू थे ।

ट्रेन ड्राइवर का वेतन एक औसत सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तुलना में कही अधिक है। इनका वेतन प्रति महीने 1 लाख से अधिक होता है।
08/06/2024

ट्रेन ड्राइवर का वेतन एक औसत सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तुलना में कही अधिक है। इनका वेतन प्रति महीने 1 लाख से अधिक होता है।

Whatsapp -> https://ltl.sh/EsxxPxQi7Q (+919321976767)Catalog Name:*Graceful Attractive Hand Towels*Material: CottonPrint...
06/05/2024

Whatsapp -> https://ltl.sh/EsxxPxQi7Q (+919321976767)
Catalog Name:*Graceful Attractive Hand Towels*
Material: Cotton
Print or Pattern Type: Quirky
Net Quantity (N): 3
Sizes:
Free Size (Length Size: 40 in, Width Size: 30 in)

Dispatch: 1 Day

*Proof of Safe Delivery! Click to know on Safety Standards of Delivery Partners- https://ltl.sh/y_nZrAV3
Price 259

Whatsapp -> https://ltl.sh/EsxxO62E1A (+919321976767)Catalog Name:*Gorgeous Alluring Hand Towels*Material: CottonNet Qua...
06/05/2024

Whatsapp -> https://ltl.sh/EsxxO62E1A (+919321976767)
Catalog Name:*Gorgeous Alluring Hand Towels*
Material: Cotton
Net Quantity (N): 3
Print or Pattern Type: Abstrast
Ideal For: Unisex
Set: Towel Set
Type: Hand Towel
Dispatch: 1 Day

*Proof of Safe Delivery! Click to know on Safety Standards of Delivery Partners- https://ltl.sh/y_nZrAV3

06/05/2024
सुबह-सुबह नहा धोकर काम पर जाने के लिए तैयार होते हुए बीवी से कहा जल्दी लंच पैक कर दो, ऑफिस के लिए देर हो रही है...तभी बे...
20/04/2024

सुबह-सुबह नहा धोकर काम पर जाने के लिए तैयार होते हुए बीवी से कहा जल्दी लंच पैक कर दो, ऑफिस के लिए देर हो रही है...


तभी बेटे ने कहा पापा मुझे कल फीस जमा

करनी है...


ठीक है बेटा शाम को आकर देता हूँ...


बेटी ने कहा पापा स्कूल में फैंसी ड्रेस कंपीटिशन है, मुझे 'परी' की ड्रेस चाहिए...


ओके बेबी, शाम को लेता आऊंगा...


पिता जी बोले, बेटा मेरे चश्मे का काँच टूट गया है, इसे

लगवा देना और तेरी माँ की आँखों के ऑपरेशन की तारीख मिल गई है,अस्पताल में भर्ती कराना है...


जी पिता जी मैं शाम को ऑफिस से एडवांस

ले लूँगा...


जाते जाते पत्नी जी ने कहा, घर का राशन खत्म होने वाला है, किराने वाले को यह लिस्ट देते जाना और शाम

को लेते आना...


अच्छा जी अब मैं चलता हूँ, यह कह वो घर से

चल दिया,


रास्ते में स्कूटर पंचर हो गया और ऑफिस पहुचने में

देर हो गई...


ऑफिस पहुचने पर बाॅस ने घड़ी की ओर

देखा, और कहा आइए सर...


वो समझ गया देरी की वजह से बाॅस नाराज

हैं,


खैर सोचा आज जल्दी जल्दी काम निपटा लेता हूँ, ताकि बाॅस खुश हो जाये क्योंकि शाम एडवांस भी लेना है...


काम को जल्द निपटाने के चक्कर में एक गलती हो

गई, बाॅस खुश होने की जगह और नाराज हो गए,


एडवांस मांगने की हिम्मत ही नहीं हुई...


खैर दिन बीता छुट्टी हुई,


अब घर पर क्या कहूंगा, यह सोचकर परेशान हो गया,


तभी साथी कर्मचारी ने कहा, क्या बात है यार बहुत परेशान दिख रहे हो,


उसने सारी व्यथा अपने दोस्त को बताई और कहा यार दिल करता है, रेल कि पटरी पर लेट जाऊं...


दोस्त ने कहा चल परेशान ना हो , मेरे साथ चल, दोनों ने साथ पी और अपने अपने घरों की ओर चल दिए,


घर पहुंच कर उसने कहा कि एडवांस नहीं

मिल पाया.



फिर घर में कुछ ये हुआ........


बेटा माँ से: मम्मी पापा ने शराब पी , पर मुझे

फीस नहीं दी...


बेटी: मेरी ड्रेस नहीं लाये और शराब पी ली...


पिता: चश्मा लाने के लिए पैसे नहीं थे और शराब के

लिए थे...


माँ: भूल गया है तू, अपना पेट काट काट कर पाला था तूझे, शराब के लिए पैसे है, माँ के लिए नही.


और अंत में पत्नी ने कहा, अब राशन की जगह हमे भी शराब ही पिला दो...

-------------------------------

कुछ जानने योग्य तथ्य...


पिता का चश्मा 500Rs


माँ का ऑपरेशन 3000Rs


बेटे की फीस 700Rs


बेटी की ड्रेस 1200Rs


घर का राशन 5000Rs


शराब जो कि दोस्त ने पिलाई 300 रूपये,



क्या इन 300 रूपयों से घर की जरूरतें पूरी

हो जाती ???


एक मर्द अपने परिवार के लिए हर संभव प्रयास करता है,



उसे प्यार और सम्मान दे,


उसकी मजबूरियों को समझने की कोशिश

करें...!!
Post अच्छी लगे तो
Like और Comment जरुर करें।
यदि पोस्ट पसन्द आये तो Follow & Share अवश्य करें।

Address

Mumbai
410208

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Cheap and Best Shopping posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Cheap and Best Shopping:

Share