10/11/2022
आज भी जब कभी सुपरमार्केट में रखे अलग-अलग तरह के पापड़ पर नजर पड़ती है तो वही यादें ताजा हो जाती हैं। वहीं आंखें जब लिज्जत पापड़ को देखती हैं तो उनमें विश्वास और महिला सशक्तिकरण का भाव झलकता है।
लिज्जत पापड़ की शुरुआत 1959 में मुंबई में रहने वाली जसवंती बेन और उनकी छह सहेलियों ने मिलकर की थी। इसे शुरू करने के पीछे इन सात महिलाओं का मकसद इंडस्ट्री शुरू करना या ज्यादा पैसा कमाना नहीं था। इसके जरिए वो अपने परिवार के खर्च में हाथ बंटाना चाहती थी। चूंकि ये महिलाएं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं इसलिए घर से बाहर जाकर काम करने में भी इन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पैसों के लिए ये सातों महिलाएं सर्वेंट ऑफ इंडिया सोसायटी के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता छगनलाल पारेख के पास पहुंचीं, जिन्होंने इन्हें 80 रुपये उधार दे दिए। उन रुपयों से महिलाओं ने पापड़ बनाने की एक मशीन खरीद ली और साथ में पापड़ बनाने के लिए जरूरी सामान भी खरीदा। लिज्जत पापड़ के बिज़नेस ने उस समय में उन्हें ₹6196 की वार्षिक आय दी थी और जल्दी ही, देखते-देखते इससे हजारों महिलाएं जुड़ती चली गई। आज इनकी कंपनी का टर्नओवर 1600 करोड़ है।