Laxman Prasad Brijwasi

Laxman Prasad Brijwasi "ख़ैरात" में दे आया हूँ "जीती" हुई "बाज़ी",
?

गाँव में तो डिप्रेशन को भी डिप्रेशन हो जायेगा।उम्र 25 से कम है और सुबह दौड़ने निकल जाओ तो गाँव वाले कहना शुरू कर देंगे कि...
21/09/2023

गाँव में तो डिप्रेशन को भी डिप्रेशन हो जायेगा।

उम्र 25 से कम है और सुबह दौड़ने निकल जाओ तो गाँव वाले कहना शुरू कर देंगे कि “लग रहा सिपाही की तैयारी कर रहा है " फ़र्क़ नही पड़ता आपके पास गूगल में जॉब है।

30 से ऊपर है और थोड़ा तेजी से टहलना शुरू कर दिये तो गाँव में हल्ला हो जायेगा कि “लग रहा इनको शुगर हो गया "

कम उम्र में ठीक ठाक पैसा कमाना शुरू कर दिये तो आधा गाँव ये मान लेगा कि आप कुछ दो नंबर का काम कर रहे है।

जल्दी शादी कर लिये तो “बाहर कुछ इंटरकास्ट चक्कर चल रहा होगा इसलिये बाप जल्दी कर दिये "

शादी में देर हुईं तो “दहेज़ का चक्कर बाबू भैया, दहेज़ का चक्कर, औकात से ज्यादा मांग रहे है लोग "

बिना दहेज़ का कर लिये तो “लड़का पहले से सेट था, इज़्ज़त बचाने के चक्कर में अरेंज में कन्वर्ट कर दिये लोग"

खेत के तरफ झाँकने नही जाते तो “बाप का पैसा है "

खेत गये तो “नवाबी रंग उतरने लगा है "

बाहर से मोटे होकर आये तो गाँव का कोई खलिहर ओपिनियन रखेगा “लग रहा बियर पीना सीख गया "

दुबले होकर आये तो “लग रहा सुट्टा चल रहा "

कुलमिलाकर गाँव के माहौल में बहुत मनोरंजन है इसलिये वहाँ से निकले लड़के की चमड़ी इतनी मोटी हो जाती है कि आप उसके रूम के बाहर खडे होकर गरियाइये वो या तो कान में इयरफोन ठूंस कर सो जायेगा या फिर उठकर आपको लतिया देगा लेकिन डिप्रेशन में न जायेगा।

और ज़ब गाँव से निकला लड़का बहुत उदास दिखे तो समझना कोई बड़ी त्रासदी है।

विचार करके देखे ।।दोनों ही कहने को साँप थे बेजोड़ शक्ति के परिचायक दोनों की अपनी अपनी शक्ति और अलग अलग गुणों में माहिर थ...
14/09/2023

विचार करके देखे ।।
दोनों ही कहने को साँप थे बेजोड़ शक्ति के परिचायक दोनों की अपनी अपनी शक्ति और अलग अलग गुणों में माहिर थे किंतु दोनों ही एक दूसरे को सर्वश्रेष्ठ साबित करना चाहते थे इस प्रतिस्पर्धा में दोनों का जीवन नष्ट हो गया...

एक अजगर ने किंग कोबरा का दम घोंट दिया जबकि किंग कोबरा ने उसे काट लिया। दोनों सांप मर गए, एक दम घुटने से और दूसरा जहर से।और इसी तरह लोग एक दूसरे को नष्ट कर देते हैं। मित्रताएँ ख़त्म हो जाती हैं, रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं, और परिवार ख़ुद को ख़त्म कर लेते हैं क्योंकि एक हमेशा दूसरे से बेहतर बनना चाहता है। कुछ मानसिक लोग अपनी श्रेष्ठता के अहंकार से लोगों को "गला घोंट" देते हैं, जबकि अन्य लोग गपशप, ईर्ष्या और धोखे से जहर घोलते हैं जब तक कि वे एक-दूसरे को नष्ट नहीं कर देते। प्रेम, करुणा, निष्ठा समानता मदद ही असली धर्म और अध्यात्म हैं ।।

#मैं_बड़ा_हूं_मेरे_सामने_सब_व्यर्थ_हैं 😇
🙏💐❤️

18/02/2021

"आग लगा दूंगा उन ख़्वाहिशों को
जिनकी वजह से मुझे झुकना पड़े"

रोटियाॅं उन्ही की थालियों से कूड़े तक जाती है, जिन्हें पता नहीं होता भूख क्या होती है😔😔😔
31/05/2019

रोटियाॅं उन्ही की थालियों से कूड़े तक जाती है, जिन्हें पता नहीं होता भूख क्या होती है😔😔😔

एक महिला ने क्या खूब  लिखा है कमाल लिखा है🙏________________________मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से ए...
29/05/2019

एक महिला ने क्या खूब लिखा है कमाल लिखा है🙏
________________________
मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना -

मुझे अच्छा लगता है जब कहीं बाहर जाते हुए वह मुझ से कहता है "रुको! मैं तुम्हे ले जाता हूँ या मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ "

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझ से एक कदम आगे चलता है - गैर महफूज़ और खतरनाक रास्ते पर उसके पीछे पीछे उसके छोड़े हुए क़दमों के निशान पर चलते हुए एहसास होता है उसे मेरा ख्याल खुद से ज्यादा है

मुझे अच्छा लगता है जब गहराई से ऊपर चढ़ते और ऊंचाई से ढलान की तरफ जाते हुए वह मुड़ मुड़ कर मुझे चढ़ने और उतरने में मदद देने के लिए बार बार अपना हाथ बढ़ाता है -
मुझे अच्छा लगता है जब किसी सफर पर जाते और वापस आते हुए सामान का सारा बोझ वह अपने दोनों कंधों और सर पर बिना हिचक किये खुद ही बढ़ कर उठा लेता है - और अक्सर वज़नी चीजों को दूसरी जगह रखते वक़्त उसका यह कहना कि "तुम छोड़ दो यह मेरा काम है "-

मुझे अच्छा लगता है जब वह मेरी वजह से शर्द मौसम में सवारी गाड़ी का इंतज़ार करने के लिए खुद स्टेशन पे इंतजार करता है -
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे ज़रूरत की हर चीज़ घर पर ही मुहैय्या कर देता है ताकि मुझे घर की जिम्मेदारियों के साथ साथ बाहर जाने की दिक़्क़त ना उठानी पड़े और लोगों के नामुनासिब रावैय्यों का सामना ना करना पड़े -

मुझे बहोत अच्छा लगता है जब रात की खनकी में मेरे साथ आसमान पर तारे गिनते हुए वह मुझे ढंड लग जाने के डर से अपना कोट उतार कर मेरे कन्धों पर डाल देता है -

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे मेरे सारे गम आंसुओं में बहाने के लिए अपना मज़बूत कंधा पेश करता है और हर कदम पर अपने साथ होने का यकीन दिलाता है -

मुझे अच्छा लगता है जब वह खराब हालात में मुझे अपनी जिम्मेदारी मान कर सहारा देने केलिए मेरे आगे ढाल की तरह खड़ा हो जाता है और कहता है " डरो मत मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा" -

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे गैर नज़रों से महफूज़ रहने के लिए समझाया करता है और अपना हक जताते हुए कहता है कि "तुम सिर्फ मेरी हो " -

लेकिन अफसोस हम में से अक्सर लड़कियां इन तमाम खुशगवार अहसास को महज मर्द से बराबरी का मुकाबला करने की वजह से खो देती हैं

फिर ۔۔۔۔۔۔۔۔
जब मर्द यह मान लेता है कि औरत उस से कम नहीं तब वह उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना छोड़ देता है - तब ऐसे खूबसूरत लम्हात एक एक करके ज़िन्दगी से कम होते चले जाते हैं , और फिर ज़िन्दगी बे रंग और बेमतलब हो कर अपनी खुशीया खो देती है

मुक़ाबला आधुनिकता की इस दौड़ से निकल कर अपनी ज़िंदगी के ऐसे हसीन लम्हो का अहसास कर लीजिए .. .. .
🌹 🙏🌹 🌺 ❤ 🌺 😊 💖

पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ फेंका, सैंडिल का एक सिरा प...
27/05/2019

पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।

मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहीन समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता।

लड़के ने लड़की के बारे में और लड़की ने लड़के के बारे में कई असुविधाजनक बातें कही।

मुकदमा दर्ज कराया गया। पति ने पत्नी की चरित्रहीनता का तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। छह साल तक शादीशुदा जीवन बीताने और एक बच्ची के माता-पिता होने के बाद आज दोनों में तलाक हो गया।

पति-पत्नी के हाथ में तलाक के कागज़ों की प्रति थी।
दोनों चुप थे, दोनों शांत, दोनों निर्विकार।
मुकदमा दो साल तक चला था।

अंत में वही हुआ जो सब चाहते थे यानी तलाक ................
यह महज़ इत्तेफाक ही था कि दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक ही टी-स्टॉल पर बैठे , कोल्ड ड्रिंक्स लिया।

यह भी महज़ इत्तेफाक ही था कि तलाकशुदा पति-पत्नी एक ही मेज़ के आमने-सामने जा बैठे।
लकड़ी की बेंच और वो दोनों .
''कांग्रेच्यूलेशन .... आप जो चाहते थे वही हुआ ....'' स्त्री ने कहा।
''तुम्हें भी बधाई ..... तुमने भी तो तलाक दे कर जीत हासिल की ....'' पुरुष बोला।

''तलाक क्या जीत का प्रतीक होता है????'' स्त्री ने पूछा।
''तुम बताओ?''

पुरुष के पूछने पर स्त्री ने जवाब नहीं दिया, वो चुपचाप बैठी रही, फिर बोली, ''तुमने मुझे चरित्रहीन कहा था....
अच्छा हुआ.... अब तुम्हारा चरित्रहीन स्त्री से पीछा छूटा।''
''वो मेरी गलती थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था'' पुरुष बोला।
''मैंने बहुत मानसिक तनाव झेली है'', स्त्री की आवाज़ सपाट थी न दुःख, न गुस्सा।

''जानता हूँ पुरुष इसी हथियार से स्त्री पर वार करता है, जो स्त्री के मन और आत्मा को लहू-लुहान कर देता है... तुम बहुत उज्ज्वल हो। मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे बेहद अफ़सोस है, '' पुरुष ने कहा।
स्त्री चुप रही, उसने एक बार पुरुष को देखा।

कुछ पल चुप रहने के बाद पुरुष ने गहरी साँस ली और कहा, ''तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी कहा था।''
''गलत कहा था''.... पुरुष की ओऱ देखती हुई स्त्री बोली।
कुछ देर चुप रही फिर बोली, ''मैं कोई और आरोप लगाती लेकिन मैं नहीं...''

प्लास्टिक के कप में चाय आ गई।
स्त्री ने चाय उठाई, चाय ज़रा-सी छलकी। गर्म चाय स्त्री के हाथ पर गिरी।
स्सी... की आवाज़ निकली।
पुरुष के गले में उसी क्षण 'ओह' की आवाज़ निकली। स्त्री ने पुरुष को देखा। पुरुष स्त्री को देखे जा रहा था।

''तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?''
''ऐसा ही है कभी वोवरॉन तो कभी काम्बीफ्लेम,'' स्त्री ने बात खत्म करनी चाही।
''तुम एक्सरसाइज भी तो नहीं करती।'' पुरुष ने कहा तो स्त्री फीकी हँसी हँस दी।
''तुम्हारे अस्थमा की क्या कंडीशन है... फिर अटैक तो नहीं पड़े????'' स्त्री ने पूछा।

''अस्थमा।डॉक्टर सूरी ने स्ट्रेन... मेंटल स्ट्रेस कम करने को कहा है, '' पुरुष ने जानकारी दी।
स्त्री ने पुरुष को देखा, देखती रही एकटक। जैसे पुरुष के चेहरे पर छपे तनाव को पढ़ रही हो।
''इनहेलर तो लेते रहते हो न?'' स्त्री ने पुरुष के चेहरे से नज़रें हटाईं और पूछा।

''हाँ, लेता रहता हूँ। आज लाना याद नहीं रहा, '' पुरुष ने कहा।
''तभी आज तुम्हारी साँस उखड़ी-उखड़ी-सी है, '' स्त्री ने हमदर्द लहजे में कहा।
''हाँ, कुछ इस वजह से और कुछ...'' पुरुष कहते-कहते रुक गया।
''कुछ... कुछ तनाव के कारण,'' स्त्री ने बात पूरी की।
पुरुष कुछ सोचता रहा, फिर बोला, ''तुम्हें चार लाख रुपए देने हैं और छह हज़ार रुपए महीना भी।''

''हाँ... फिर?'' स्त्री ने पूछा।
''वसुंधरा वाले फ्लैट की कीमत तो बीस लाख रुपए होगी??? मुझे सिर्फ चार लाख रुपए चाहिए....'' स्त्री ने स्पष्ट किया।
''बिटिया बड़ी होगी... सौ खर्च होते हैं....'' पुरुष ने कहा।
''वो तो तुम छह हज़ार रुपए महीना मुझे देते रहोगे,'' स्त्री बोली।
''हाँ, ज़रूर दूँगा।''
''चार लाख अगर तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना,'' स्त्री ने कहा।

उसके स्वर में पुराने संबंधों की गर्द थी।
पुरुष उसका चेहरा देखता रहा....
कितनी सह्रदय और कितनी सुंदर लग रही थी सामने बैठी स्त्री जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी।
स्त्री पुरुष को देख रही थी और सोच रही थी, ''कितना सरल स्वभाव का है यह पुरुष, जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था उससे...

एक बार हरिद्वार में जब वह गंगा में स्नान कर रही थी तो उसके हाथ से जंजीर छूट गई। फिर पागलों की तरह वह बचाने चला आया था उसे। खुद तैरना नहीं आता था लाट साहब को और मुझे बचाने की कोशिशें करता रहा था... कितना अच्छा है... मैं ही खोट निकालती रही...''

पुरुष एकटक स्त्री को देख रहा था और सोच रहा था, ''कितना ध्यान रखती थी, स्टीम के लिए पानी उबाल कर जग में डाल देती। उसके लिए हमेशा इनहेलर खरीद कर लाती, सेरेटाइड आक्यूहेलर बहुत महँगा था।

हर महीने कंजूसी करती, पैसे बचाती, और आक्यूहेलर खरीद लाती। दूसरों की बीमारी की कौन परवाह करता है? ये करती थी परवाह! कभी जाहिर भी नहीं होने देती थी।

कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपनी मर्दानगी के नशे में रहा। काश, जो मैं इसके जज़्बे को समझ पाता।''

दोनों चुप थे, बेहद चुप।
दुनिया भर की आवाज़ों से मुक्त हो कर, खामोश।
दोनों भीगी आँखों से एक दूसरे को देखते रहे....
''मुझे एक बात कहनी है, '' आवाज़ में झिझक थी।
''कहो, '' स्त्री नजल आँखों से उसे देखा।
''डरता हूँ,'' पुरुष ने कहा।
''डरो मत। हो सकता है तुम्हारी बात मेरे मन की बात हो,'' स्त्री ने कहा।
''तुम बहुत याद आती रही,'' पुरुष बोला।
''तुम भी,'' स्त्री ने कहा।
''मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ।''
''मैं भी.'' स्त्री ने कहा।
दोनों की आँखें कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं।
दोनों की आवाज़ जज़्बाती और चेहरे मासूम।
''क्या हम दोनों जीवन को नया मोड़ नहीं दे सकते?'' पुरुष ने पूछा।
''कौन-सा मोड़?''

''हम फिर से साथ-साथ रहने लगें... एक साथ... पति-पत्नी बन कर... बहुत अच्छे दोस्त बन कर।''
''ये पेपर?'' स्त्री ने पूछा।
''फाड़ देते हैं।'' पुरुष ने कहा औऱ अपने हाथ से तलाक के कागजात फाड़ दिए।

फिर स्त्री ने भी वही किया। दोनों उठ खड़े हुए। एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराए। दोनों पक्षों के रिश्तेदार हैरान-परेशान थे। दोनों पति-पत्नी हाथ में हाथ डाले घर की तरफ चले गए। घर जो सिर्फ और सिर्फ पति-पत्नी का था ।।

पति पत्नी में प्यार और तकरार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जरा सी बात पर कोई ऐसा फैसला न लें कि आपको जिंदगी भर अफसोस हो ।।

पत्नी – आई लव यू ...पति – (धीरे से ) ... आई लव यू टू ...पत्नी – अपसेट क्यों लग रहेहो .....??पति – बस थोडा सा मूड ऑफ था ।...
11/05/2019

पत्नी – आई लव यू ...
पति – (धीरे से ) ... आई लव यू टू ...
पत्नी – अपसेट क्यों लग रहेहो .....??
पति – बस थोडा सा मूड ऑफ था ।
पत्नी – दोस्तों के साथ तो बड़े खुश रहते हो ......और मेरे साथ ड्रामे ....
पति – (प्यार से ) ऐसा कुछ नही है जानू तबियत थोडा सा ठीक नहीं है बस ...
पत्नी – हाँ अभी दोस्त फोन करेंगे तो दो सेकेण्ड में तबियत ठीक हो जायेगी ....
पति – अब दोस्त कहाँ से आ गए बीच में .... मेरा मूडथोडा सा अपसेट है बस ....
पत्नी – मेरे साथ ही तुम्हारा मूड अपसेट होता है....,दोस्तों के साथ एन्जॉय करते हो ...बड़े हंस हंस के फोटो खिंचवाते हो ...... कोई और चुड़ैल पसंद आ गयी होगी ....
पति – (थोडा सा हंसते हुए ) ... कोई और चुड़ैल मतलब ... तुम भी चुड़ैल हो क्या ....तुम भी ना कहाँ से कहाँ बात को ले जा रही हो ....
पत्नी – आज सब क्लियर होगा ..!!
पति – क्या क्लियर करना है जानू ...ऐसा क्या हो गया ...???
पत्नी – (खुद कन्फ्यूज्ड ) ... जब तुम खुद ही क्लियर नही हो ....तो तुम्हे कुछ पता नही जैसे ....छोडो अब मैं कुछ नही बोलूंगी ..
पति – ( थोडा सा मामले को सम्भालते हुए ) तुम्हे हुआ क्या है किस बात पे अपसेट ही बताओ तो सही .....
पत्नी – तुम्हारी संगत ही खराब है .....
पति – मगर मेरे साथ तो तुम रहती हो ...
पत्नी – ( गुस्से में ) बस अब बहुत हो गया .....अब और नही ....
पति – हुआ क्या है ये तो बताओ ....??
पत्नी – हम अब साथ नही रह सकते ....!!!
पति – अब ये बात कहाँ से आई ....???
पत्नी – मुझे तलाक चाहिए ....
पति – ओके ....
पत्नी – ( रोना शुरू करते हुए ) हाँ हाँ यही चाहते हो ना तुम ... ताकि फिर तुम जो मर्जी कर सको ...
पति – अरे तुमने खुद ने बोला अभी .... मैंने क्या गलत कहा ......
पत्नी – इतनी प्रोब्लम थी तो बोला क्यों नही ...मैं खुद ही बिना कुछ बोले चली जाती तुम्हारी लाइफ से ....
पति -(अपने बाल नोचते हुए )अरे मुझे मेरी गलती तो बता दे .....
पत्नी – वक्त आने पे पता चल जायेगी तुम्हे अपने आप ....जब मैं चली जाउंगी ...चली जाउंगी ...
पति – अच्छा तो मैं इंतजार करता हूँ सही वक्त का ...
पत्नी – तुम सीरियस कब होवोगे ....??
पति – तो क्या अब अस्पताल में भर्ती हो जाऊ सीरियस होने के लिए .....??
पत्नी – भाड में जाओ ..
पति – मुझसे दुबारा बात मत करना ...
तीन घंटे बाद ...
पत्नी – तुम्हे पता है ना मैं तुम्हारे बिना नही रह सकती जानू ...सौरी आई लव यू ....
पति – (सबकुछ भूलकर ) ओके आईलव यू टू ...
पत्नी --- अच्छा तुमने बताया नही अपसेट क्यों थे ...??

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