Banaras Mall

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13/08/2024

*बेरोजगारी बहुत है !!*

मेम साहब : हेलो हेलो ! नल की टोंटी लीक कर रही है प्लम्बर भैया ! इसे बदल दो आकर प्लीज।

प्लम्बर : जी मेम साहब ! ठीक है । पर अभी समय नहीं है । परसों बदल जाऊंगा ।

परसों :
मेम साहब : भैया तुम आये नहीं । आज टोंटी बदलने को कहा था तुमने ।

प्लम्बर : मेम आ रहा हूँ । शाम तक आपका काम हो जाएगा।

शाम को प्लम्बर : मेम, आज नहीं आ पा रहा । कल अवश्य आऊंगा ।

कल :
प्लम्बर : ये लो मेम हो गया आपका काम ।

मेम साहब : ठीक है भैया । थैंक्स । कितने देने हैं !

प्लम्बर : 280 की टोंटी, 20 का टेप, 300, और लेबर के 400 रुपये । टोटल ₹700 दीजिये मेम ।

मेम साहब : अरे भैया ! 700 तो बहुत ज्यादा हैं। और आधे घंटे के ₹400 लेबर कुछ ज्यादा नहीं लगा रहे आप?

प्लम्बर : नहीं मेम दूसरी जगह चलता काम छोड़ कर आया हूँ । घिस घिस मत करो । ₹700 निकालो जल्दी । दूसरी जगह जाना है । पहले पूछ लिया करो । *आदमी हैं नहीं ।* अकेले काम करना पड़ता है ।

मेम साहब : ठीक है । ये लो भैया । पर तुम्हारे रेट बहुत ज्यादा हैं ।

प्लम्बर : अरे मेम ! आपको क्या पता ! मरने की फुरसत नहीं है। नमस्ते ।

आपने देखा, एक प्लम्बर का किस्सा ।

आदमी हैं नहीं और बेरोजगारी बहुत है । समझे !!

अब और देखिए -

ज्योति : आंटी ! कल से बहू और बच्चे की मालिश के ₹300 घंटा लूंगी ।

आंटी : क्यों ज्योति ! अभी तक तो 200 लेती थी ।

ज्योति : आंटी, फुरसत नहीं है । दो घर और भी जाना पड़ेगा कल से ।

आंटी : तो दो घर जाने से रुपये बढ़ाने का क्या मतलब है ? बल्कि तुझे तो 200 के हिसाब से और 400 मिलेंगे ।

ज्योति : देख लो आंटी । उनसे भी ₹300 के हिसाब से तय हुए हैं । आपको करानी है, तो ठीक नहीं तो कल 1 तारीख है मैं नहीं आऊंगी । किसी और से करा लेना ।

आंटी : अरे ! अब बीच में किसे ढूंढूंगी ? तू ही आ । जो कहेगी, देंगे ।

ज्योति : ठीक है । अब तक का हिसाब कर दो । कल से नया ₹300 के हिसाब से चालू हो जाएगा ।

दुखी मन से आंटी : ये ले 4 दिन के बाकी 800 । कल टाइम से आना ।

आपने देखा । एक घंटे के 300 । पांच जगह भी गयी, तो 1500 । मतलब 1500x25 दिन =₹ 37,500 महीना ।

बेरोजगारी बहुत है ।

पर है कहाँ है ये बेरोजगारी ?

अब आप ही बताइये बेरोजगारी कहां है ?

मुझे दो स्टाफ चाहिए आफिस के लिए । अरोड़ा जी को एक लड़का चाहिए दुकान के लिए । गुप्ताजी को बाई चाहिए । मधु भाभी को झाड़ू पोंछे वाली चाहिए । विकास को एक कारपेंटर चाहिए । प्रमोद को स्टील का गेट बनवाना है । शर्मा जी को टाइल लगवानी है दुकान पर !!

क्या करें - कहाँ जाएं ! 2-3 महीने से सब लोग ढूंढ रहे हैं *आदमी ।*

पर सुनने में आता है, बेरोजगारी बहुत है ।

भैया किधर है ये ? कौन है बेरोजगार ? हमें दिखाओ तो !

हाँ मैं दिखाता हूँ । देखिए ।

आओ मोहन । दुकान पर काम करोगे ?

मोहन : जी करूंगा बाबू जी ।

बाबू जी : तो आओ कल से सुबह 9 बजे ।

मोहन : न बाबूजी । सुबह 9 नहीं साढ़े दस तक आ पाऊंगा ।

बाबूजी : ठीक है, मैं खोल लूंगा दुकान तुम साढ़े दस आओ ।

मोहन : बाबूजी, पगार कितनी दोगे ?

बाबूजी : अरे पहले जो लड़का था, उसे ₹9000 देता था । वही दे दूंगा । या जो तू कहेगा ।

मोहन : बाबूजी रुपये लूंगा पूरे 15 हजार ।

बाबू जी : क्यों कहीं और मिल रहे हैं क्या ?

मोहन : नहीं । अभी तो कोई नहीं, पर ढूंढ लूंगा ।

बाबूजी : लेकिन तुमने तो अभी बताया 4 महीने से घर बैठे हो । कोई नौकरी नहीं मिली ।

मोहन : हाँ बाबूजी । पर 8-9 हजार में आजकल होता क्या है ? इसलिए काम जोड़ा नहीं अभी तक । देखूंगा । जब अच्छी पगार वाली मिलेगी, तब करूंगा नौकरी ।

समझ गए आप ।

बेरोजगारी कहां है ?

9 की करनी नहीं । 15 की मिल नहीं रही ।

सरकार है न !
राशन फ्री ।
बिजली पानी फ्री।
खाने के लिए छेत्तर बहुत हैं ।
इलाज फ्री ।
कन्या विवाह के लिए राशि ।
बच्चा पैदा हो, तो राशि आदि-आदि ।

यहां है बेरोजगारी !!

*काम वालों को आदमी नहीं और आदमियों को काम नहीं ।*

सोचिएगा अवश्य। दो शब्द लिखिये या शेयर कीजिये ताकि समाज जागरूक हो !

*🌹🙏卐 सादर जय श्री सीताराम 卐*🙏🌹

13/08/2024

_*काश्याम*_
_*'हर कृतित्व..... हर हर'*_

_*।। शुभ श्रावण मास ।।*_
समत्व ही शिवत्व है

जीवन प्रतिपल एक नईं चुनौती प्रस्तुत करता है लेकिन जो इन सभी प्रतिकूलताओं अथवा अनुकूलताओं को समभाव से स्वीकार कर लेता है, वही जीवन महान भी बन पाता है। भगवान भोलेनाथ के जीवन की यह सीख बड़ी ही अद्भुत है कि कभी दूध मिला तो प्रसन्न हो गये व कभी केवल पानी ही मिला तो भी प्रसन्न हो गये। कभी शहद अर्पित हुआ तो प्रसन्न हो गये और कभी धतूरा ही मिला तो सहर्ष स्वीकार कर लिया।

केवल एक बिल्व पत्र पर रीझने वाले भगवान भोले नाथ जीव को यह सीख देना चाहते हैं कि जरूरी नहीं कि हर बार उतना ही मिलेगा जितनी आपकी अपेक्षा है, कभी-कभी कम मिलने पर भी अथवा जो मिले, जब मिले और जितना मिले उसी में संतुष्ट रहना सीखो, तुम आशुतोष बनकर अवश्य पूजे जाओगे।

*आज का दिन शुभ मंगलमय हो।*
*।। हर हर महादेव।।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

समझ गए तो बहुत अच्छा!!!!!
01/06/2024

समझ गए तो बहुत अच्छा!!!!!

30/04/2024

✳️ *समय पुराना था* ✳️

🩸तन ढँकने को कपड़े न थे,
फिर भी लोग तन ढँकने का
प्रयास करते थे ...!
आज कपड़ों के भंडार हैं,
फिर भी तन दिखाने का
प्रयास करते हैं
*समाज सभ्य जो हो गया हैं ।*

🩸 *समय पुराना था*,
आवागमन के साधन कम थे।
फिर भी लोग परिजनों से
मिला करते थे ...!
आज आवागमन के
साधनों की भरमार है।
फिर भी लोग न मिलने के
बहाने बनाते हैं ।
*समाज सभ्य जो हो गया हैं ।*

🩸 *समय पुराना था*,
घर की बेटी,
पूरे गाँव की बेटी होती थी।
आज की बेटी पड़ोसी से ही
असुरक्षित हैं ...!
*समाज सभ्य जो हो गया हैं !*

🩸 *समय पुराना था*,
लोग नगर-मोहल्ले के बुजुर्गों
का हालचाल पूछते थे ...!
आज माँ-बाप तक को
वृद्धाश्रम में डाल देते हैं ।
*समाज सभ्य जो हो गया हैं ।*

🩸 *समय पुराना था*,
खिलौनों की कमी थी ।
फिर भी मोहल्ले भर के बच्चों
के साथ खेला करते थे ...!
आज खिलौनों की भरमार है,
पर बच्चे मोबाइल की जकड़
में बंद हैं ...!!
*समाज सभ्य जो हो* *गया हैं ।*

🩸 *समय पुराना था*,
पड़ोसी के घर मे आए
रिश्तेदार का भी पूरा
परिचय पूछ लेते थे ...!
आज तो पड़ोसी का नाम
तक नहीं जानते ...!!
*समाज सभ्य जो हो गया हैं ।*
*✍🏻 वाह रे आधुनिक एवं*
*सभ्य समाज 👌*

24/03/2024
  Kashyam Srijan Foundation "हर कृतित्व.....हर हर" # 870 750 287 5
20/01/2024


Kashyam Srijan Foundation
"हर कृतित्व.....हर हर"
# 870 750 287 5

11/12/2023

ये बॉलीवुड और सेंसरबोर्ड वाले समाज में क्या और क्यों परोस रहे हैं ?

जब से कल 'एनिमल' मूवी देख कर लौटा हूँ तब से मन खिन्न सा है। उसके सुपर हिट होने की खबरें मुझे विचलित कर रही हैं। एक ऐसी फिल्म जिसमें औरतों को पैरों की जूती समझा गया है। फिल्म के हीरो का बलिष्ठ होना, खूँखार होना, बदतमीज़ होना उसकी ख़ूबी बन गयी है। माँ का चुप रहना, आदेशों का पालन करना, बहन का पति और भाई से दबना , प्रेमिका का माचो मैन की क्रुअल छवि से प्रभावित होना,पत्नी का अपना कोई अस्तित्व ही न होना। बस शारीरिक ज़रूरत भर रह जाना। नोंचना खसोटना। क्या है ये सब?

इंसेंसिटिव होते हुए समाज में , हिंसक होते समाज में ऐसी फिल्मों का हिट होना क्या संकेत देता है।हम सब समझ रहे हैं। चिंतित करता है ये बदलता हुआ समाज और ऐसा सिनेमा।

हमारे प्रयास छोटे हैं समाज को कलुषित करती हुई सोच,एक्ट के सामने।

ख़ैर...
मन है कि मेरी ये बात सरकार तक पहुँचे ।

  Kashyam Srijan Foundation 'Creation beyond Definition' 'हर कृतित्व..... हर हर' #087075 02875
26/09/2023


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'Creation beyond Definition'
'हर कृतित्व..... हर हर'
#087075 02875

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