Pushti Saaj Shringar

Pushti Saaj Shringar The Ultimate Solution to Customise SAAJ Making

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल नवमीFriday, 21 August 2026नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दलालजी महाराज कृत सप्तस्व...
21/08/2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल नवमी
Friday, 21 August 2026

नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दलालजी महाराज कृत सप्तस्वरूपोत्सव

श्रीजी को नियम से केसरी रंग की गोल-काछनी (मोर-काछनी), श्रीमस्तक पर गुलाबी गौ-कर्ण एवं स्वर्ण का रत्नजड़ित घेरा धराया जाता है. यह वस्त्र और श्रृंगार वर्ष में केवल आज के दिन ही धराये जाते हैं.

श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मूँग की दाल की मोहनथाल एवं दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

विहरत सातो रूप धरे l
सदा प्रकट श्रीवल्लभनंदन द्विज कुल भक्ति वरे ll 1 ll
श्रीगिरिधर राजाधिराज व्रजराज उध्योत करे l
श्रीगोविन्द इंदु जग किरणन सींचन सुधा करे ll 2 ll
श्रीबालकृष्ण लोचन विशाल देख मन्मथ कोटि डरे l
गुण लावण्य दयाल करुणानिधि गोकुलनाथ भरे ll 3 ll
श्रीरघुपति यदुपति घनसांवल मुनिजन शरण परे l
‘छीतस्वामी’ गिरिधर श्रीविट्ठल तिहि भज अखिल तरे ll 4 ll

साज – श्रीजी में आज श्याम रंग की गौस्वामी बालकों तथा गायों के सुन्दर चित्रांकन और रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है जिसमें श्रीजी के दोनों ओर सभी सप्तस्वरूप विराजित हैं और पास में उनके आचार्यचरण सेवा में उपस्थित हैं ऐसा सुन्दर चित्रांकन है

गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज केसरी रंग की मलमल की सूथन, गोल-काछनी (मोर काछनी) तथा रास-पटका धराया जाता है. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरे की प्रधानता से मोती, माणक, पन्ना एवं जड़ाव सोने के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी रंग की जडाऊ टिपारे की टोपी के ऊपर लाल रंग के सुनहरी किनारी वाले गौकर्ण, स्वर्ण का रत्नजड़ित घेरा एवं बायीं ओर मोती की चोटी धरायी जाती है. श्रीकर्ण में हीरा के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.नीचे सात पदक ऊपर हीरा, पन्ना, माणक, मोती के हार व दुलडा धराया जाता हैं. दो पाटन वाले हार धराये जाते हैं.
सफेद एवं पीले पुष्पों के रंग-बिरंगी थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरे के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.पट उत्सव का एवं गोटी सोना की बाघ-बकरी की आती हैं.
आरसी शृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोना की डांडी की आती हैं.

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल अष्टमीThursday,20 August 2026आज के हिंडोलना के दर्शनचंदन का हिंडोलासंध्या-आरती श्री मदनमोहन ...
20/08/2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल अष्टमी
Thursday,20 August 2026

आज के हिंडोलना के दर्शन

चंदन का हिंडोला

संध्या-आरती श्री मदनमोहन जी चंदन के हिंडोलने में झूलते हैं. श्री मदनमोहनजी के सभी वस्त्र एवं श्रृंगार श्रीजी को धराये आज के श्रृंगार जैसे ही होते हैं. श्री बालकृष्ण लालजी उनकी गोदी में विराजित होकर झूलते हैं.

कीर्तन हिंडोला– (राग-मल्हार)

नटवर सुरंग हिंडोरे झूले माई ।
धरत चरण पटुली पर मोहन करसो परसि कर जोरे ।।१।।
पीत वसन वनमाल विराजत सारी सुरंग ही बोरे ।
सजल श्यामघन कनक बरन तन मानिनी मानही तोरे ।।२।।
जोरी अविचल तेज़ विराजत कुंडल वरजु हिलोरे ।
गोपालदास प्रभु गिरिधर राधा प्रीति निबाहत ओरे ।।३।।

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल अष्टमीThursday,20 August 2026 बगीचा उत्सव (श्री नवनीतप्रियाजी)विशेष – आज श्री नवनीतप्रियाजी ...
20/08/2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल अष्टमी
Thursday,20 August 2026

बगीचा उत्सव (श्री नवनीतप्रियाजी)

विशेष – आज श्री नवनीतप्रियाजी में बगीचा उत्सव होगा. आज के दिन प्रभु श्री नवनीतप्रियाजी श्रीजी मंदिर में स्थित श्री महाप्रभुजी की बैठक वाले बगीचे में विहार एवं झूलने को पधारते हैं.
व्रज में नन्दगाँव के पास नंदरायजी का बगीचा है जहाँ नंदकुमार खेलने एवं झूलने के लिए पधारते थे इस भाव से आज बैठक के बगीचे को नंदरायजी का बगीचा मानकर श्री नवनीतप्रियाजी वहां झूलने पधारते हैं.
श्री नवनीतप्रियाजी वर्ष में दो बार (आज के दिन व फाल्गुन शुक्ल अष्टमी) के दिन महाप्रभु की बैठक स्थित इस बगीचे में पधारते हैं.
आज द्वितीय गृह पिठाधीश्वर श्री कृष्णरायजी (1857) का प्राकट्योंत्सव
होने से श्रीजी को धराये जाने वाले आज के वस्त्र द्वितीय गृहाधीश्वर प्रभु श्री विट्ठलनाथजी के घर (मंदिर) से सिद्ध हो कर आते हैं. वस्त्रों के साथ श्रीजी और श्री नवनीतप्रियाजी के भोग हेतु बूंदी के लड्डुओं की छाब भी वहीँ से आती है.

नित्यलीलास्थ श्री कृष्णरायजी से जुड़ा एक प्रसंग मुझे स्मरण है जिसे मैं आपसे साझा करना चाहूँगा.
निधि स्वरुप विराजित हैं तो वैसे भी घर का वैभव बढ़ ही जाता है परन्तु तब प्रभु श्री विट्ठलनाथजी की कृपा से द्वितीय गृह अत्यन्त वैभवपूर्ण स्वरुप में था और तत्समय श्रीजी में अत्यधिक ऋण हो गया.
जब आपको यह ज्ञात हुआ तब आपने अपना अहोभाग्य मान कर प्रभु सुखार्थ अपना द्रव्य समर्पित किया और प्रधान पीठ को ऋणमुक्त कराया.

आप द्वारा की गयी इस अद्भुत सेवा के बदले में श्रीजी कृपा से आपको कार्तिक शुक्ल नवमी (अक्षय नवमी) की श्रीजी की की पूरे दिन की सेवा और श्रृंगार का अधिकार प्राप्त हुआ था.
आज भी प्रभु श्री गोवर्धनधरण द्वितीय गृह के बालकों के हस्त से अक्षय नवमी के दिन की सेवा अंगीकार करते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : गोड मल्हार)

माईरी घन मृदंग रसभेदसो बाजत नाचत चपला चंचल गति l
कोकिला अलापत पपैया उरपलेत मोर सुघर सूर साजत ll 1 ll
दादुर तालधार ध्वनि सुनियत रुनझुन रुनझुन नुपूर बाजत l
‘तानसेन’ के प्रभु तुम बहु नायक कुंज महेल दोउ राजत ll 2 ll

साज – वर्षाऋतु में बादलों की घटा एवं बिजली की चमक के मध्य यमुनाजी के किनारे कुंज में एक ओर श्री ठाकुरजी एवं दूसरी ओर स्वामिनीजी को व्रजभक्त झूला झुला रहे हैं. प्रभु की पीठिका के आसपास सोने के हिंडोलने का सुन्दर भावात्मक चित्रांकन किया है जिसमें ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभु स्वर्ण हिंडोलना में झूल रहे हों, ऐसे सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई आज श्रीजी में धरायी जाती है.
गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को पीले रंग की मलमल की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, काछनी एवं रास पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र श्वेत डोरीया के धराये जाते है.

श्रृंगार - प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. सर्वआभरण फ़ीरोज़ा के धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर सिलमा सितारा का मुकुट व टोपी एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में फ़ीरोज़ा के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. चोटीजी मीना की आती हैं.श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.
पीले पुष्पों के रंग-बिरंगी थाग वाली दो सुन्दर मालाजी एवं कमल के फूल की मालाजी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी,
भाभीजी वाले वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट पिला एवं गोटी मोर वाली धराई जाती हैं.

देखो माई भीज़त गिरिधरधारी,
मोर मुकुट तन श्याम पीत पट घनदामिनी अनुहारी.

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल सप्तमीWednesday, 19 August 2026आज के हिंडोलना के दर्शन आज मणिकोठा व डोल-तिबारी में केल स्तंभ...
19/08/2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल सप्तमी
Wednesday, 19 August 2026

आज के हिंडोलना के दर्शन

आज मणिकोठा व डोल-तिबारी में केल स्तंभों, चंदन की पत्तियों और विविध प्रकार के पुष्पों से बगीचा सिद्ध किया जाता है. श्री मदनमोहनजी संध्या-आरती में बगीचे में हरे बग़ीचे के हिंडोलने में झूलते हैं.

तुलसी समर्पित की जाती है. धूप, दीप, शंखोदक किये जाते हैं.

हिंडोलना में आज छः बीड़ा की सिकोरी धरायी जाते हैं.
आज हिंडोलना चार की जगह आठ कीर्तन गायें जाते हैं.
बगीचा के उत्सव भोग में श्रीजी को संध्या-आरती में उपरेटा (सूखी चन्द्रकला के ऊपर बूरा डालकर बनाया जाने वाली सामग्री), केशर युक्त घेवर, मूंगदाल के गुंजा (समौसे), कचौरी, दूधघर में सिद्ध पेड़ा-बरफी, दूधपूड़ी (मलाईपूड़ी), केशरयुक्त बासोंदी, जीरा युक्त दही, पतली पूड़ी, खीर, सूखे मेवे की बीज-चालनी, विविध प्रकार के संदाना (आचार), फलफूल, शीतल आदि अरोगाये जाते हैं.

कीर्तन हिंडोला– (राग-मालव)

फूलन को हिंडोरो फूलन की डोरी फूले नंदलाल फूली नवल किशोरी ।
फूलन खंभ दोऊ डांडी फूलन की पटुली बैठे एक जोरी ।।१।।
फूले सघन बन फूले नवकुंजन फूली फूली यमुना चढत हिलोरी ।
चतुर्भुज प्रभु फूले निपट कालिंदी फूले फूली भामिनी देत चकोरी ।।२।।

फूलन को हिंडोरो फूलन की डोरी फूले नंदलाल फूली नवल किशोरी, फूलन खंभ दोऊ डांडी फूलन की पटुली बैठे एक जोरी.

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल सप्तमीWednesday, 19 August 2026श्रीजी में बगीचा उत्सवआज धनक (मोढडाभात) के लहरिया के  सुथन, क...
19/08/2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण शुक्ल सप्तमी
Wednesday, 19 August 2026

श्रीजी में बगीचा उत्सव

आज धनक (मोढडाभात) के लहरिया के सुथन, काछनी व वन-विहार का भाव से प्रभु को गाती का पटका धराया जायेगा.

आज गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मनोहर (इलायची, जलेबी) के लड्डू एवं दूधघर में सिद्ध केशरयुक्त बासोंदी (रबड़ी) की हांड़ी अरोगायी जाती है.
राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है
व सखडी में मीठी सेव, केसर युक्त पेठा अरोगाया जाता हैं.

कल श्रावण शुक्ल अष्टमी को श्री नवनीतप्रियाजी महाप्रभुजी की बैठक में स्थित बगीचे में पधारेंगे.
श्रीजी को भी मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जायेगा. परन्तु कल और आज में यह अंतर होगा कि कल रास के भाव का रास-पटका प्रभु को धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

ऐरी यह नागर नंदलाल कुंवर मोरन संग नाचे l
कटि तटपट किंकिणी कलनूपुर रुन झुन करे नृत्य करत चपल चरण पात घात सांचे ll 1 ll
उदित मुदित सघन गगन घोरत घन दे दे भेद कोकिला कलगान करत पंचम स्वर वांचे l
‘छीतस्वामी’ गोवर्धननाथ साथ विरहत वर विलास वृंदावन प्रेमवास यांचे ll 2 ll

साज – वर्षा ऋतु में बादलों की घटा छायी हुई है. इस समय कुंज के द्वार पर नृत्य करते मयूरों के चित्रांकन वाली पिछवाई आज श्रीजी में धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज लाल एवं पीले रंग के धनक (मोढडाभात) के लहरिया की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, काछनी एवं गाती का पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र सफेद डोरीया के धराये जाते है.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरा की प्रमुखता, मोती, माणक, पन्ना एवं जड़ाव सोने के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर सोने का रत्नजड़ित, नृत्यरत मयूरों की सज्जा वाला मुकुट एवं मुकुट पर माणक का सिरपेंच एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में हीरा के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
आज नीचे पदक ऊपर हार माला धराए जाते हैं.
दो पाटन वाले हार धराए जाते हैं.
श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.हास,त्रवल नहीं धराए जाते हैं.हीरा की बग्घी धरायी जाती हैं.
आज सभी समा में पुष्पों की माला एक एक ही धरायी जाती है.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का गोटी नाचते मोर की आती है.
आरसी श्रृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

जहाँ तहाँ बोलत मोर सुहाये,
सावन रमण भवन वृंदावन घोर घोर घन आये.

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल षष्ठी Tuesday, 17 August 2026रूपहरी किनारी के धोरा के गुलाबी सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगा...
18/08/2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल षष्ठी
Tuesday, 17 August 2026

रूपहरी किनारी के धोरा के गुलाबी सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार

श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी जाति या धर्म से हो.
इसी भाव से आज ठाकुर जी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था.

ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में लगभग छह बार धराया जाता है यद्यपि इस श्रृंगार को धराने के दिन निश्चित नहीं हैं.

ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांईजी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी सोना के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।
देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत
किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।
सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।
हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,
महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज - श्रीजी में आज गुलाबी रंग की मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज गुलाबी रंग के धोरा का सुथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र मेघस्याम रंग के होते हैं.

शृंगार - ठाकुरजी को आज मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण फ़िरोज़ा के छेड़ान के धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर गुलाबी फेंटा का साज धराया जाता है जिसमें गुलाबी रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, बीच की चंद्रिका, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, फ़िरोज़ी मीना के वेणुजी और दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट गुलाबी रंग का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल पंचमीMonday, 17 August 2026आज के हिंडोलना के दर्शन मोती के काम का हिंडोलासंध्या-आरती में श्...
17/08/2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल पंचमी
Monday, 17 August 2026

आज के हिंडोलना के दर्शन

मोती के काम का हिंडोला

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी वस्त्र एवं ज़री के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

कीर्तन हिंडोला– (राग-यमन)
रमक झमक झुलन मे ठमक मेह आयो,नहि सुरझत बातनते ।
नव पल्लव संकुलित फूलफल वरनवरन
दु्मलतानतर ठाडे,भयो है बचाव पातनते ।।१।।
मंदमद झुलवत खंभनलगि ओढ़े अंबर निज गातनते ।
कृष्णदास गिरधारी दोऊ भीजयो सारी भ्रमरनकी भीर भारी
टारी न टरत कयो हु प्रकटी छबीली छटा निजगातनते ।।२।।

नीलांबर पहरे तन गोर झूलत सुरंग हिंडोरे, मनि मानिक हीरा रतन मुक्ताफल शोभित है तन गोरे.

व्रज - विस ८३ श्रावण शुक्ल चतुर्थीSunday, 16 August 2026आज के हिंडोलना के दर्शन सफेद कमल के फूल का हिंडोलासंध्या-आरती मे...
16/08/2026

व्रज - विस ८३ श्रावण शुक्ल चतुर्थी
Sunday, 16 August 2026

आज के हिंडोलना के दर्शन

सफेद कमल के फूल का हिंडोला
संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी सफेद कमल के फूल के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

कीर्तन हिंडोला– (राग-यमन)
रमक झमक झुलन मे ठमक मेह आयो,नहि सुरझत बातनते ।
नव पल्लव संकुलित फूलफल वरनवरन
दु्मलतानतर ठाडे,भयो है बचाव पातनते ।।१।।
मंदमद झुलवत खंभनलगि ओढ़े अंबर निज गातनते ।
कृष्णदास गिरधारी दोऊ भीजयो सारी भ्रमरनकी भीर भारी
टारी न टरत कयो हु प्रकटी छबीली छटा निजगातनते ।।२।।

व्रज - विस ८३ श्रावण शुक्ल चतुर्थीSunday, 16 August 2026 विशेष – आज श्रीजी को नियम का दोहरा मल्लकाछ-टिपारा का श्रृंगार ध...
16/08/2026

व्रज - विस ८३ श्रावण शुक्ल चतुर्थी
Sunday, 16 August 2026

विशेष – आज श्रीजी को नियम का दोहरा मल्लकाछ-टिपारा का श्रृंगार धराया जाता है. मल्लकाछ शब्द दो शब्दों (मल्ल एवं कच्छ) से बना है. ये एक विशेष परिधान है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं. यह श्रृंगार चंचल, चपल, पराक्रमी प्रभु को वीर-रस की भावना से धराया जाता है.

आज की सेवा श्री मन्मथमोदाजी के भाव से होती है अतः उपरोक्त श्रृंगार धराया जाता है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

आज सखी देख कमलदल नैन l
शीश टिपारो जरद सुनेरी बाजत मधुरे बैन ll 1 ll
कतरा दोय मध्य चंद्रिका काछ सुनेरी रैन l
दादुर मोर पपैया बोले मोर मन भयो चैन ll 2 ll
नाचत मोर श्याम के आगे चलत चाल गज गैन l
श्रीविट्ठल गिरिधर पिय निरखत लज्जित भयो मैन ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में श्री गिरिराज-धारण की लीला के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. पिछवाई में श्री कृष्ण एवं बलदेव जी मल्लकाछ टिपारा के श्रृंगार में हैं एवं ग्वाल-बाल व गायें संग खड़ी हैं. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज एक आगे का पटका लाल पिली चूंदड़ी का एवं मल्लकाछ तथा दूसरा कंदराजी का स्याम सफ़ेद चूंदड़ी का पटका तथा मल्लकाछ धराया जाता है. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज श्रीकंठ का शृंगार छेड़ान (कमर तक) का एवं बाक़ी शृंगार भारी धराया जाता है. हरे मीना के सर्वआभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर टिपारा का साज धराया जाता है जिसमें लाल रंग की एकदानी चूंदड़ी के टिपारा के ऊपर मध्य में मोरशिखा, दोनों ओर दोहरे कतरा और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. चोटी नहीं धरायी जाती है. श्रीकंठ में कमल माला धरायी जाती है. गुलाबी एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, स्वर्ण के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं. पट लाल व गोटी चांदी की बाघ-बकरी की आती है.

व्रज - श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)आज के हिंडोलना के दर्शन कलकत्ती कांच का हिंडोलापारंपरिक रूप से श्रीजी में हिंडोल...
15/08/2026

व्रज - श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)

आज के हिंडोलना के दर्शन

कलकत्ती कांच का हिंडोला

पारंपरिक रूप से श्रीजी में हिंडोलना रोपण डोल तिबारी में ही होता था परन्तु वर्ष 2017 में पूज्य तिलकायत महाराज ने प्रभु सुख व वैष्णवों, दर्शनार्थियों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए कमल चौक में भी हिंडोलना रोपण की आज्ञा दी.
अब श्रावण मास के सभी दिनों में प्रतिदिन श्री मदनमोहनजी भीतर के सेवकों की उपस्थिति में पहले डोल तिबारी के हिंडोलना में कुछ समय झूलते हैं व तदुपरांत कमल चौक के हिंडोलना में विराजित होकर वैष्णवों पर आनंद रसवर्षा करते हैं.

नियम के सभी हिंडोलना डोल तिबारी में होते हैं व कमल चौक में मनोरथ के भाव के हिंडोलना होते हैं.

आज डोल तिबारी में नियम का कलकत्ती कांच के काम का हिंडोला होगा यद्यपि कमल चौक में उपलब्धता के आधार पर अन्य हिंडोलना के दर्शन ही वैष्णवों को होंगे.

संध्या आरती में कलकत्ती कांच के काम का हिंडोलना होता है जिसमें श्री मदनमोहन जी झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

रात्रि (शयन) के अनोसर में प्रिया-प्रीतम के भाव से डोल तिबारी में विशिष्ट सज्जा होती है जिसमें डोलतिबारी के ध्रुवबारी वाले छोर पर बंगला व अन्य भावभावित सज्जा की जाती है.
दूधघर में सिद्ध बादाम की बर्फी आदि कुछ सामग्रियां अरोगायी जाती हैं.

अगले दिन शंखनाद के उपरांत यह सज्जा बड़ीकर (हटा) ली जाती है.

कीर्तन हिंडोला– (राग-मल्हार)

नई ऋतु सावन तीज सुहाई हिंडोरे झूलन आई ।
कुंज कुंज तें निकसी हरिभूमि अरुण वरन मानो,इन्द्र वधूसी श्यामाजू रहसि बुलाई ।।१।।
अपने अपने मेल सबै गावत,राग मल्हार रूचिर मन भाई ।
हरिदास के स्वामी श्यामा कुंज बिहारी आपुन रिझ रिझाईं ।।२।।

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